Saturday, Jul 31, 2021
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आईटी नियमों को लेकर बोले रविशंकर प्रसाद, ट्विटर ने नियमों की जानबूझकर की अवहेलना

  • Updated on 6/16/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि ट्वीटर मध्यस्थ नियमों का पालन करने में विफल रहा और उसने कई अवसर मिलने के बावजूद जानबूझक इनका पालन ना करने का रास्ता चुना। नियमों का पालन ना करने को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर निशाना साधते हुए प्रसाद ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि स्वयं को स्वतंत्र अभिव्यक्ति के ध्वजवाहक के रूप में पेश करने वाला ट्विटर, जब मध्यस्थ दिशानिर्देशों की बात आती है तो जानबूझकर अवज्ञा का रास्ता चुनता है। प्रसाद ने स्वेदशी सोशल मीडिया मंच ‘कू’ पर सिलसिलेवार पोस्ट में कहा, इस बात को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्विटर संरक्षण प्रावधान का हकदार है। हालांकि, इस मामले का सामान्य तथ्य यह है कि ट्विटर 26 मई से लागू हुए मध्यस्थ दिशानिर्देशों का पालन करने में विफल रहा है।

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ट्विटर को कई अवसर दिए गए
संरक्षण (हार्बर) प्रावधान, एक कानून या विनियम का प्रावधान है जो निॢदष्ट करता है कि किसी निश्चित आचरण को, दिए गए नियम का उल्लंघन करने वाला ना माना जाए। मंत्री ने इस मामले के संबंध में ट्वीट भी किया। प्रसाद ने कहा कि ट्विटर को कई अवसर दिए गए, लेकिन उसने जानबूझकर इनका पालन ना करने का रास्ता चुना। 

बता दें कि गूगल एलएलसी ने दावा किया कि डिजिटल मीडिया के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के नियम उसके सर्ज इंजन पर लागू नहीं होते और दिल्ली हाई कोर्ट से अनुरोध किया कि वह एकल न्यायाधीश के उस आदेश को दरकिनार करे, जिसके तहत इंटरनेट से आपत्तिजनक सामग्री हटाने संबंधी मामले की सुनवाई के दौरान कंपनी पर भी इन नियमों को लागू किया गया था।

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क्या है मामला?
एकल न्यायाधीश की पीठ ने उस मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया था, जिसमें एक महिला की तस्वीरें कुछ बदमाशों ने अश्लील (पॉर्नोग्राफिक) सामग्री दिखाने वाली एक वेबसाइट पर अपलोड कर दी थीं और उन्हें अदालत के आदेशों के बावजूद वर्ल्ड वाइड वेब से पूरी तरह हटाया नहीं जा सका था। इतना ही नहीं, इन तस्वीरों को दूसरी साइट पर फिर से पोस्ट किया गया था।

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दिल्ली HC ने केंद्र को भेजा नोटिस
चीफ जस्टिस डी एन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने केंद्र, दिल्ली सरकार, इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, फेसबुक, अश्लील सामग्री दिखाने वाली (पॉर्नग्राफिक) साइट और उस महिला को नोटिस जारी किए, जिसकी याचिका पर एकल न्यायाधीश ने आदेश जारी किया था। पीठ ने उनसे 25 जुलाई तक गूगल की याचिका पर अपना-अपना जवाब देने को कहा। अदालत ने यह भी कहा कि वह अभी कोई अंतरिम आदेश नहीं देगी।

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