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चीन और भारत में मंदी, सस्ती हो सकती है बिजली

  • Updated on 8/23/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत और चीन में कोयले की मांग में आई भारी कमी के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमतों में 50 प्रतिशत से ज्यादा तक की गिरावट आ गई है। पिछले साल ऑस्ट्रेलिया में 120 डॉलर प्रति टन के हिसाब से बिक रहा कोयला अभी 61 डालर प्रति टन पर आ गया है।

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कोयले की कीमत में 50 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट
सरकार के 2018 के आंकड़ों के मुताबिक देश में पारम्परिक तरीकों से 220.90 गीगावाट बिजली का उत्पादन होता है जिसमें से 88 प्रतिशत बिजली कोयले से निर्मित होती है। लिहाजा कोयला सस्ता होने के बाद बिजली सस्ती होने के आसार बन गए हैं।  एशिया के पावर स्टेशनों में इस्तेमाल होने वाले कोयले की कीमत भारत और चीन के 2 सबसे बड़े कोयला उपभोक्ताओं में लुप्त होती मांग के कारण 3 साल में अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई है। एस. एंड  पी. प्लाट्स के अनुसार पिछले साल गर्मियों में 120 डॉलर प्रति टन के उछाल के साथ थर्मल कोयले की ऑस्ट्रेलियाई बैंचमार्क कीमत 44 प्रतिशत गिरकर 61 डॉलर प्रति टन हो गई है। 

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88 प्रतिशत बिजली कोयले से निर्मित
विश्लेषकों के अनुसार दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता चीन में बिजली की मांग में कमी के कारण कोयले की कीमतों में कमी आई है। मंदी के कारण दुनिया भर में स्वच्छ, नवीकरणीय ऊर्जा जैसे पवन और सौर, साथ ही सस्ती प्राकृतिक गैस के कारण कोयले को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। कोयले की कमजोरी से ग्लेनकोर, एंग्लो अमेरिकन और बी.एच.पी. सहित सबसे बड़े कोयला खनिकों की कमाई प्रभावित होने की संभावना है। ग्लेनकोर का शेयर, जो अपनी कमाई का लगभग 5वां हिस्सा थर्मल कोयले पर निर्भर करता है, इस साल 20 प्रतिशत गिरा है।

विनिर्माण उद्योग में मंदी के कारण कोयले की मांग हुई कमजोर
लंदन में सी.आर.यू. कंसल्टैंसी के एक विश्लेषक मिशेल लियू ने कहा कि विनिर्माण उद्योग में मंदी के कारण कोयले के लिए चीन की मांग कमजोर हुई है, जो राष्ट्रीय बिजली की मांग का लगभग 70 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि ढांचागत आॢथक तबदीलियां और ट्रेड वॉर के कारण मंदी ने थर्मल कोयला मार्कीट में नकारात्मक प्रभाव डाला है। राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार विनिर्माण उद्योग में चीनी बिजली की खपत इस वर्ष की पहली छमाही में 3.1 प्रतिशत बढ़ी जो 2018 के पहले 6 महीनों में 7.6 प्रतिशत की तुलना में तेज गिरावट दर्शाता है, जबकि इस वर्ष के पहले 7 महीनों में कुल चीनी बिजली उत्पादन में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि परमाणु और हाइड्रो शक्ति में जबरदस्त वृद्धि कारण कोयला आधारित बिजली उत्पादन एक साल पहले के मुकाबले स्थिर रहा।

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चीन के साथ-साथ भारत में भी कोयले की मांग रही कमजोर  
बी.एम.ओ. कैपिटल मार्कीट्स के एक विश्लेषक काश कमल के अनुसार चीनी अधिकारियों ने अक्तूबर में चीनी गणराज्य की आगामी 70वीं वर्षगांठ पर भी प्रदूषण पर अंकुश लगाने, कोयले की मांग को और कम करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
लियू के अनुसार इस साल थर्मल कोयले की कीमतों में गिरावट यूरोप में सस्ती गैस के झटके के कारण आई, क्योंकि उपभोक्ताओं ने सॢदयों में बिजली की अपेक्षा ज्यादा गैस का प्रयोग किया, जिस कारण कोयला सप्लायर एशियाई बाजारों में कोयला बेचने के लिए मजबूर हुए। इसके साथ ही, रिवायती तौर पर कमजोर मानसून और बढ़ रही गर्मी के कारण चीन के साथ-साथ भारत में भी कोयले की मांग कमजोर रही है। विषलेशक कहते हैं कि मार्कीट के रुझान की आगे की बड़ी परीक्षा सितम्बर में होगी जब जापानी उपभोग और आस्ट्रेलियाई उत्पादक उच्च स्तरीय थर्मल कोयले के नए सप्लाई ठेकों का बायकाट करेंगे।

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