Tuesday, Jun 22, 2021
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rss and vhp leaders held meeting in nagpur trust for ram temple built ayodhya

राम मंदिर ट्रस्ट पर बढ़ते विवाद के बीच RSS, VHP नेताओं ने नागपुर में किया मंथन

  • Updated on 11/18/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। आरएसएस और उससे संबद्ध संगठन विहिप के शीर्ष नेताओं की सोमवार को यहां एक बैठक हुई, जहां माना जा रहा है कि उन लोगों के नामों को अंतिम रूप दिया गया, जिन्हें अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर के लिए केंद्र द्वारा बनाए जाने वाले ट्रस्ट में शामिल किया जा सकता है। 

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आरएसएस सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और उनके सहयोगी भैयाजी जोशी इस बैठक में शामिल थे। आरएसएस मुख्यालय में सोमवार को हुई इस बैठक में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय पदाधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बैठक में अयोध्या मंदिर ट्रस्ट के गठन पर चर्चा हुई। उच्चतम न्यायालय ने राम मंदिर - बाबरी मस्जिद विवाद के बारे में 9 नवंबर के अपने फैसले में मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाने का फैसला दिया था।

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सूत्रों ने बताया कि बैठक में ट्रस्ट के सदस्यों के नामों को अंतिम रूप दिया गया और ये नाम सरकार को बताए जाएंगे, हालांकि उन्होंने इन नामों का खुलासा नहीं किया। उन्होंने कहा कि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु कोकजे, अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार और महासचिव परांडे बैठक में मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि आरएसएस और विहिप के पदाधिकारियों ने अयोध्या मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुर्निवचार याचिका दायर करने के जवाब में अपनी कार्य योजना पर भी चर्चा की।

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ब्रज के संतों की ट्रस्ट में शामिल होने की मांग
उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट में शामिल होने की विभिन्न पक्षों की मांग के बीच ब्रज के संतों ने भी ट्रस्ट में खुद को स्थान दिए जाने की मांग की है। रविवार को वृन्दावन स्थित दयाधाम आश्रम में एक धर्म सभा में धर्माचार्यों ने एक सुर से राम मंदिर ट्रस्ट में दो संतों को स्थान दिए जाने की मांग की। 

धर्म सभा में राम मंदिर के लिए धार्मिक आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले ब्रज के संत स्वामी वामदेव के योगदान का जिक्र करते हुए राम मंदिर परिसर में उनकी प्रतिमा लगाए जाने का भी प्रस्ताव पारित किया गया। इस धर्मसभा में कुल आठ प्रस्ताव पास किए गए। संबंधित एक प्रस्ताव में वृन्दावन के दो संतों को राम मंदिर ट्रस्ट में स्थान दिए जाने की मांग रखी गई। 

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इसके अलावा रामलला को मंदिर निर्माण होने तक टेंट से हटाकर किसी उचित स्थान पर विराजमान करने, अयोध्या की 14 कोसीय सांस्कृतिक सीमा के अंतर्गत मस्जिद निर्माण न कराए जाने, प्रस्तावित मंदिर का स्वरूप आंदोलन में प्रदर्शित मॉडल के अनुसार ही रखने की मांग की गई। धर्मसभा में पहुंचीं केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहा, ‘‘राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर जो देशहित में होगा, सरकार वही करेगी।’’ 

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उन्होंने संतों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी आस्था का सम्मान करेगी। संवाददाताओं के एक सवाल के जवाब में साध्वी ने कहा, ‘‘यूं तो देश के हिंदू और मुसलमान सहित सभी वर्ग के लोगों ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को सहर्ष स्वीकार किया है। लेकिन, जिन लोगों का देश के संविधान, न्यायालय पर विश्वास नहीं है, वही लोग न्यायालय के फैसले को लेकर अनर्गल बयान दे रहे हैं।’ 
 

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