Wednesday, Dec 01, 2021
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कोरोना संकट के बीच RBI गवर्नर ने किया बड़ा ऐलान, रेपो रेट में की कटौती

  • Updated on 5/23/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कोरोना वायरस (Coronavirus) के कारण उपजे संकट के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। आरबीआई ने कोरोना संकट के प्रभाव को कम करने के लिए ब्याज दरों में कटौती, कर्ज अदायगी पर ऋण स्थगन को बढ़ाने और कॉरपोरेट को अधिक कर्ज देने के लिए बैंकों को इजाजत देने का फैसला किया। मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अचानक हुई बैठक में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में कटौती का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया। इस कटौती के बाद रेपो दर घटकर चार प्रतिशत हो गई है, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत हो गई है।

बैठक में अधिकांश सदस्य रेपो रेट घटाने के पक्ष में थे। रेपो रेट में 40 आधार अंकों की कटौती की गई है और यह 4.40 फीसदी से कम होकर चार फीसदी रह गई। साथ ही रिवर्स रेपो रेट 3.75 फीसदी से कम होकर 3.35 फीसदी कर दी गई है।

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RBI गवर्नर के बयान और मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों की मुख्य बातें-

  • 2021 में विकास दर नकारात्मक रहने की संभावना 
  • लॉकडाउन में मांग और उत्पादन दोनों में आई कमी
  • 15,000 करोड़ रुपये का क्रेडिट लाइन एग्जिम बैंक को दिया जाएगा
  • मांग और उत्पादन में कमी आई है।अप्रैल महीने में निर्यात में 60.3 % की कमी आई- RBI
  • मार्च में औद्योगिक उत्पादन में 17% की कमी दर्ज की गई है- RBI
  • कोरोना वायरस के वजह से अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान हुआ है। MPC ने रेपो रेट में कटौती करने का फैसला किया है- RBI
  • रेपो रेट को 0.40 प्रतिशत घटाकर चार प्रतिशत किया।
  • रिवर्स रेपो रेट को घटाकर 3.35 प्रतिशत किया गया।
  • दो महीनों में प्रमुख नीतिगत दरों में दूसरी बार बड़ी कमी।
  • RBI ने अहम फैसले लेने के लिए समय से पहले बुलाई एमपीसी की बैठक
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा कि एमपीसी ने वृद्धि के परिदृश्य को सबसे गंभीर जोखिम माना। 
  • वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी वृद्धि नकारात्मक रहने का अनुमान है, दूसरी छमाही में कुछ सुधार हो सकता है।
  • देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में 60 प्रतिशत योगदान करने वाले शीर्ष छह औद्योगिक राज्य मौटेतौर पर लाल या नारंगी क्षेत्रों हैं। 
  • संकेतक मार्च की शुरुआत से मांग में गिरावट की ओर इशारा कर रहे हैं।
  • एमपीसी ने माना कि कोविड-19 का आर्थिक प्रभाव शुरुआती अनुमानों के मुकाबले अधिक गंभीर है।
  • अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्र गंभीर दबाव का सामना कर रहे हैं।
  • लॉकडाउन के कारण पहली तिमाही में कृषि के अलावा अन्य आर्थिक गतिविधियों के कमजोर रहने की आशंका।
  • मुद्रास्फीति के अनुमान बेहद अनिश्चित।
  • कर्ज अदायगी पर ऋण स्थगन को तीन महीनों के लिए 31 अगस्त, 2020 तक बढ़ाया गया।
  • उधार देने वाली संस्थाओं को कार्यशील पूंजी सुविधाओं पर ब्याज को 31 अगस्त तक टालने की अनुमति है।
  • आरबीआई ने 31 जुलाई से पहले किए गए आयात पर धन प्रेषण की अवधि को छह माह से बढ़ाकर 12 माह किया।
  • आरबीआई ने एक्जिम बैंक को 15,000 करोड़ रुपए की ऋण सुविधा दी।
  • विदेशी मुद्रा भंडार 2020-21 में (15 मई तक) 9.2 अरब डॉलर बढ़कर 487 अरब डॉलर हो गया।
  • लॉकडाउन में मांग और उत्पादन दोनों में आई कमी: RBI
  • बिजली, पट्रोलियम की खपत में काफी कमी: RBI
  • देश में निवेश को लेकर काफी कमी आई: RBI
  • 6 बड़े प्रदेशों में औद्योगिक उत्पादन हुआ ठप: RBI
  • रेपो रेट में 40 बेसिक प्वॉइंट की कटौती: आरबीआई
  • ब्याज दर में 0.4% की कटौती: आरबीआई 
  • रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं: आरबीआई
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने ब्रीफिंग शुरू की।

गौरतलब है कि चार दशकों से अधिक समय में पहली बार अर्थव्यवस्था संकुचन के दौर से गुजर सकती है। आरबीआई ने प्रमुख उधारी दर को 0.40 प्रतिशत घटा दिया। माना जा रहा है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के 20 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के बाद अब आरबीआई गवर्नर अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ बड़े एलान कर सकते हैं। बता दें कि सरकार द्वारा देश में लॉकडाउन की मियाद बढ़ाकर 31 मई कर दी गई है। ऐसे में आरबीआई गवर्नर की यह कॉन्फ्रेंस बेहद अहम है। 

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रेलिगेयर फिवेस्ट लिमिटेड ने दी प्रतिक्रिया
भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर शक्तिकांत दास के बैठक के बाद रेलिगेयर फिवेस्ट लिमिटेड के अध्यक्ष पंकज शर्मा ने एक अहम बयान दिया है। पंकज शर्मा के मुताबिक आरबीआई द्वारा लिया गिया यह फैसला बहुत ही स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा रेपो रेट में 40 बीपीएस से 4% तक की गई कमी हाल ही में सरकार द्वारा घोषित प्रोत्साहन पैकेज को पूरक बनाएगी और सिस्टम में बहुत आवश्यक तरलता का विस्तार करेगी।

उन्होंने आरबीआई के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि हमें उम्मीद है कि आरबीआई जल्द ही इस मुद्दे का समाधान करेगा। शहरी और ग्रामीण दोनों मांगों में निरंतर गिरावट के साथ, हम मानते हैं कि MPC का निर्णय अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल वसूली की स्थिति पैदा करेगा। आरबीआई द्वारा अनुरक्षित नीति भी उत्साहजनक है क्योंकि केंद्रीय बैंक ने स्थिति को और अधिक सुगम बनाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर की है।

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