Thursday, Aug 18, 2022
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तिरंगे की मांग ज्यादा पर नहीं मिल रहा कच्चा माल, व्यापारी परेशान

  • Updated on 8/3/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। भारत देश इस साल अपनी आजादी के 75 वर्ष को अमृत महोत्सव के रूप में मना रहा है। इस दौरान देशवासियों से हर घर तिरंगा अभियान से जूडऩे की लगातार अपील की जा रही है। करीब 20 से 25 करोड़ घरों पर झंडा फहराने का टारगेट केंद्र सरकार द्वारा रखा गया है ताकि रिकार्ड बनाया जा सके। ऐसे में एशिया के सबसे बड़े थोक मार्केट सदर बाजार में भी तिरंगे की डिमांड काफी बढ़ गई है लेकिन कच्चा माल नहीं मिलने से व्यापारी काफी असंतुष्ट दिखाई दे रहे हैं।
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झंडा बनाने का कपड़ा नहीं आ रहा गुजरात व मध्यप्रदेश से
मालूम हो कि हर घर तिरंगा अभियान की नोडल एजेंसी संस्कृति मंत्रालय को बनाया गया है। हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इस अभियान को सफल बनानेे के लिए चर्चा भी की थी। जिसके बाद इस अभियान में और अधिक तेजी आ गई है। राज्य सरकारों, निजी व सरकारी संस्थाओं, विभागों व नगर निकायों द्वारा इसे सफल बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। जिससे तिरंगे की मांग में बीते एक सप्ताह से काफी तेजी आ गई है। सदर बाजार के थोक झंडा व्यापारियों को लाखों की संख्या में तिरंगा बनाए जाने का रोजाना ऑर्डर मिल रहा है लेकिन उनके लिए सबसे ज्यादा परेशानी का विषय कच्चे माल का उपलब्ध नहीं हो पाना है। दरअसल झंडा बनाए जाने के लिए उन राज्यों से कपड़ा आता है, जहां साडिय़ां बनाई जाती हैं। जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश। इन राज्यों में सूती साड़ी सर्वाधिक बनाई व पहनी जाती है, यही वजह है कि सूती कपड़ा इन राज्यों से झंडा बनाने के लिए आता है। लेकिन हाल यह है कि बीते कुछ दिनों से मांग के लिहाज से तिरंगे का कपड़ा नहीं मिल पा रहा है। जिससे ऑर्डर पूरा करने में व्यापारी असमर्थता जाहिर कर रहे हैं और ऑर्डर को रद्द भी कर रहे हैं। 
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नहीं मिल रहा कच्चा माल : अनिल कुमार गुप्ता, सदर बाजार
हमने तिरंगे के कई बड़े ऑर्डर सिर्फ इसलिए छोड़ दिए क्योंकि कच्चा माल मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जब कपड़ा ही समय पर नहीं मिलेगा तो ऑर्डर समय पर पूरा करके कैसे दिया जा सकेगा। लंबे समय बाद बड़ा ऑर्डर मिल रहा था लेकिन परेशानियों के चलते सदर के व्यापारी हाथ खड़े कर रहे हैं।


लैबर नहीं मिल रहे : लक्ष्य नागपाल, सदर बाजार
हमने कपड़े का पहले ही इंतजाम कर लिया था क्योंकि जिस तरह सरकार इस अभियान को लेकर चल रही थी। उसे देखकर साफ था कि बड़ा ऑर्डर मिलेगा। हम उतना ही ऑर्डर ले रहे हैं जो समय पर दे सकें। दरअसल हमारे सामने समस्या लैबर नहीं मिलने की आ रही है। कोरोना के चलते अधिकतर कारीगर दिल्ली छोड़कर जा चुके हैं।

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