Thursday, Aug 18, 2022
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‘क्रेडिट’ सूचना देने वाली कंपनियों को ओम्बुड्समैन के दायरे में लाएगा रिजर्व बैंक

  • Updated on 8/5/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने व्यक्तियों और कंपनियों के कर्ज के बारे में सूचना देने वाली कंपनियों (सीआईसी) में शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये उन्हें आंतरिक ओम्बुड्समैन के दायरे में लाने का निर्णय किया है। रिजर्व बैंक-एकीकृत ओम्बुड्समैन योजना (आरबीआई-आईओएस) से ग्राहक शिकायत निपटान व्यवस्था बेहतर हुई है। आरबीआई ने विकासात्मक और नियामकीय नीतियों के तहत शुक्रवार को बयान में कहा कि आरबी-आईओएस के तहत शिकायत निपटान में लगने वाले समय में काफी कमी आई है।   

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  द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ‘‘सीआईसी के भीतर शिकायत निपटान व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर अब इन कंपनियों को आंतरिक ओम्बुड्समैन के दायरे में लाने का निर्णय किया गया है।’’  रिजर्व बैंक एकीकृत ओम्बुड्समैन योजना (आरबी-आईओएस), 2021 के तहत फिलहाल शहरी सहकारी बैंकों समेत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) और 50 करोड़ रुपये और उससे ऊपर के जमा वाले गैर-अनुसूचित प्राथमिक सहकारी बैंक आते हैं।   

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    रिजर्व बैंक ने कहा, ‘‘आरबी-आईओएस को और अधिक व्यापक बनाने के लिये क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) को इसके दायरे में लाने का निर्णय लिया गया है। यह इन कंपनियों के ग्राहकों को उसके खिलाफ शिकायतों के समाधान के लिये लागत मुक्त वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान करेगा।’’ केंद्रीय बैंक ने बयान में कहा कि इसके अलावा आंतरिक स्तर पर शिकायतों के समाधान की व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिये सीआईसी को आंतरिक ओम्बुड्समैन के दायरे में भी लाने का निर्णय किया गया है।

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     आउटसोॢसंग के बारे में केंद्रीय बैंक ने कहा कि नियमित इकाइयां (शहरी सहकारी बैंक समेत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां आदि) लागत कम करने और विशेषज्ञ सेवा लेने के लिये आउटसोर्सिंग का सहारा ले रही हैं।       हालांकि, आउटसोॢसंग स्वीकृत गतिविधि है और नियमित इकाइयों का परिचालन से जुड़ा निर्णय है। लेकिन इससे इन इकाइयों के लिये विभिन्न जोखिम भी पैदा होते हैं। 

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