Monday, Nov 28, 2022
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RBI ने ऋण सूचना कंपनियों से आंतरिक लोकपाल नियुक्त करने को कहा 

  • Updated on 10/6/2022


नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऋण सूचना कंपनियों को अगले साल एक अप्रैल तक आंतरिक लोकपाल नियुक्त करने के लिए कहा है। शिकायत निवारण तंत्र की दक्षता में सुधार के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है।  आरबीआई ने बृहस्पतिवार को जारी परिपत्र में कहा कि आंतरिक लोकपाल (आईओ) शिकायतकर्ताओं या जनता के सदस्यों से सीधे प्राप्त शिकायतों को नहीं संभालेगा। परिपत्र के अनुसार, इसके बजाय आईओ केवल उन शिकायतों से निपटेगा जिनकी पहले ही केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) द्वारा जांच की जा चुकी है लेकिन सीआईसी द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से खारिज कर दी गई हैं। 

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केंद्रीय बैंक ने इस साल अगस्त में रिजर्व बैंक-एकीकृत लोकपाल योजना (आरबी-आईओएस) 2021 को और अधिक व्यापक बनाने के लिए सीआईसी को भी योजना के दायरे में लाने का फैसला किया था। आरबीआई ने कहा था कि यह कदम सीआईसी के खिलाफ शिकायतों के लिए विनियमित संस्थाओं के ग्राहकों को एक लागत मुक्त वैकल्पिक निवारण तंत्र प्रदान करेगा।

आरबीआई ने बृहस्पतिवार को सीआईसी द्वारा आंतरिक लोकपाल की नियुक्ति पर एक परिपत्र जारी किया। परिपत्र में कहा गया, ‘‘प्रत्येक सीआईसी आंतरिक लोकपाल को कम से कम तीन साल की निश्चित अवधि के लिए नियुक्त करेगा। यह अवधि लेकिन पांच साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। सीआईसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आईओ का पद किसी भी समय खाली न रहे।’’

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SEBI ने ब्रिकवर्क रेटिंग्स का पंजीकरण रद्द किया
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विभिन्न नियमों के उल्लंघन के लिए ब्रिकवर्क रेटिंग्स इंडिया का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके साथ ही नियामक ने इस क्रेडिट रेटिंग एजेंसी को छह माह में अपना कारोबार समेटने का निर्देश दिया है। इसके अलावा एजेंसी पर कोई नया ग्राहक लेने की रोक भी लगाई गई है। संभवत: यह पहला मौका है जब सेबी ने किसी क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के लाइसेंस को निरस्त किया है। सेबी ने बृहस्पतिवार को जारी अपने आदेश में कहा कि ब्रिकवर्क ने कई तरह के उल्लंघन किए हैं। नियामक ने कहा कि ब्रिकवर्क ने उचित रेटिंग प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया और साथ ही रेटिंग प्रदान करते समय सही तरीके से जांच-परख भी नहीं की।  

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सेबी ने कहा कि रेटिंग एजेंसी अपने द्वारा दी गई रेटिंग के समर्थन में रिकॉर्ड का रखरखाव करने में भी विफल रही। साथ ही ब्रिकवर्क ने अपने आंतरिक नियमों के तहत समयसीमा का अनुपालन भी सुनिश्चित नहीं किया। सेबी ने कहा कि ब्रिकवर्क ने रेटिंग की निगरानी से संबंधित सूचना देने में भी विलंब किया। साथ ही यह उचित रेटिंग प्रक्रिया का अनुपालन सुनिश्चित करने में भी विफल रही। नियामक ने कहा कि रेटिंग समिति के सदस्य के कारोबार विकास की भूमिका से संबंधित हितों के टकराव के मुद्दे पर भी रेटिंग एजेंसी विफल रही।       

 

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