Saturday, Mar 06, 2021
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गणतंत्र दिवस समारोह में किसान आंदोलन का नहीं होगा असर! थ्री लेयर सिक्योरिटी का अभेद्य किला तैयार

  • Updated on 1/20/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। इस साल गणतंत्र दिवस (Republic Day) में दिल्ली पुलिस (Delhi Police) पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ी जिम्मेदारी है, क्योंकि किसान लगातार आंदोलन को तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं। वहीं ट्रैक्टर परेड निकालने और 1 लाख बाइकर्स के इसमें शामिल होने से चिंता और बढ़ गई है। ऐसे में ये भी हो सकता है कि कुछ लोग पास खरीदकर 26 जनवरी की परेड में शामिल होकर उसमें व्यवधान डालने की कोशिश करें।

ऐसे लोगों के लिए अब दिल्ली पुलिस अभेद्य किला तैयार कर रही है। वहीं परेड में व्यव्धान डालने के इरादे से घुसने वाले लोगों को पकड़ने के लिए अलग से जवानों की तैनाती की गई है,  जो उनके हाव-भाव देखकर ही उन्हें पहचान लेंगे और उनको वहीं दबोच लेंगे। दिल्ली पुलिस को आशंका है कि कुछ किसान पास खरीदकर  परेड में घुस सकते हैं और एंक्लोजर से उठकर परेड में बखेड़ा खड़ा कर सकते हैं। इसलिए एनक्लोजर के पास दो से तीन जवान ऐसे लोगों को दबोचने के लिए तैनात किए जाएंगे। 

इसके साथ ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आवास की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। वीआईपी आवास की ओर जाने वाले मार्गों पर पीकेट लगाकर 24 घंटे जांच शुरू कर दी गई है। 

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थ्री लेयर सिक्योरिटी का अभेद्य किला
इसके साथ ही सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम दिल्ली बॉर्डर से ही शुरू कर दिए गए हैं। 26 जनवरी के दिन पहले तो किसानों को सीमा पर ही रोक दिया जाएगा। फिर नई दिल्ली जिले की सीमाओं पर बैरिकेड्स लगे होंगे। इसके बाद राजपथ से जुड़ने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेड्स लगाकर नाकेबंदी की जाएगी। परेड का पास लेने वालों को वही आईडी दिखानी होगी जो उन्होंने पास लेते समय दी होगी। 

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किसान-सरकार की 10वें दौर की वार्ता आज
बता दें कि किसानों ने ट्रैक्टर रैली करने की चेतावनी दी है। आंदोलनरत किसानों के साथ सरकार की 10वें दौर की वार्ता बुधवार यानि आज दोपहर 2 बजे विज्ञान भवन में होगी। वैसे यह बैठक 19 को होनी थी, किन्हीं कारणों से इसे एक दिन के लिए मुल्तवी कर दिया गया था। इससे पहले किसानों और सरकार के बीच 9वें दौर की वार्ता 15 जनवरी को हुई, जो बेनतीजा रही थी। किसान तीनों कानूनों को रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी सुरक्षा देने की अपनी मांग पर अड़े हुए हैं और सरकार कह रही है कि अब केवल संशोधन के विकल्पों पर ही बातचीत आगे बढ़ सकेगी। सरकार किसी भी हाल में तीनों कानूनों को वापस लेने या रद्द करने को तैयार नहीं।   

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