Friday, Jul 30, 2021
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भारत और रूस के बीच एस-400 डिफेंस सिस्टम डील को लेकर तुर्की के कारण भारत पर बना दबाव, पढ़े रिपोर्ट

  • Updated on 12/16/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारत ने अपनी सैन्य ताकत (Defence) बढ़ाने के लिए रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम की मांग की थी जिसके लिए एडवांस पेमेंट कर दिया गया था। भारत को एक खेप 2018 में मिल चुकी है और दूसरी इस साल के अंत तक मिल जाएगी। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले 5 सालों में यानी 2025 तक रूस भारत को सभी डिफेंस सिस्टम सौंप देगा। जानकारी के अनुसार भारत और रूस के बीच 5.43 अरब डॉलर यानी तकरीबन 39 हजार करोड़ रुपए में यह समझौता किया था। 

वहीं, मिल रही जानकारी के अनुसार रूस से एस- 400 मिसाइल सिस्टम खरीदने के कारण तुर्की पर लगाए गए प्रतिबंध से भारत पर भी दबाव बढ़ने लगा है। इस बारे में पूर्व राजनयिकों का मानना है कि भारत को इस संबंध में अमेरिकी रियायत के लिए अपनी तरफ से प्रयास करने चाहिए।

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क्या है ये सिस्टम 
यह एस-400 डिफेंस सिस्टम मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो दुश्मन देशों की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा। दरअसल, एस-300 का अपडेटेड वर्जन ही एस-400 मिसाइल सिस्टम है। यह इतना तेज-तर्रार है कि 400 किलोमीटर के दायरे में आने वाली मिसाइलों और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी खत्म करने में सक्षम है। इसकी मिसाइल शील्ड पाकिस्तान और चीन की एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देने का काम करेगा। 

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है बेहद ताकतवर 
यह एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है और इसकी सबसे अच्छी खूबी यह है कि अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। इसके अलावा यह 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एकसाथ नष्ट कर सकता है। बताते चले कि चीन के बाद इस डिफेंस सिस्टम को खरीदने वाला भारत दूसरा देश बन जाएगा लेकिन चीन के साथ रूस ने अपनी डील को रोक दिया है।

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रोकी डील क्योंकि
रूस ने चीन को एस-400 मिसाइल देने से मना कर दिया है। इससे पहले ही मास्को ने चीन पर जासूसी करने के आरोप लगाए थे। खुद रूसी अधिकारियों ने अपने एक उच्च अधिकारी को चीन के लिए जासूसी करते हुए दोषी पाया था। इसलिए भी इस घटना को इस सम्बंध में जोड़ कर देखा जा रहा है। 

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चीन को दिया झटका
गौर करने वाली है कि रूस ने चीन को सप्लाई सम्बंधी रोक तक लगाई है जब चीन एक साथ कई देशों से संघर्षपूर्ण रिश्ते निभा रहा है। गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत, हांगकांग और साउथ चीन सागर को लेकर अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ चीन की अनबन बनी हुई है। ऐसे में रूस का मिसाइल देने पर रोक लगाना चीन के लिए टेंशन की बात हो सकती है। 

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