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कोरोना वायरस: भारतीयों में है कोरोना को हराने की शक्ति, पढ़ें स्पेशल रिपोर्ट

  • Updated on 3/28/2020

नई दिल्ली/प्रियंका। कोरोना ने दुनिया में हाहाकार मचाया हुआ है। दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वालों की संख्या बढ़कर 592,514 हो गई हैं जबकि मरने वालों की संख्या अब तक 26,976 पहुंच गई है। वहीँ भारत में कोरोना से संक्रमित लोगों का आंकड़ा 900 के पार पहुंच गया है। जबकि इस संक्रमण से 21 लोगों की मौत हो चुकी है।

भारतीयों को लेकर हाल ही में हुए एक शोध में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिसे भारतीयों के लिए अच्छी खबर कहा जा सकता है। इस शोध के अनुसार भारतीय शरीर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए अपने वंशानुगत कारणों से सक्षम है। आईए विस्तार से जानते हैं।

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क्या है इस शोध में
इस शोध में एक ऐसे तथ्य का पता चला है जो खास कर भारतीयों में ही पाया जाता है। इस शोध का दावा है कि भारतीयों में एक स्पेशल और अलग तरह का माइक्रो आरएनए मौजूद है। जो वंशानुगत होता है। यह वंशानुगत आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) अन्य देशों के लोगों में नहीं पाया जाता है। इस आरएनए में कोरोना वायरस की तेजी को कम करने की ताकत है। यहां एक चौंकाने वाली बात यह कि महामारी फैलाने वाला कोरोना वायरस भी आरएनए वायरस है।

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ऐसे लगाया गया पता
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस शोध के लिए टीम ने कोरोना सार्स-टू पर यह शोध किया। जिसमें चार एक्सपर्ट ने मिलकर पांच देशों के कोरोना मरीजों की स्टडी की। इसमें भारत समेत इटली, अमेरिका, नेपाल और चीन के वुहान शहर के मरीज शामिल हैं। इसमें वुहान के दो मरीजों की हिस्ट्री भी ली गई। इसमें सभी के जीन क्रमबध किये गए। इंटीग्रेटेड सीक्वेंस बेस्ड जीनोम यानी एकीकृत अनुक्रम आधारित जीनोम की पड़ताल में भारतीयों में एक माइक्रो आरएनएए (एचएसए-एमआइआर-27-बी) मिला।

यह माइक्रो आरएनए अन्य देशों के मरीजों में नहीं मिला। वहीँ इस शोध में अनुमान लगाया गया कि भारतीयों में मौजूद विशेष माइक्रो आरएन सार्स-टू को परिवर्तित कर देता है और शायद इसलिए कोरोना वायरस की क्षमता अन्य देशों की अपेक्षा भारत में कम दिख रही है।

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शोध से मिली नई उम्मीद
वहीँ, इस शोध से वैज्ञानिकों को एक नई उम्मीद मिली है। इसलिए इस शोध को बड़े लेवल पर शुरू किया जायेगा और इसके लिए ऑनलाइन सभी देशों के मरीजों का डाटा जुटाया जा रहा है। इसकी सफलता की उम्मीद पर ही डब्लूएचओ भी डाटा शेयर कर रहा है। ऐसी उम्मीद है कि जल्द कुछ बड़ी उपलब्धि सामने होगी।

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क्या है राइबो न्यूलिक एसिड
राइबो न्यूलिक एसिड, यानी आरएनए जो किसी भी जीवित प्राणी के शरीर में डीएनए की तरह ही बेहद जरुरी भूमिका निभाता है। आरएनए शरीर में डीएनए के जींस को कॉपी करके बड़े तौर पर प्रवाहित करने का काम करता है। इसके साथ ही यह कोशिकाओं में अन्य आनुवांशिक तत्व पहुंचाने का काम भी करता है।

शरीर के जीन को सुचारू बनाना और उनकी कॉपियां तैयार करना इसी का काम है। साथ ही अलग-अलह तरह के प्रोटीनों को जोड़ने का काम भी इसी के हिस्से में आता है। आरएनए का स्वरूप एक हजार वर्षो में बहुत कम बदलता है। इसलिए इसका प्रयोग वैज्ञानिक विभिन्न प्राणियों के संयुक्त पूर्वजों की खोज करने में भी करते है।

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आगे अध्ययन की जरूरत
वहीँ, इस शोध में सिस्टमेटिक जीन लेवल म्यूटेशन एनॉलिसिस यानी प्रणालीगत जीन स्तर बदलाव विश्लेषण और बायो इंफॉरमेटिक टूल्स यानी जैव सूचना प्रणाली का प्रयोग किया गया। नतीजे देखकर कई एक्सपर्ट पर अब आगे अध्ययन की जरूरत बता रहे हैं। जिसके बाद इस शोध को विस्तार दे दिया गया है।

बता दें कि इंटरनेशनल सेंटर फॉर जेनेटिक इंजीनियिरंग एंड बायो टेक्नोलॉजी दिल्ली की टीम की ओर से कोरोना सार्स-टू पर यह शोध किया गया।

 

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