Thursday, Aug 18, 2022
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Rupee at new all-time low, Modi government on target of opposition when it crosses 79

रुपया नए सर्वकालिक निचले स्तर पर, 79 के पार होने पर विपक्ष के निशाने पर मोदी सरकार

  • Updated on 6/29/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। रुपये में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट जारी रही। अंतरबैंक विदेशीमुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को रुपया 18 पैसे टूटकर 79.03 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। बाजार सूत्रों ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशों में डॉलर में आई मजबूती और विदेशी पूंजी की सतत निकासी से रुपये में गिरावट आई है।  इसके साथ ही विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार को निशाने पर बनाना शुरू कर दिया है। साथ ही पीएम मोदी के पुराने वीडियो को भी सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है, जिसमें वह रुपया गिरने पर यूपीए सरकार की आलोचना कर रहे हैं। 

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     अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 78.86 पर खुला और कारोबार के अंत में 18 पैसे की गिरावट के साथ 79.03 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ। सत्र के दौरान रुपये ने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले के 79.05 के सर्वकालिक निचले स्तर को छुआ। मंगलवार को रुपया 48 पैसे गिरकर 78.85 रुपये प्रति डॉलर के अपने सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ था।     

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रुपये में इस महीने में अभी तक 1.97 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है जबकि इस वर्ष के आरंभ से रुपये का मूल्य 6.39 प्रतिशत घट चुका है। इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.13 प्रतिशत की तेजी के साथ 104.64 पर आ गया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक, दिलीप परमार ने कहा कि जोखिम-प्रतिकूल भावनाओं और कमजोर क्षेत्रीय मुद्राओं के कारण रुपया नीचे आया।

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     वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.34 प्रतिशत बढ़कर 118.38 डॉलर प्रति बैरल हो गया। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड की जिंस एवं मुद्रा शोध विभाग की उपाध्यक्ष, सुगंधा सचदेवा ने कहा, ‘‘घरेलू बाजारों से भारी मात्रा में विदेशी धन की निकासी, डॉलर के दो दशक के उच्चस्तर तक मजबूत होने और कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती आने के बीच, भारतीय रुपया इस साल की शुरुआत से नीचे आ रहा है।  

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     मुद्रास्फीति बढऩे, चीन में लंबे समय तक कोविड-19 लॉकडाउन, प्रमुख केंद्रीय बैंकों के सख्त मौद्रिक रुख तथा रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान की वजह से वैश्विक आॢथक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और इसके कारण डॉलर के मुकाबले रुपये के मूल्य में करीब 6.30 प्रतिशत की तेज गिरावट आई है।     

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