Monday, Aug 08, 2022
-->
red-fort-india-gate-and-fighter-plane-to-be-seen-in-new-delhi

नई दिल्ली में दिखेगा लालकिला, इंडिया गेट व फाईटर प्लेन

  • Updated on 1/25/2022

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। गणतंत्र दिवस के मौके पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) को सवा चार टन फूलों से सजाया जा रहा है। गणतंत्रता दिवस की शुभकामनाओं के साथ ही इस बार एनडीएमसी के उद्यान विभाग द्वारा बनाए गए बोर्ड्स पर लालकिला व इंडिया गेट की झलक लोगों को देखने को मिलेगी। उद्यान विभाग ने अपने फ्लावर्स बोर्ड्स के जरिए पूरे इलाके को हैप्पीनेस व सेल्फी प्वाइंट में तब्दील कर दिया है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस पर संस्कृति मंत्रालय करेगा उमंग का आयोजन

कुल 24 बोर्ड व 25 फ्लावर्स फाउंटेन किए गए हैं तैयार
एनडीएमसी द्वारा कुल 24 बोर्ड्स बनवाए जा रहे हैं। जिनमें 12 बडे व 12 छोटे फ्लावर्स बोर्ड्स बनाए गए हैं। यह बोर्ड्स नई दिल्ली के इंट्री प्वाइंट व प्रमुख मार्गों जैसे अकबर रोड, तालकटोरा रोड, अशोक रोड, मंडी हाउस, शांति पथ, पीएम हाउस, सेना भवन, साउथ एवेन्यू, तीन मूर्ति व ग्यारहमूर्ति गोलचक्कर, इंडिया गेट सर्किल, सी-हेक्सेगन, तिलक मार्ग, कनाॅट प्लेस सहित विंडसर प्लेस में लगाए गए हैं। इसके अलावा 25 फ्लावर्स फाउंटेन भी बनाए गए हैं। इन्हें एनडीएमसी ने विभिन्न प्वाइंट जैसे नेहरू पार्क, तालकटोरा गार्डन, नाॅर्थ एवेन्यू, साउथ एवेन्यू, लोधी गार्डन, पुराना किला रोड नर्सरी, सर्कुलर रोड नर्सरी व काली बाडी में तैयार किया गया है। एक बोर्ड पर 25-30 मालियों ने मिलकर काम किया है।
पहले भी रहा है इंडिया गेट की छतरी पर विवाद

देशभक्ति की भावना जगाएंगे एनडीएमसी के बोर्ड्स: एस. चिल्लैया
एनडीएमसी के उद्यान विभाग के डायरेक्टर एस. चिल्लैया ने कहा कि हमारी कोशिश है कि फ्लावर्स बोर्ड्स देखकर लोगों में देशभक्ति की भावना जगे। हमने सवा चार टन के करीब फूलों का प्रयोग किया। जिसमें गेंदे के विभिन्ना रंगों के फूलों के अलावा, कलकत्ता गेंदा, जाफरी गेंदा, गुलदाउदी में पीला, सफेद व नीला रंग, बबुना, हरे रंग के पुलेज, कामिनी के पत्ते, जामुनी रंग के गैम्फरिना, नीले आॅर्चिड, हरे रंग की डैजी फूलों का प्रयोग किया गया है।
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.