Thursday, Jun 24, 2021
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मोदी सरकार के खिलाफ 7 दिनों का विरोध प्रदर्शन करेगा RSS से जुड़ा मजदूर संघ

  • Updated on 7/8/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने बुधवार को कहा कि वह 24 से 30 जुलाई तक‘सरकार जगाओ सप्ताह’ का आयोजन करेगा। इसके तहत श्रमिकों के मुद्दों को सामने लाने के लिये देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किये जायेंगे। 

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बीएमएस ने एक बयान में बताया कि यह निर्णय मंगलवार को उसके राष्ट्रीय पदाधिकारियों की एक आभासी बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता बीएमएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष सीके साजी नारायणन ने की और महासचिव विरजेश उपाध्याय ने बैठक का संचालन किया। 

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बयान में कहा गया, ‘‘भारतीय मजदूर संघ ने राष्ट्रीय, राज्य, उद्योग और स्थानीय स्तर पर कार्यबल की समस्याओं पर 24-30 जुलाई के दौरान राष्ट्रव्यापी‘सरकार जगाओ सप्ताह’का आयोजन करने का निर्णय लिया है।’’ बयान में कहा गया, Þराज्यों की राजधानियों, जिला मुख्यालयों, तहसील / ब्लॉक केंद्रों और सभी बड़े औद्योगिक परिसरों में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये जायेंगे।’’ 

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बैठक में राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने आकलन किया कि कोयला श्रमिकों द्वारा तीन दिनों की हड़ताल ने क्षेत्र में 95 प्रतिशत गतिविधियों को प्रभावित किया। उन्होंने हड़ताल को सफल बनाने और श्रमिकों के बीच नयी आशा पैदा करने के लिये कोयला संघों को बधाई दी।

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हड़ताली कोल कर्मचारियों का काटेगा वेतन 
सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया की इकाई महानदी कोलफील्ड्स लि. (एमसीएल) ने पिछले सप्ताह हड़ताल पर गये कर्मचारियों के आठ दिनों का वेतन काटने का आदेश दिया है। कर्मचारी सरकार के कोयला क्षेत्र को निजी कंपनियों के खोले जाने के निर्णय के खिलाफ तीन दिन की हड़ताल पर गये थे। कंपनी ने एक नोटिस में कर्मचारियों की दो से चार जुलाई की तीन दिन की हड़ताल को ‘अवैध’ करार दिया है। 

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महानदी कोलफील्ड्स लि. (एमसीएल) ने एक नोटिस में कहा, ‘‘...कर्मचारियों ने अवैध हड़ताल में हिस्सा लिया जो एमसीएल के प्रमाणित स्थायी आदेश के नियम 26.10 का उल्लंघन है। नियम के उल्लंघन कर अवैध हड़ताल में शामिल होने के कारण वेतन कानून संहिता की धारा 20 के तहत आठ दिन का पारिश्रमिक काटने का आदेश दिया जाता है।’’  पांच श्रमिक संगठनों से संबद्ध कोयला कर्मचारी दो से चार जुलाई के बीच हड़ताल पर गये थे। 

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एमसीएल नोटिस में यह भी कहा कि औद्योगिक विवाद कानून, 1947 के प्रावधानों के तहत मध्यस्थता के लिये उप श्रम आयुक्त, कोलकाता को विचार का अधिकार है। कंपनी के एक अधिकारी के अनुसार करीब 20,000 कर्मचारियों से में 15,000 से 16,000 हड़ताल पर थे और वे काम पर नहीं आये। कंपनी का आकलन दो जुलाई से पहले 10 दिनों के औसत पर अधारित है। तीन दिन की हड़ताल में दो जुलाई पहला दिन था।

 

 

 

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