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rss leader indresh kumar calls for baloch leaders to unite for balochistan rkdsnt

RSS नेता इंद्रेश कुमार ने बलूच नेताओं को एकजुट होने का किया आह्वान

  • Updated on 9/10/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्‍ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच (फैन्स) के राष्ट्रीय संरक्षक व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल सदस्य इंद्रेश कुमार ने बलूच नागरिकों पर जुल्म के लिए पाकिस्तान को दोषी ठहराते हुए सभी बलोच नेताओं व संगठनों से एकजुट होकर बलूचिस्तान मुक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। 

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फैन्स की ओर से बुधवार को बलूचिस्तान मुक्ति आंदोलन :  संभावनाएं और चुनौतियां (बलूचिस्तान लिबरेशन मूवमेंट) विषय को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया। इस वेबिनार को संबोधित करते हुए इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) ने कहा कि  बलूचिस्तान के लोग काफी अर्से से संयुक्त राष्ट्र समेत दुनिया भर में अपने आवाम पर पाकिस्तान के जुल्मो सितम की कहानी बयां कर आंदोलन चला रहे हैं, भारत की ओर से भी दुनिया का ध्यान समय समय पर इस ओर खींचा जाता रहा है। 

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पाकिस्तान का गठन देश के बंटवारे के बाद हुआ, जिसका बाद में 1971 में बंटवारा हो गया। आज पाकिस्तान पांच-छह टुकड़ों में बंटने व टूटने की कगार पर है। बलूचिस्तान, पश्तूनिस्तान, सिंध इससे अलग होना चाहते हैं। आने वाले समय में पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति में जरूर बदलाव होगा। इंद्रेश कुमार ने कहा कि विभाजन के समय ही बलूचिस्तान ने अंग्रेजों से कह दिया था कि हम पाकिस्तान में सम्मिलित नहीं होंगे। लेकिन मोहम्मद अली जिन्ना और अंग्रेजों ने कूटनीति से सैनिक आक्रमण करके इस पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया और साल 1948 से बलूचिस्तान स्वतंत्र बलूचिस्तान का आंदोलन कर रहा है। 

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पाकिस्तान बलूचिस्तान के लोगों पर अत्याचार कर रहा है। इस करतूत में चीन भी उसका साथ दे रहा है। पाकिस्तान अभी तक बलूचिस्तान में लाखों लोगों की हत्या कर चुका है। हजारों लोगों को अगवा किया और उन पर बेइंतहा जुल्म कर रहा है। पाकिस्तान की सेना ने टेंकरों और तोंपो से लाखों बलूच नागरिकों के कत्ल किए और लाखों बलूच लोगों को उजाड़ भी दिए। बहुत से बलूच भारत तथा दुनिया के अन्य देशों में रहते हैं जो लड़ रहे हैं और स्वतंत्र बलूचिस्तान चाहते हैं। बलूच और पश्तून नेता पाकिस्तान में सम्मिलित नहीं होना चाहते थे। उन्होंने हिंदुस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र ईकाई के तौर पर बने रहने के लिए आवाज उठाई थी। 

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विभाजन के समय बलूच लोगों ने स्पष्ट रूप से अपना मत बता दिया था, लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। उसी समय से बलूचिस्तान के लोगों ने अपनी अस्मिता के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि बलूचिस्तान लिबरेशन मूवमेंट के सभी नेता एकजुट होकर अपनी मुहिम को आगे बढ़ाएं और उनकी इस मुहिम में सभी भारतवासी उनके साथ हैं। एक दिन सभी बलूच लोग अपने इस आंदोलन को सफल होते अवश्य देखेंगे। 

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इंद्रेश कुमार ने कहा कि सभी बलूच नेता व मुक्ति आंदोलन से जुड़े संगठन आपस में हाथ मिलाएं, जैसे तिब्बत के नेताओं ने चीन की बर्बरता व प्रताड़ना से तंग आकर आपस में एकजुट हुए और सफलतापूर्वक निर्वासित सरकार का गठन किया। उन्होंने इस आंदोलन को सफल बनाने के लिए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए। पहला- सभी बलूच नेता आपस में निर्णय करके एक सर्वमान्य नेता का चयन और किस देश में शरण लेना है यह तय करें। दूसरा- बलूच नेतृत्व को अपनी मान्यता के लिए दुनिया के देशों से वार्ता करनी चाहिए। 

तीसरा- एक झंडा, एक नारा, एक विधान और एक काॅमन प्रोग्राम तय करें। उन्होंने बलूच नेताओं से कहा कि किसी कदम को उठाने से पहले विचार करें और फिर मंजिल तय करें। ठोस तरीके से निर्णय लेकर ही मुक्ति आंदोलन को कम समय में सफल बनाया जा सकेगा। पहले अपने रोडमैप का काॅमन एजेंडा तय करें ताकि सभी बलूच नेता एकजुट रह सकें और दुनिया भर में मुहिम को आगे बढ़ा सकें। जिस तरह बलूच लोग अपने मुक्ति के लिए संघर्ष, बलिदान करते आए हैं, उसे एकजुट रहकर ही सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सकता है।

 

 

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