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आपातकाल के 45 साल हुए आज पूरे, क्या याद हैं इमरजेंसी में उभरे नायक?

  • Updated on 6/25/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। 45 साल पहले आज ही का दिन था जब देश में इमरजेंसी लगाई गई थी। 25 जून 1975 को इमरजेंसी की घोषणा की गई थी। इसके साथ ही भारत में नागरिकों के सभी मौलिक अधिकार उनसे छीन लिए गये थे। आवाज उठाने वाले लोगों को जेलों में भरा जाने लगा। लोगों को जबरन बेघर किया गया।

इस दौरान आपातकाल के खिलाफ लड़ने वालों ने हुकुमत के आगे अपने हौसले पस्त नहीं होने दिए और आवाज उठाते रहे, इसी का नतीजा था कि 21 मार्च 1977 यानी 21 महीने बाद देश से आपातकाल हटा लिया गया और कुछ ही महीनों बाद देश ने एक तानाशाह इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया।

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इमरजेंसी में उभरे नेता
आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के खिलाफ आवाज उठाने वालो में जयप्रकाश नारायण प्रमुख नेता बनकर उभरे थे। उनके अलावा राज नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, चौधरी चरण सिंह, मोरारजी देसाई, नानाजी देशमुख, वीएम तारकुंडे, एच डी देवेगौड़ा, अरुण जेटली, राम विलास पासवान, डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी, शरद यादव, लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार जैसे नेताओं ने इंदिरा गांधी को टक्कर देने की कोशिश की लेकिन उन्हें जेल में डलवा दिया गया। इन्ही नेताओं के दम पर कांग्रेस को सत्ता से हटाया जा सका।

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जय प्रकाश नायारण
जय प्रकाश नारायण आपातकाल के खिलाफ पूरे आंदोलन का मुख्य चेहरा बने रहे। यही कारण है कि उन्हें जेपी आंदोलन का जनक भी कहा जाता है। उन्होंने 1974 से लेकर 25 जून 1975 तक देश में किसान और छात्रों के आंदोलन को एक नया मुकाम दिया।

उन्होंने अपनी राजनीतिक समझ के चलते समाजवादी और दक्षिणपंथी नेताओं को एकजुट ला कर इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन चलाया। इसलिए उन्हें आपातकाल की घोषणा के साथ जेल में डाल दिया गया। 1977 में जनता पार्टी बनी और जेपी इंदिरा गांधी को चुनाव में हरा दिया और 8 अक्टूबर 1979 को हृदय की बीमारी और मधुमेह के चलते उनका निधन हो गया।

राजनारायण
इंदिरा गांधी से सीधे तौर पर लड़ने वाले राजनारायण थे। उन्होंने 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़े थे। फिर उन्होंने कोर्ट में याचिका लगाई कि इंदिरा ने गलत तरीके से चुनाव जीत हासिल की है। इसके बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए जून 1975 को इंदिरा गांधी के चुनाव को रद्द कर दिया गया। जिसके बाद गुस्से में आई इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगा दिया। उनका 31 दिसंबर 1986 को उनका निधन हो गया।

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अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी की भी आपातकाल में गिरफ्तार हुई थी। वो महीने जेल में कैद रहे। 1996 में पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 1998 और फिर 1999 से 2004 तक अटल पीएम रहे। उन्होंने अपनी विचाराधारा से कभी समझौता नहीं किया और 16 अगस्त 2018 को लंबी बीमारी के बाद वाजपेयी का निधन हो गया।

जॉर्ज फर्नांडिस
जार्ज फर्नांडिस आपातकाल में इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन निराले तरीके से लड़ा। उन्होंने भेस बदल कर देश के अलग-अलग हिस्सों में घूम कर इस आंदोलन को तेज किया। इसके बाद उनपर ये आरोप लगा कि उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्से में डायनामाइट लगाकर विस्फोट करना चाहते थे। उन्हें जून 1976 में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने 1977 का लोकसभा चुनाव जेल में रह कर बिहार की मुजफ्फरपुर लोकसभा सीट से रिकॉर्ड मतों से जीता और जनता पार्टी सरकार में मंत्री बने। 29 जनवरी 2019 को लंबी बिमारी के बाद निधन हो गया।

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लालकृष्ण आडवाणी
बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में से एक लालकृष्ण आडवाणी आपातकाल के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे। एनडीए सरकार में वो डिप्टी प्राइम मिनिस्टर रहे लालकृष्ण आडवाणी आपातकाल के दौरान जेपी आंदोलन से जुड़े और गुजरात में काम किया। कई बड़े उतार-चढ़ावों के बीच देश की सत्ता में अहम रोल रखने वाले आडवाणी और अटल की जोड़ी पूरे देश में प्रसिद्ध रही। मौजूदा समय में आडवाणी बीजेपी के सलाहकार मंडल की भूमिका में है।

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रामकृष्ण हेगड़े
दक्षिण भारत में आपातकाल के खिलाफ सबसे मुखर आवाज रामकृष्ण हेगड़े की थी, जिन्हें मिस्टर क्लीन भी कहा जाता था। वो जेल भी गये। वो कर्नाटक के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे। रामकृष्ण हेगड़े का लंबी बीमारी के बाद 12 जनवरी 2004 को निधन हो गया। उनका नाम  टेलीफोन टेप कांड से विवाद में आया था।

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