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जलाभिषेक नहीं सिर्फ मंदिरों में होगा रुद्राभिषेक, सोशल डिस्टेंस के साथ होंगे भोलेबाबा के दर्शन

  • Updated on 7/4/2020

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। सावन (Sawan) का महीना, बारिश की फुहार और बोल बम का नारा लगाते कांवड़िया। साल में एक बार भोलेबाबा के भक्तों द्वारा उनपर अपार श्रद्धा दर्शाने का महीना सावन इस बार इन सब बातों से अछूता दिखाई देने वाला है। इस बार ना तो मंदिरों में कांवड़ियों की लंबी-लंबी जलाभिषेक के लिए कतारें दिखाईं देंगी और ना ही कांवड़ियों के लिए सेवादलों द्वारा लगाया जाने वाला लंगर, जागरण और पांडाल।

कोरोना वायरस (Coronavirus) ने सावन के इस पावन त्यौहार के असली रंग को भी बेरंग कर दिया है। वहीं सुरक्षात्मक रवैया अपनाते हुए मंदिरों ने साफ कह दिया है कि जलाभिषेक तो नहीं होगा पर भोलेबाबा को खूब सजाया जाएगा और रुद्राभिषेक से ही भक्तों को संतोष करना पड़ेगा। आइए जानते हैं कि किस मंदिर में क्या-क्या रहेंगी तैयारियां।

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गौरी शंकर मंदिर, चांदनी चौक
गौरी शंकर मंदिर के मीडिया प्रभारी तेज प्रकाश ने बताया कि प्राचीन शिव मंदिर होने के नाते भक्तों को दर्शन की आज्ञा सोशल डिस्टेंस के साथ दी गई है लेकिन सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार जलाभिषेक श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे। इस दौरान भोलेबाबा को खुश करने के लिए मंदिर के पुजारियों द्वारा जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा अर्चना व श्रृंगार किया जाएगा।

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झंडेवालान मंदिर, करोल बाग
झंडेवालान मंदिर के मीडिया प्रमुख नंदकिशोर सेठी ने कहा कि मंदिर में 4 बार जलाभिषेक प्रशासन द्वारा किया जाएगा, पर श्रद्धालु नहीं कर पाएंगे। पहले से आज्ञा लेने वाले श्रद्धालु रुद्राभिषेक व पूजन कर पाएंगे लेकिन इस दौरान पंडित के अलावा 4 लोग ही मौजूद रह सकेंगे। उससे अधिक को अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं सोशल डिस्टेंस के साथ श्रद्धालु सिर्फ दर्शन कर पाएंगे।

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छतरपुर मंदिर, छतरपुर
छतरपुर मंदिर के मीडिया प्रभारी डॉक्टर किशोर चावला ने बताया कि दिल्ली का सबसे बड़ा शिवलिंग छतरपुर मंदिर में स्थित है, इसलिए यहां जलाभिषेक के दौरान भीड़ अधिक रहा करती है पर इस साल श्रद्धालु जलाभिषेक नहीं कर पाएंगे सिर्फ दर्शन से ही उन्हें संतुष्टि करनी पड़ेगी। हालांकि प्रशासन की ओर से नई गाइडलाइंस आईं तो जरूर नियमों में परिवर्तन किया जा सकता है। फिलहाल मंदिर को सजाने का काम चल रहा है।

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प्राचीन हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस
प्राचीन हनुमान मंदिर के महंत सुरेश शर्मा ने कहा कि सावन के पहले सोमवार से ही भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए मंदिर को फूलों से व भोलेबाबा को भांग-धतूरा व बेलपत्र से सजाया जाएगा। इस दौरान भक्तगण मंदिर में दर्शन तो करेंगे पर जलाभिषेक नहीं। वहीं शंकर जी को खुश करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र जाप सहित शिव तांडव स्त्रोत का पाठ किया जाएगा।

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कोरोना के चलते चूकें भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक से 
पिछले 10 सालों से लगातार सावन में कांवड़ लेकर जाने वाले लालचंद शर्मा ने कहा कि शायद इंसान के कर्म ज्यादा खराब होते जा रहे हैं तभी इस बार भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को इस बार जलाभिषेक का अवसर नहीं दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि कुछ खो गया है। वहीं सुमित कुमार ने कहा कि हमारे मोहल्ले के लड़के मिलकर हर साल डाक कांवड़ लाते हैं, जिसकी तैयारियां 6 महीने पहले से शुरू हो जाती हैं इस बार सभी लड़के उदास हैं। शायद श्रद्धा में कमी है तभी भोलेनाथ के जलाभिषेक से चूक गए हैं।

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