Sunday, May 22, 2022
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rising inflation: prices of items ranging from ''''''''home'''''''' to ''''''''office'''''''' increased by 100 percent

बढ़ती महंगाईः ‘घर’ से लेकर ‘ऑफिस’ तक की वस्तुओं के दाम 100 प्रतिशत तक बढ़े

  • Updated on 5/11/2022

नई दिल्ली/पुनीत। पिछले दिनों रसोई गैस के दामों में 50 रुपए की बढ़ोतरी ने लोगों का ध्यान हर तरफ से हटा कर एक बार फिर से महंगाई पर केंद्रित कर दिया। रसोई के दामों में पिछले 2 वर्षों के दौरान 90 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो चुकी है। दालें हों या दवा, सुबह  का नाश्ता हो या रात का डिनर, घर हो या ऑफिस हर वस्तु के दामों ने आम आदमी जेब पर डाका डाला है। जिस कदर दामों में बढ़ौतरी हुई है उससे सेविंग करना तो दूर की बात खर्च चला पाना भी आसान नहीं है। 

जरूरत की कई वस्तुओं के दामों में 100 प्रतिशत तक की वृद्धि देखने को मिली है। ऐसा कोई सैक्टर नहीं बचा जो महंगाई की आग से झुलस न रहा हो। जीवन रक्षक दवाओं के दामों में बढ़ौतरी से लोगों की आह निकल चुकी है, 40 रुपए किलो में बिकने वाली सोयाबिन  (न्यूटरी) के दामों में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ौतरी हुई है और यह दाम 90 से 95 रुपए तक पहुंच चुके हैं।

पैट्रोल-डीजल के दामों में 70 प्रतिशत वृद्धि ने ट्रांसपोर्टरों की कमर तोड़ दी है। इसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ रहा है। साल 2020 से तुलना करें तो जिस रफ्तार से महंगाई भाग रही उस हिसाब से आमदनी में बढ़ौतरी होती नजर नहीं आ रही। 

आय और व्यय के बीच बढ़ती खाई के कारण लोग परेशान हैं। दाल-रोटी जुटाना मुश्किल हो चुका है। लोगों ने अपने जरूरत के खर्च पर कैंची चला दी है। आलम यह है कि लोग जैसे-कैसे कर दिन निकाल रहे हैं। ऐसी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही जोकि महंगाई दर कम होने का वक्त बता सके और लोगों को राहत दी जा सके। हर तरफ लोग महंगाई पर अंकुश लगाने की मांग करते देखे जा सकते हैं।

विपक्षी दल सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे लेकिन इसके बावजूद महंगाई थमने का नाम नहीं ले रही। मार्कीट में 2 वर्ष पुराने रेट सुनकर ऐसा लगता है कि हम कोई सपना देख रहे हैं। यह तो भगवान ही जाने महंगाई कम होने का सपना कब पूरा होगा और लेकिन अभी तो महंगाई ने हर तरफ हाहाकार मचा रखी है।

घरेलू गैस में 418 रुपए की बढ़ौतरी: ‘बजट बिगड़ा’
आम आदमी घर में अन्य किसी वस्तु का इस्तेमाल बंद कर सकता है लेकिन रसोई गैस का इस्तेमाल चाह कर भी बंद नहीं किया जा सकता। रसोई गैस मूलभूत जरूरतों में एक है और पिछले 2 वर्ष के दौरान इसके दाम 418 रुपए तक बढ़ चुके हैं जिससे घरों का बजट बिगड़ चुका है। 

2020 के मध्य में रसोई गैस के दाम 580 रुपए के करीब थे, जोकि 2020 के अंत में 594 तक जा पहुंचे। फरवरी 2021 में 719, मई में 809, अक्तूबर में 899, मार्च में 949 और अब दाम 1000 का आंकड़ा छू चुके हैं। 15000 रुपए वेतन लेने वाले व्यक्ति के घर यदि 2 सिलैंडरों की खपत होती है तो उसकी इंकम का बड़ा हिस्सा मात्र रसोई गैस में खर्च हो जाएगा, जोकि किसी प्रहार से कम नहीं है।

‘34 रुपए तक बढ़े पैट्रोल-डीजल के दाम’
डीजल के दाम बढऩे से हर वस्तु महंगी होती है, क्योंकि जब भी माल-भत्ते के दाम बढ़ते हैं तो हर वस्तु दूसरी जगह पर पहुंचते- पहुंचते महंगी हो जाती है। पिछले 2 वर्षों के दौरान पैट्रोल-डीजल के दामों में 34 रुपए से अधिक की बढ़ौतरी हुई है। इनके दामों में अभी भी स्थिरता नहीं है क्योंकि दाम बढ़ाने की कोई निश्चित तिथि या मापदंड नहीं है।

मई 2020 में डीजल के दाम 62.29 रुपए के करीब थे जोकि मार्च 21 में 91.17 रुपए तक पहुंच गए। अप्रैल की शुरूआत में इसके दाम 93 रुपए के करीब रहे जबकि अब राजधानी दिल्ली में इसके दाम इस समय 96.67 तक पहुंच चुके हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डीजल के दाम कम होने से जनता को बड़ी राहत मिल सकती है, इसलिए सरकार को इसके प्रति उचित कदम उठाना चाहिए।

‘दालों के दामों ने संतुलित आहार से किया दूर’
दालों को संतुलित आहार कहा जाता है लेकिन दालों के दामों न जिस कदर बजट बिगाड़ा है, उससे हर व्यक्ति परेशानी झेलने को मजबूर है। खाने के तेल के दामों ने जायका खराब कर रखा है। मसाले महंगे हो चुके हैं और खरीदारी के लिए जाने वाले व्यक्ति के चेहरे से मुस्कान दूर हो चुकी है।

चने की दाल 50 से 75, डालर चने 90 से 120, राजमाह 100 से 140, माह की दाल 70 से 100, मसर दाल 75 से 100, मूंगी धूली 75 से 95 रुपए तक पहुंच चुकी है। जब दालें महंगी होती हैं तो व्यक्ति सब्जियां खरीदने लगता है, लेकिन इस समय सब्जियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं, जिससे लोगों के पास विकल्प ही नहीं बच पा रहे।

‘बच्चों की फीसें भर पाना हो रहा मुश्किल’
रोजमर्रा की जरूरतों के सामान को महंगाई की आग ने जिस कदर झुलसाया है, यह चिंता का विषय है। महंगाई इतनी है कि पैसे भाप की तरह उड़ रहे हैं। हफ्तेभर में ही महीने का बजट खत्म हो जा रहा है, जिससे लोग परेशान हैं। 1000 को पार कर चुकी रसोई गैस की कीमतों से आम आदमी की रसोई का बजट बिगड़ गया है।

अब हर छोटी-बड़ी चीज खरीदने से पहले दूर की सोचनी पड़ती है, ताकि जरूरत की चीजें खरीदने से पहले बजट खत्म न हो जाए। हाल यह है कि बेहद मुश्किलें झेलकर महीने के 10-15 हजार रुपए कमाने वाले व्यक्ति के लिए बच्चे की फीस भर पाना मुश्किल हो रहा है।

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