Monday, Jan 21, 2019

‘रैट होल’ कोयला खानें बनीं मजदूरों के लिए जानलेवा

  • Updated on 12/29/2018

साएब अली (21) उन खनिकों में से एक है, जो मेघालय की पूर्वी जयंतिया हिल्स के कसान स्थित अवैध ‘रैट होल’ कोयला खान में फंसने के बाद बच निकलने में सफल रहे।

अब यह आत्मग्लानि उनका पीछा कर रही है कि वे अपने साथी खनिकों को असहाय होकर पानी में घिरते देखते रहे जिसने 350 फुट गहरी खान को भर दिया। ऐसा माना जाता है कि 13 दिसम्बर से कम से कम 14 लोग गड्ढेनुमा खान में फंसे हुए हैं। बचाव कार्य जारी होने के बावजूद उनके बचने के अवसर बहुत कम हैं।

साएब खानों में काम करके प्रति दिन 2000 रुपए कमाता है, जिसकी वह किसी अन्य नौकरी में कभी आशा भी नहीं कर सकता। यह धन एक खतरे के साथ आता है और इस नौकरी में कोई स्वास्थ्य बीमा तथा अन्य कवर भी नहीं है, जो स्वास्थ्य तथा जीवन के लिए इस तरह के खतरे पैदा करती है।

उसने बताया कि वह तो बच गया लेकिन अपने मित्रों के पारिवारिक सदस्यों को बचते न देखना उसे दुख देता है। गड्ढे में फंसे उसके मित्रों की छवियां उसे परेशान करती हैं।

राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल द्वारा 17 अप्रैल 2014 को राज्य में ‘रैट होल’ खनन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद यह महज एक नवीनतम दुर्घटना है। 2012 में कम से कम 15 व्यक्ति दक्षिणी गारो हिल्स के नांगलबिब्रा स्थित एक ‘रैट होल’ खान में फंस गए थे। कोई नहीं जानता कि उनके साथ क्या हुआ। तब से खान ढहने की कई घटनाएं हुई हैं।

कोयला खनन की गोपनीय प्रकृति के कारण कई मौतों की रिपोॄटग नहीं हो पाती। कार्यकत्र्ताओं के अनुसार, यदि दुर्घटना में प्रवासी खनिक शामिल हों तो कार्रवाई का संचालन करने वाले लोग मामले को रफा-दफा कर देते हैं। कार्यकत्री एंजेला रंगड़ ने कहा कि उसका अर्थ यह हुआ कि स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस अत्यंत सक्रिय नहीं है। उन्होंने इस बार सम्भवत: इसलिए ध्यान दिया क्योंकि भीतर फंसे कुछ श्रमिक स्थानीय थे।

यहां तक कि मुख्यमंत्री कोनराड संगमा भी स्वीकार करते हैं कि कसान दुर्घटना के बाद से अवैध खनन एक फलता-फूलता व्यवसाय बन गया है। उन्होंने कहा कि अवैध खनन पर पूर्ण नियंत्रण रखना कठिन है लेकिन जिला प्रशासन को चौकसी बढ़ाने के लिए कहा गया है।

इस बीच अवैध खनन व्यवसाय से जुड़े आपराधिक तत्व अत्यंत आक्रामक भी हो गए हैं। गत 8 नवम्बर को पूर्वी जयंतिया हिल्स जिला में ऐसे ही गुंडों के हमले में सिविल सोसाइटी वूमैन्स आर्गेनाइजेशन की अध्यक्ष एग्नेस खारशींग तथा उनकी सहयोगी अमिता संगमा घायल हो गई थीं, जिन्हें हमलावर मरा समझ कर सड़क पर छोड़ गए थे। इसी वर्ष मार्च में एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट पोपिनहम माजॉ की ख्लिहरियात में हत्या कर दी गई थी।

मेघालय में कोयला खनन व्यवसाय पर निजी लोगों का अधिकार है। जनजातीय प्रभुत्व वाले राज्य में समुदाय जमीन खरीद लेते हैं और उनके पास स्रोतों के अधिकार भी होते हैं। चूंकि कोयला खनन से अच्छा धन मिलता है इसलिए सरकार के लिए भी यह राजस्व के प्रमुख स्रोतों में से एक बताया जाता है।

समुदायों के अधिकार वाली जमीनों को इसी कारण बड़ी तेजी से कोयला खनन जैसी गैर-कृषि गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है।                                                                                                          ---एन. मित्रा

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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