Monday, Mar 01, 2021
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने महात्मा गांधी का जिक्र कर कहा- हिंदू कभी राष्ट्रविरोधी नहीं हो सकता

  • Updated on 1/2/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने जेके बजाज और एम डी श्रीनिवास लिखित पुस्तक ‘मेकिंग आफ ए हिन्दू पेट्रियट: बैकग्राउंड आफ गांधीजी हिन्द स्वराज’ का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी को लेकर और देशभक्त होने को लेकर बड़े बयान दिए। 

भगवत ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति हिन्दू है तो वह अपने आप ही देशभक्त होगा, क्योंकि यह उसका बुनियादी चरित्र और उसकी असल प्रकृति है। भागवत ने यह बात महात्मा गांधी की उस टिप्पणी के जिक्र पर कही जिसमें गांधी ने कहा था कि उनकी देशभक्ति की उत्पत्ति उनके धर्म से हुई है।

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उन्होंने किताब का विमोचन करते हुए कहा कि मेरे द्वारा इस किताब के विमोचन करने को लेकर यह अटकलें लगाई जा सकती हैं कि यह मेरे द्वारा गांधी जी को अपने हिसाब से परिभाषित करने की कोशिश है। उन्होंने कहा, ‘‘महापुरुषों को कोई अपने हिसाब से परिभाषित नहीं कर सकता।’’

उन्होंने किताब को लेकर कहा कि यह किताब व्यापक शोध पर आधारित है और जिनका इससे विभिन्न मत है वह भी शोध कर लिख सकते हैं।

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मेरी देशभक्ति मेरे धर्म से निकलती है...
मोहन भागवत ने कहा, ‘‘गांधीजी ने कहा था कि मेरी देशभक्ति मेरे धर्म से निकलती है। मैं अपने धर्म को समझकर अच्छा देशभक्त बनूंगा और लोगों को भी ऐसा करने को कहूंगा। गांधीजी ने कहा था कि स्वराज को समझने के लिए स्वधर्म को समझना होगा।’’

उन्होंने स्वधर्म और देशभक्ति का जिक्र किया और कहा कि हिन्दू है तो उसे देशभक्त होना ही होगा क्योंकि उसके मूल में यह है। वह सोया हो सकता है जिसे जगाना होगा, लेकिन कोई हिन्दू भारत विरोधी नहीं हो सकता।

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मेरे अस्तित्व को खतरा है....
उन्होंने आगे कहा, जब तक मन में यह डर रहेगा कि आपके होने से मेरे अस्तित्व को खतरा है और आपको मेरे होने से अपने अस्तित्व पर खतरा लगेगा तब तक सौदे तो हो सकते हैं, लेकिन आत्मीयता नहीं। उन्होंने कहा कि अलग होने का मतलब यह नहीं है कि हम एक समाज, एक धरती के पुत्र बनकर नहीं रह सकते। एकता में अनेकता, अनेकता में एकता यहीं भारत की मूल सोच है।

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क्या है किताब में...
बता दें, यह किताब सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज की तरफ से लॉन्च की गई। इसके लेखक जेके बजाज और एमडी श्रीनिवास ने इस किताब में गांधीजी की पोरबंदर से लेकर इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत लौटने तक की यात्रा के बारे में लिखा है। इस किताब में यह दावा किया गया है कि 1893-94 के बीच दक्षिण अफ्रीका में गांधीजी के मुस्लिम नियोक्ता और उनके कई इसाई साथियों ने धर्म परिवर्तन के लिए कहा था।

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