Tuesday, Oct 04, 2022
-->
reserve bank may come at 5 percentage in first half of new fiscal year prshnt

नए वित्त वर्ष की पहली छमाही में 5% पर आ सकती है खुदरा महंगाई: RBI

  • Updated on 2/6/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अनुकूल परिस्थितियों तथा कुछ खाद्य पदार्थों विशेषकर सब्जियों की कीमतों का दबाव कम होने से खुदरा महंगाई के इस साल नवम्बर-दिसम्बर तक नरम होकर 4.3 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान है। रिजर्व बैंक (Reserve Bank) ने मौद्रिक नीति बयान मे इसकी जानकारी दी। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि खुदरा मुद्रास्फीति (महंगाई)के चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही (जनवरी से मार्च 2021) में 5.2 प्रतिशत पर आ जाने का अनुमान है। इसी तरह नए वित्त वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से अगस्त 2021) में खुदरा मुद्रास्फीति का अनुमान पहले के 5.2 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। 

 

सी.पी.आई. आधारित खुदरा महंगाई
केन्द्रीय बैंक का कहना है कि खुदरा महंगई वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही (अक्तूबर से दिसम्बर 2021) में और नरम होकर 4.3 प्रतिशत पर आ सकती है। कोरोना वायरस महामारी की चपेट में आने के बाद खुदरा मुद्रास्फीति पहली बार दिसम्बर तिमाही में 6 प्रतिशत के दायरे में आ गई। रिजर्व बैंक ने आने वाले समय में खुदरा महंगाई के और आसान होने का भी अनुमान व्यक्त किया। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सी.पी.आई.) आधारित खुदरा महंगाई जून 2020 के बाद से 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा के पार थी।

गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग अब क्षीण स्थिति से उबर चुकी है। उन्होंने कहा कि अब मांग आने लगी है और इसमें सुधार की गति के बने रहने की उम्मीद है। 

 

एन.पी.ए. की सही स्थिति का आकलन
आर.बी.आई. ने कहा कि भुगतान और निपटान प्रणाली को अधिक बेहतर, तेज और सटीक बनाने के लिए सभी शेष 18,000 शाखाएं, जो केन्द्रीकृत समाशोधन प्रणाली चैक ट्रंकेशन सिस्टम (सी.टी.एस.) के तहत नहीं हैं, उन्हें सितम्बर तक सी.टी.एस. के दायरे में लाया जाएगा। 

रिजर्व बैंक ने बैंकिंग प्रणाली में एक देश, एक बैंक-लोकप्रहरी की संकल्पना लागू करने की घोषणा की। उसने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों की शिकायत निवारण प्रणाली का एकीकरण किए जाने की जरूरत है। दास ने कहा कि आर.बी.आई. ने अपनी निगरानी को बढ़ा दिया है और वह सभी बैंकों में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एन.पी.ए.) की सही स्थिति का आकलन कर रहा है। 

 

सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने से मुद्रास्फीति हुई नरम 
केन्द्रीय बैंक ने कहा कि अनुकूल आधार तथा सब्जियों की कीमतों में गिरावट आने से मुद्रास्फीति नरम हुई है। नवम्बर और दिसम्बर के दौरान सब्जियों की कीमतों में आई गिरावट ने मुद्रास्फीति की कमी में करीब 90 प्रतिशत का योगदान दिया है। रिजर्व बैंक ने कुछ चुङ्क्षनदा खाद्य सामग्रियों के मामले में कीमतों का दबाव बरकरार रहने के साथ निकट भविष्य में सब्जियों के नरम बने रहने का अनुमान व्यक्त किया है। रिजर्व बैंक ने कहा कि हालिया महीनों के दौरान कच्चे तेल के अंतर्राष्ट्रीय भाव में तेजी दर्ज की गई है।

 

यहां पढ़े अन्य बड़ी खबरें...

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.