Tuesday, Oct 04, 2022
-->
rashtriya swayam sewak sangh rss chief mohan bhagwat sohsnt

आसान नहीं था स्वयंसेवक से सरसंघचालक बनने तक का सफर, जानें मोहन भागवत से जुड़े कुछ अनछुए पहलू

  • Updated on 9/11/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मौजूदा सरसंघचालक मोहन भागवत आज अपना 70 वां जन्मदिन मना रहे हैं। मालूम हो कि भागवत का जन्म 11 सितंबर 1950 को आज ही दिन हुआ था। बचपन से ही देश प्रेम की भावना से ओतप्रोत भागवत महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के रहने वाले हैं।  

स्वदेशी का मतलब सभी विदेशी उत्पादों का बहिष्कार नहीं: मोहन भागवत

निस्वार्थ भाव से सेवा के लिए जाना जाता है संघ
देश में आज संघ ने जो मुकाम हांसिल किया है उसके पीछे कई सालों की मेहनत है। आरएसएस को विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान माना जाता है। निस्वार्थ भाव से प्राणीमात्र की सेवा करते हुए संघ ने आज न सिर्फ भारत में बल्कि दुनियाभर में अपनी छाप छोड़ी है।

भूमि पूजन के अवसर पर मोहन भागवत ने आडवाणी के योगदान को किया याद, कही ये बात

तीन पीढियों से जुड़ा है संघ में मोहन भागवत का परिवार
संघ में मोहन भागवत का परिवार तीन पीढियों से जुड़ा हुआ है। भागवत साल 2009 में संघ के सरसंघचालक नियुक्त किए गए थे। भागवत के दादा और पिता के साथ उनकी माता भी संघ की महिला विंग की सदस्य रह चुकी हैं। मालूम हो कि भागवत के दादा नारायण भागवत संघ के सस्थापक डॉ. केशवराम बलिराम हेडगेवार के मित्र हुआ करते थे। उनके पिता का पूरा बचपन संघ की शाखाओं में रहते हुए देश की सेवा में बीता। कुछ ऐसा ही मोहन भागवत के साथ हुआ उनका बचपन भी संघ की शाखाओं में बीता।

संघ का बस ‘स्वरूप’ बदल गया

मोहन भागवत ने पढ़ाई के साथ-साथ की देश सेवा
मोहन भागवत ने संघ में रहते हुए अपनी पढ़ाई को भी जारी रखा। उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा चंद्रपुर से पूरी की और इसके बाद उन्होंने अकोला के डॉ. पंजाबराव देशमुख वैटनरी कॉलेज से डिग्री हासिल की। कम ही लोगों को मालूम है कि उन्होंने डिग्री लेने के उपरांत चंद्रपुर में एनिमल हसबेंडरी विभाग में बतौर वैटनरी अधिकारी सरकारी नौकरी भी की थी।

दिल्ली हिंसा पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान

साल 2009 में संघ के प्रमुख चुने गए भागवत
देशहित से जुड़े मसलों पर अपनी आवाज बुलंद रखने वाले मोहन भागवत देश में आपातकाल लागू होने से कुछ समय पहले संघ के प्रचारक बने थे। राम मंदिर और कश्मीर के मुद्दो पर भी उन्होंने अपनी बात प्रमुखता से रखी। इसके बाद साल 2000 में वे संघ के सरकार्यवाह चुने गए थे जिसके बाद साल 2009 में उन्हें संघ का प्रमुख चुना गया था। 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.