Tuesday, Oct 26, 2021
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मानव विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है राखीगढी साईट

  • Updated on 9/26/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। इंसान हमेशा से इच्छूक रहा है यह बात जानने को कि हमसे पहले के लोग कैसे रहते थे और उस दौरान विकास की गति क्या थी। हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) व डक्कन यूनिवर्सिटी ने इसी की जांच-पडताल करने के लिए हडप्पन साईट राखीगढी में अपने तंबू गाड लिए हैं। यहां जूटे पुरात्वविद् राखीगढी के उत्खन्न कार्य को अगले आयाम तक ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। इसकी वजह मानवीय जिज्ञासा भी है क्योंकि हाल ही में हुए उत्खन्न ने साफ कर दिया था कि हडप्पा सभ्यता के लोग भारतीय उपमहाद्वीप के ही मूल निवासी हैं। पुरातत्वव्दिों का मानना है कि मानव विकास की दृष्टि से राखीगढी साईट बहुत महत्वपूर्ण है। यहां अभी तक 7 माउंट का उत्खन्न किया जा चुका है तो आज हम इन सातों माउंट की विशेषता आपको बताने जा रहे हैं।
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माउंट नंबर 1
एएसआई ने हडप्पा सभ्यता की सबसे बडी साइट राखीगढी में माउंट 1 पर जब उत्खन्न का कार्य किया तब उन्हें वहां से हडप्पन सिविलाइजेशन के सबूत मिलने प्रारंभ हो गए। यहां मिली कई वस्तुओं, खिलौनों, मकानों को बनाने के तरीके ने पुरातत्वविद्ों को हडप्पा सभ्यता में लगातार होने वाले विकास की भी पुख्ता जानकारी मिली। जहां शुरूआती दौर में हडप्पा सभ्यता के लोगों के मकान सर्कुलर हुआ करते थे, वहीं यहां स्कैवेयर शेप के मकान मिले।

माउंट नंबर 2
हडप्पा सभ्यता में माउंट नंबर दो काफी महत्वपूर्ण पुरातत्वविद्ों द्वारा माना जाता है क्योंकि यहां से उन्हंे मैन्यूफेक्चरिंग के सबूत प्राप्त हुए थे। ऐसा लगता था कि मानौ हडप्पा सभ्यता के लोग व्यवसाय से भी जूडे हुए थे। वहां पर कई प्रकार के वेस्ट मैटेरियल तो मिले ही साथ ही वर्किंग प्लेटफाॅर्म भी मिला। जिससे पता चला की यहां क्राफ्ट तैयार किए जाते थे क्योंकि यहां से काॅपर का स्लैग व पत्थर के मनकों का वेस्ट भी मिला है।
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माउंट नंबर 3 
माउंट नंबर 3 भी माउंट नंबर 1 ही तरह ही हडप्पन सिविलाइजेशन या कहें हडप्पा के लोगों की एक बस्ती के रूप में इंगित हुआ। यहां कुछ मकानों के सबूत मिले, कुछ मनके मिले और कई प्रकार की ज्वैलरी व खिलौने पाए गए जोकि हडप्पा सभ्यता के लोगों द्वारा इस्तेमाल में लाई जाती रहीं होंगी। यहां पर सभी मकानों के ढांचे तिकोने व चैरस आकार में बनाए गए थे। 

माउंट नंबर 4 व 5
कहने के लिए राखीगढी के माउंट नंबर  4 व 5 अलग-अलग जरूर हैं लेकिन दोनों में काफी गहरा जुडाव है। यहां पुरातत्वविद्ों को माउंट 1 व माउंट 3 में मिले मकानों से अलग विकसित शहर का मिला। जिसे दो भागों में उन्होंने विभाजित किया पहला सिटेडल यानि बडे लोगों के रहने के लिए बनाए गए आवास व दूसरा लोअर टाउन यानि काॅमन लोगों के लिए रहने वाले घर। इस चरण में शहरीकरण और प्लानिंग कर मकान बनाए गए थे।
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माउंट 6 
पुरातत्वविद् व डक्कन काॅलेज के प्रोफेसर वसंत शिंदे जिन्होंने इस उत्खन्न के कार्य को हाल ही में किया था। उनका कहना है कि माउंट 6 पर अर्ली हडप्पन की जानकारी मिली। जिनके मकान सर्कुलर शेप में थे और भंडारण करने का स्थान प्रत्येक मकान में बनाया गया था। इसके अलावा यहां से मनके, टेराकोटा के आभूषण व पालतु जानवर जैसे बैल, कुत्ते व सुअर के खिलौने प्राप्त हुए।

माउंट 7
प्रो. वसंत शिंदे कहते हैं कि राखीगढी में सबसे महत्वपूर्ण जगह माउंट 7 है जिसने भारत में आए आर्यों की थ्योरी को बदलकर रख दिया। यहां उन्हें 60 कब्रगाह मिले, जिनमें से 50 फीसदी कब्र में पूरा एविडेंस मिला, कंकाल के साथ बर्तन, गहने व अन्य सामान उनकी अंतिम यात्रा के दौरान रखे गए थे। जबकि 50 फीसदी कब्रगाह बर्बाद हो गया था क्योंकि लोग जानकारी के अभाव में वहां खेती कर रहे थे।


 

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