Tuesday, Sep 25, 2018

समझें, समय से पहले चंद्रशेखर आजाद 'रावण' की रिहाई का पूरा राजनीतिक गणित

  • Updated on 9/14/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। साल 2017 में सहारनपुर में जातीय दंगे फैलाने के आरोप में जेल में बंद भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद रावण को पहले ही रिहा कर दिया है। सूबे की योगी सरकार ने ये फैसला लिया है। योगी सरकार की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक रावण की मां की याचिका पर गौर करते हुए समयपूर्व रिहाई करने का फैसला लिया गया है। वैसे चंद्रशेखर रावण को एक नवंबर, 2018 तक जेल में गुजारना था। 

2019 चुनाव को देखते हुए सरकार ने किया रिहा 
योगी सरकार के इस फैसले को लेकर हर तरफ चर्चा है कि सरकार ने लोकसभा चुनावों से पहले दलितों की नाराजगी दूर करने के तौर पर ऐसा किया है। बता दें कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में भीम आर्मी का खासा प्रभाव है, जो दलित आंदोलन के जरिए अपनी जड़ें जमाना चाहती है। हाल में हुए कैराना और नूरपुर के उपचुनावों में बीजेपी के मिली करारी हार का कारण भीमा आर्मी के दलित मुस्लिम गठजोड़ को बड़ी वजह माना जा रहा था। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब ऐसे में बीजेपी 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में किसी तरह का कोई खतरा नहीं उठाना चाहती है। इस वजह से योगी सरकार ने ये कदम उठाया है। 

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दरअसल, रावण की सभी मामलों में पहले ही जमानत हो चुकी थी और केवल राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत ही उसकी महज 26 दिन की कारावास अवधि शेष थी। ऐसे में इस फैसले को ही नहीं, बल्कि भाजपा को भी सियासी नफा-नुकसान की तराजू में तौला जाएगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी को दलित विरोधी दाग छुड़ाने में हर संभव प्रयास लगातार करने पड़ रहे हैं। 

रिहा होते ही बीजेपी के खिलाफ उगला जहर 
जेल से रिहा होते ही चंद्रशेखर रावण ने सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला। रावण ने कहा कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना है। इतनी ही रावण ने आगे कहा कि बीजेपी सत्ता में तो क्या विपक्ष में भी नहीं आ पाएगी। बीजेपी के गुंड़ों से लड़ना है। उन्होंने कहा कि सामाजिक हित में गठबंधन होना चाहिए।

मायावती के लिए भी खड़ा हो गया है खतरा 
योगी सरकार ने अनुसूचित जातियों को साधने के लिए बड़ा दांव खेल दिया है और मायावती के सामने एक बड़ा ख़तरा भी पैदा कर दिया है। अब तक उत्तर प्रदेश में मायावती ही अनुसूचित जातियों की सबसे बड़ी नेता हैं ,भले ही मायावती को 2014 के लोकसभा में एक भी सीट न मिली हो लेकिन बीजेपी की आंधी के बावजूद सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में उनका वोट प्रतिशत लगभग 20% रहा था लेकिन अब बसपा के बाद भीम आर्मी भी अनुसूचित जातियों की एक बड़ी संगठित इकाई बन चुकी है । 

भीमा आर्मी के गठन के बाद से ही डरती रही हैं मायावती
भीमा आर्मी का गठन होने के बाद से बसपा प्रमुख मायावती उससे खतरा महसूस करती रहीं हैं, मायावती ने पहले भीम आर्मी को आरएसएस की ही चाल बताया था। बसपा में फिलहाल कोई बड़ा चेहरा नहीं है वहीं अनिसूचित जातियों के युवाओं में चंद्रशेखर बेहद लोकप्रिय हैं और ये बात मायावती को भी अच्छे ये पता है। यहीं वजह है कि मायावती सरकार  से लगातार चेंद्रशेखर की रिहाई की मांग करती रही हैं। 

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कौन है चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण

चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण का जन्म उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के चटमलपुर के पास घडकोलीगांव में हुआ। रावण ने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद कानूनी पढ़ाई की। अब वो भीमा आर्मी के अध्यक्ष है जो कि दलितों के लिए पढ़ाई और अन्य सेवाएं मुहैया करवाती है। चंद्रशेखर आजाद खुद को रावण कहलाना ज्यादा पसंद करते है। उनके मुताबिक एक दिन वो पिता की बीमारी के कारण सहारनपुर के एक अस्पताल में गए थे। जहां उन्हें दलितों की परेशानी के बारे में पता चला जिसके बाद वो एक दलित एक्टिविस्ट बन गया। साल 2015 में चंद्रशेखर ने भीम आर्मी एकता मिशन नाम के संगठन की स्थापनी की।  

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