Wednesday, Jul 24, 2019

RBI यूनियन की मांग- 'कॉलेजियम' से हो गवर्नर, डिप्टी गवर्नरों का सिलेक्शन

  • Updated on 6/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य के इस्तीफे के एक बाद केंद्रीय बैंक की कर्मचारी यूनियन ने मंगलवार को कहा कि नए गवर्नर और डिप्टी गवर्नरों का चयन को विशेषज्ञों का कॉलेजियम बनाया जाना चाहिए। आल इंडिया रिजर्व बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन ने बयान में कहा कि कॉलेजियम के जरिये गवर्नर और डिप्टी गवर्नरों का चयन किए जाने से केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कायम रखा जा सकेगा। 

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रिजर्व बैंक ने सोमवार को संक्षिप्त बयान में कहा था कि आचार्य ने अपरिहार्य निजी कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह 23 जुलाई तक मिंट रोड कार्यालय में अपने पद पर रहेंगे। आचार्य रिजर्व बैंक के सबसे कम उम्र के डिप्टी गवर्नर हैं। भारतीय रिजर्व बैंक कानून की धारा 8 के तहत गवर्नर और डिप्टी गवर्नरों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है। 

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कर्मचारी यूनियन ने कहा, ''इस तरह के संवेदनशल और महत्वपूर्णपदों पर नियुक्ति का फैसला मंत्रालय के कुछ अधिकारियों द्वारा नहीं किया जाना चाहिए। न ही वित्त मंत्री को यह काम करना चाहिए। इस तरह की नियुक्ति विशेषज्ञों के कॉलेजियम द्वारा की जानी। इस कॉलेजियम में केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर, अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकर और अर्थशास्त्री शामिल रहने चाहिए।' यूनियन ने कहा कि सिर्फ इस तरह का निकाय ही ऐसे पद के लिए किसी व्यक्ति की क्षमता, ज्ञान और अनुभव का उचित तरीके से आकलन कर सकता है।

मोदी सरकार को RBI से मिल सकता है 3 लाख करोड़ 
बिमल जालान समिति की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक के पास पड़ी आवश्यकता से अधिक आरक्षित पूंजी से केंद्र सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये की राशि मिल सकती है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। समिति की रिपोर्ट का इंतजार है। जापान की ब्रोकरेज कंपनी नोमुरा ने मंगलवार को एक रिपोर्ट में कहा कि यह राशि सरकार को हिस्सों में कुल मिला कर तीन साल में मिलेगी और ज्यादा संभावना है कि इसका उपयोग सरकार के नियमित व्यय में किया जा सकेगा। 

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रिजर्व बैंक के लिये उपयुक्त आॢथक पूंजी रूपरेखा पर गठित बिमल जालान समिति का गठन पिछले साल दिसंबर में किया गया। समिति अगले महीने रिपोर्ट देगी। अबतक समिति को रिपोर्ट देने की समयसीमा तीन बार बढ़ायी जा चुकी है। ब्रोकरेज कंपनी ने कहा, ''बाजार की उम्मीदों के अनुसार रिजर्व बैंक के पास पड़ी आरक्षित पूंजी में से 3 लाख करोड़ रुपये तीन साल की अवधि में किस्तों में दिये जाएंगे। हालांकि हमारा मानना है कि अंतत: कोष का हस्तांतरण कम होगा।'

रिपोर्ट के अनुसार 45 प्रतिशत संभावना है कि धन का उपयोग सरकार के नियमित व्यय को पूरा करने के लिये और केवल 20 प्रतिशत गुंजाइश है कि इसका उपयोग बैंकों में पूंजी डालने में किया जाएगा। वहीं 25 प्रतिशत संभावना रिजर्व बैंक के कर्ज को खत्म करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि सकल संपत्ति का 28 प्रतिशत 'बफर' के रूप में केंद्रीय बैंक द्वारा रखना वैश्विक नियम 14 प्रतिशत से कहीं अधिक है।

 

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