Saturday, Mar 23, 2019

सबसे ज्यादा खारिज हुए भारतीय आई.टी. कंपनियों के एच-1बी वीजा बढ़ाने के आवेदन

  • Updated on 3/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वर्ष 2018 के दौरान टाटा कंसल्टैंसी सर्विसेज, कॉग्निजैंट और इन्फोसिस के एच-1बी वीजा एक्सटेंशन के अनुरोध सबसे ज्यादा खारिज हुए। ऐसा डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के इससे जुड़ी प्रक्रिया को सख्त बनाने के कारण हुआ। माना जा रहा है कि अमरीकी टैक्नोलॉजी कम्पनियों को तरजीह देने के लिए ऐसा किया गया।

इन्फोसिस और टी.सी.एस. पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ा। इन्फोसिस के 2042 आवेदन खारिज किए गए, वहीं टी.सी.एस. के मामले में इनकी संख्या 1744 रही। ये आंकड़े एक अमरीकी थिंक टैंक सैंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज ने एच-1बी डाटा के एनालिसिस के बाद जुटाए हैं। अमरीका में हैडक्वार्टर वाली और अपने अधिकतर कर्मचारी भारत में रखने वाली कॉग्निजैंट के 3548 आवेदन वर्ष 2018 में खारिज हुए। यह किसी भी कम्पनी के लिए सर्वाधिक संख्या रही।

वर्ष 2018 में अकेले एमेजॉन को मिले 2399 वीजा परमिट
थिंक टैंक ने कहा कि टी.सी.एस., इन्फोसिस, विप्रो, कॉग्निजैंट के अलावा टैक महिंद्रा और एच.सी.एल. टैक्नोलॉजीज की अमरीकी इकाइयों के खारिज हुए आवेदनों की संख्या टॉप 30 कम्पनियों के ऐसे आवेदनों के करीब दो तिहाई पर रही। उसने यू.एस. सिटीजनशिप एंड इमीग्रेशन सर्विसेज की ओर से पेश आंकड़ों के विश्लेषण के बाद यह बात कही। इन 6 कम्पनियों को महज 16 प्रतिशत यानी 2145 एच-1बी वीजा परमिट मिले। साल 2018 में अकेले एमेजॉन को 2399 वीजा परमिट मिले।

1 अप्रैल से लागू होगा नया नियम
जनवरी में अमरीका ने एक नया नियम पेश किया, जो अप्रैल से लागू होगा। इसके तहत पहले 65000 एच-1बी वीजा की लॉटरी के लिए यू.एस. एडवांस्ड डिग्री होल्डर्स के वर्क वीजा आवेदनों को भी शामिल किया जाएगा। इससे उन अमरीकी कम्पनियों को फायदा होगा, जो इंडियन टैलेंट की तलाश में हों। भारतीय आई.टी. सॢवसेज कम्पनियां मुख्य तौर पर उन लोगों को हायर करती हैं, जिनके पास बैचलर डिग्री हो

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