Wednesday, Mar 20, 2019

भाइयो-बहनो... मुझ पर इतने मामले दर्ज, दागी उम्मीदवार TV चैनलों पर खोलेंगे अपनी पोल

  • Updated on 3/13/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भाईयो और बहनो...आमूमन ये शब्द हमने रैलियों में नेताओं के मुंह से सुने है... अब टीवी चैनलों पर भी आपको सुनाई देगा की भाईयों और बहनों... मुझ पर इतने मामले दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के मुताबिक लोकसभा चुनाव 2019 में दागी उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकॉर्ड अखबारों और टी.वी. चैनलों के माध्यम से मतदाताओं को बताने होंगे।

टीवी चैनलों पर 3 अलग-अलग दिनों में ऐसे उम्मीदवारों को खुद जनता को अपने आपराधिक मामलों का ब्यौरा देना होगा। लंबित आपराधिक मामलों या सजा की जानकारी को अपने इलाके के सर्वाधिक सर्कुलेशन वाले अखबारों में 3 अलग-अलग तारीखों को विज्ञापन के रूप में भी छपवाना होगा। ये विज्ञापन नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख या मतदान से 2 दिन पहले तक छपवाने होंगे। 

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नामांकन के समय सी फॉर्म में भी यह सब बताना जरूरी होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला आपराधिक प्रवृत्ति के उम्मीदवारों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने के उद्देश्य से सुनाया है। इस फैसले को इसी चुनाव में पूरी तरह अमलीजामा पहनाया जाना है।

2014 के लोकसभा चुनावों में देश भर में थे 17 फीसदी दागी उम्मीदवार

वेबसाइट पर देनी होगी जानकारी
आदेशों के मुताबिक आपराधिक मामलों में संलिप्त नेताओं को टिकट देने वाली पाॢटयों को अपनी वैबसाइट पर उनकी जानकारी विस्तार से डालनी पड़ेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश 25 सितम्बर 2018 में जारी किए थे, जो पूर्ण रूप से पहली बार इस लोकसभा चुनाव में लागू होंगे। केन्द्रीय चुनाव आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इस बारे में नए दिशा-निर्देश दिए हैं।

इसलिए बरती सख्ती  
आपराधिक रिकॉर्ड वाले उम्मीदवारों से अभी तक एफेडेविट ही लिए जाते थे जिसके चलते आम जनता को उनके संगीन अपराधों की जानकारी नहीं होती थी।

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क्या कहते हैं आंकड़े...
नैशनल इलैक्शन वॉच (एन.ई.डब्ल्यू.) और एसोसिएशन फॉर डैमोक्रेटिक रिफॉम्र्स (ए.डी.आर.) ने 2014 लोकसभा चुनाव पर रिसर्च के बाद एक रिपोर्ट जारी की है। दोनों संस्थाओं ने करीब 8,000 उम्मीदवारों के एफिडेविट्स की स्टडी की जिसमें 17 फीसदी उम्मीदवार ऐसे थे, जिन्होंने स्वयं अपने आपराधिक मामलों की राज्य आयुक्तों को जानकारी दी थी। देश भर में ऐसे उम्मीदवारों पर 1,398 मामले दर्ज थे, इनमें 889 गंभीर मामले एफिडेविट्स में दर्शाए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर मामलों में 5 साल या उससे अधिक सजा वाले गैर-जमानती अपराध शामिल हैं। एफिडेविट्स में हत्या, हत्या का प्रयास, अपहरण और बलात्कार जैसे अपराध भी सामने आए थे।

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महिलाओं पर अत्याचार
 2014 में 57 उम्मीदवारों पर हत्या से संबंधित मामले जबकि 173 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास के मामले चल रह थे। 58 ने महिलाओं पर अत्याचार और 54 उम्मीदवारों ने सांप्रदायिक अशांति फैलाने के मामलों का भी एफिडेविट में जिक्र किया था।

वर्तमान स्थिति...

ए.डी.आर. की 2017 अगस्त में प्रकाशित अन्य रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में 51 निर्वाचित प्रतिनिधियों पर महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले अदालत में लंबित पड़े हुए हैं। इनमें बलात्कार और अपहरण जैसे जघन्य मामले भी शामिल हैं। इन 51 निर्वाचित प्रतिनिधियों में भारतीय जनता पार्टी के 14 निर्वाचित प्रतिनिधि, शिवसेना के 7 और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के 7 प्रतिनिधि शामिल हैं। 

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