Monday, Jan 21, 2019

आने वाले वर्षों में बढ़ सकती है आपकी उम्र, 135 साल का होगा जीवन, जानें कैसे

  • Updated on 12/27/2018

नई दिल्ली/सागर भारद्वाज। बुढ़ापा जीवन की एक ऐसी अवस्था है जिसे कोई भी जीना नहीं चाहता, क्योंकि इस अवस्था में शरीर में कई सारे रोग लग जाते हैं, व्यक्ति दूसरों पर निर्भर हो जाता है। इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि वह बुढ़ापे से दूर रहे। अगर सब कुछ अच्छा रहा तो वह दिन दूर नहीं जब बुढ़ापे को मात दी जा सकगी। आपको बता दें कि देश-दुनिया में बुढ़ापे को दूर करने के लिए वैज्ञानिकों द्वारा तमाम तरह की रिसर्च की जा रही हैं। भारत में भी इसको लेकर अहम खोज चल रही है जिसपर दुनिया की निगाहें हैं।

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अब तक की रिसर्च से सामने आया है कि बुढ़ापे को रोकने के लिए कुछ खास तरह के कीड़ों और थ्री डी प्रिटेड अंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं मौत पर तमाम देशों के वैज्ञानिकों ने एक ही राय सामने रखी है। उनका कहना है कि बुढ़ापे को टालने के बारे में एक बार को सोचा जा सकता है लेकिन मौत को नहीं टाला जा सकता। अमर होने की कल्पना भी हम नहीं कर सकते।

वैसे इस बात में कोई शक नहीं की इंसान की आयु पहले के मुकाबले  लगभग दोगुनी हो चुकी है। क्योंकि आज तमाम तरह की बीमारियों पर काबू पाने के लिए आधुनिक तकनीक उपलब्ध है। वैज्ञानिकों ने कहा है कि जल्द ही दुनिया में इंसान की औसल आयु 80 वर्ष हो जाएगी और भविष्य में बुढ़ापे को लंबे वक्त तक टालना भी संभव हो पायेगा।

लंबी उम्र की गारंटी हैं स्वस्थ दांत
अगर आपके दांत स्वस्थ है तो आप लंबी उम्र जी सकते हैं। क्योंकि मजबूत दांत के जरिए आप खाना चबा-चबाकर खा सकते हैं, जिससे आपकी पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इसलिए आपको अपने दांतों का खास खयाल रखाना चाहिये।

बुढ़ापे पर काबू पाने के लिए भारत में चल रही है अहम खोज-
जैसा कि हमने ऊपर जिक्र किया कि शरीर के खराब हो चुके अंगों के प्रत्यर्पण से बुढ़ापे को दूर रखने में मदद मिलेगी। इसी दिशा में भारत में महत्वपूर्ण खोज जारी है। भारत के बायोफिजिस्ट तुहिन भौमिक आर्टिफिशयल एंड पोर्टेबल अंग बनाने की दिशा में एक अहम खोज पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि एमआरआई और सीटी स्कैन के जरिए मरीज के अंगों के साइज का पता लगाया जा सकता है। जिसके बाद थ्री डी प्रिंटिंग के जरिए उसके अंग बनाए जा सकते हैं। तुहिन इस दिशा में गहनता से काम कर रहे हैं।

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तुहिन और उनकी टीम देश का पहला मानव लिवर टिशू भी बना चुकी है और अब वह मिनिएचर लिवर बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अगर ऐसा संभव होता है तो मरीज एक स्वस्थ इंसान की तरह कहीं भी जा सकता है। वह ऑर्टिफीशियल लिवर बनाने पर भी काम कर रहे हैं और इस लिवर को मानव शरीर में फिट किया जाएगा। अगर यह मुमकिन होता है तो इंसान की उम्र 135 साल तक हो सकती है।

दुनिया के कुछ देशों में शरीर में बूढ़ी हो रही कोशिकाओं को जवान बनाने की दिशा में काम चल रहा है। अगर ऐसा संभव होता है तो कई प्रकार की बीमारियों से निपटा जा सकता है। इसके अलावा शरीर के माइक्रोबायोम (छोटे किटाणु, बैक्टीरिया, फफूंद या वायरस) के संतुलन पर भी दुनिया के कई देशों में काम चल रहा है। माइक्रोबायोम का हमारे शरीर में संतुलित मात्रा में होना बहुत जरूरी है।  अगर इनके संतुलन को बनाए रखने में वैज्ञानिकों को कामयाबी मिलती है तो मानव की उम्र 100 से 200 साल तक हो सकती है।

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