Sunday, Feb 28, 2021
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RakeshTikait said that farmers movement will not end till the repeal of the three Farm laws sohsnt

तीनों कृषि कानून रद्द होने तक खत्म नहीं होगा किसान आंदोलन- राकेश टिकैत

  • Updated on 1/17/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के विरोध में किसानों का आंदोलन आज 53वें दिन भी लगातार जारी है। ऐसे में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने संवादाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि 'किसना आंदोलन जारी रहेगा। आंदोलन में करीब 10 दौर की वार्ता हो चुकी है, सरकार पूर्ण रूप से अड़ियल रुख कर रही है। क्लॉज पर चर्चा वो करेगा जिसे कानून में संशोधन कराना हो, ये हमारा सवाल है ही नहीं। सरकार को ये तीनों कानून खत्म करने पड़ेंगे।'

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अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव ने लगाए आरोप
इससे पहले अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह ने कृषि कानूनों के मुद्दे पर कहा है कि लगभग दो महीनों से हम ठंड के मौसम में पीड़ित हैं और मर रहे हैं। सरकार हमें 'तारिख पे तारिख’ दे रही है और चीजों को खींच रही है ताकि हम थक जाएं और जगह छोड़ दें। यह उनकी साजिश है। 

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9वें दौर की वार्ता भी रही बेनतीजा
बता दें किसानों और सरकार के बीच 15 जनवरी को हुई 9वें दौर की वार्ता भी बेनतीजा रही है। अब सरकार ने किसानों को 10वें दौर की बातचीत के लिए 19 जनवरी का समय दिया है। आज किसान आंदोलन का 53वां दिन है। दिल्ली में पड़ रही कड़ाके की ठंड में किसान सड़कों पर बैठें है और कानून रद्द करने की अपनी जिद्द पर अड़े हुए हैं। 

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सुुप्रीम कोर्ट से नई समिति बनाने का अनुरोध
वहीं एक किसान संगठन ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि तीन विवादास्पद कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए बनाई गई समिति से शेष तीन सदस्यों को हटाया जाए। साथ ही ऐसे लोगों को उस में रखा जाए जो परस्पर सौहार्द के आधार पर काम कर सकें।

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केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर कही ये बात
बता दें कि किसानों के  केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा है कि हमने किसान यूनियनों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें हम मंडियों, व्यापारियों के पंजीकरण और अन्य के बारे में उनकी आशंकाओं को दूर करने पर सहमत हुए थे। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने स्टबल बर्निंग एंड इलेक्ट्रिसिटी पर कानूनों पर चर्चा के लिए भी सहमति दी लेकिन यूनियन केवल कानूनों को निरस्त करना चाहती हैं। अधिकांश किसान और विशेषज्ञ कृषि कानूनों के पक्ष में हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, कानूनों को लागू नहीं किया जा सकता है। अब हम उम्मीद करते हैं कि किसान 19 जनवरी को कानून के खंड-वार पर चर्चा करेंगे और सरकार को बताएंगे कि वे कानूनों के निरसन के अलावा क्या चाहते हैं।

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