Sunday, Jan 23, 2022
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शिअद ने रैली प्रतिबंध पर पुनर्विचार का किया आग्रह, चुनाव आयोग करेगा बैठक 

  • Updated on 1/14/2022

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। निर्वाचन आयोग शनिवार को एक बैठक में यह फैसला लेगा कि कोविड-19 महामारी के मद्देनजर पांच चुनावी राज्यों में रैलियों, रोड शो और नुक्कड़ सभाओं पर प्रतिबंध को 15 जनवरी से आगे बढ़ाया जाए या नहीं। सूत्रों ने कहा कि वायरस के प्रसार और इसके नए स्वरूप ओमीक्रोन के बारे में सूचनाओं के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। आयोग ने आठ जनवरी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और मणिपुर में विधानसभा चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए महामारी के मद्देनजर 15 जनवरी तक सार्वजनिक रैलियों, रोड शो और नुक्कड़ सभाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कदम उठाया था। 

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निर्वाचन आयोग ने 16 सूत्री दिशानिर्देश भी जारी किए थे। उसने सार्वजनिक सड़कों और चौराहों पर नुक्कड़ सभा करने पर रोक लगाई है, हालांकि सीमित संख्या में लोगों के घर-घर जाकर प्रचार करने की अनुमति दी है। चुनाव नतीजों के बाद विजय जुलूस निकालने पर भी रोक होगी। निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में राजनीतिक दलों से आग्रह किया था कि वे डिजिटल माध्यम से प्रचार करें। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकारी प्रसारक दूरदर्शन के माध्यम से चुनाव प्रचार के लिए राजनीतिक दलों को मिलने वाले समय को दोगुना किया जाएगा। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव 10 फरवरी से शुरू होकर सात मार्च तक चलेंगे और मतगणना 10 मार्च को होगी।     

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शिरोमणि अकाली दल की चुनाव आयोग से अपील 
शिरोमणि अकाली दल ने 15 जनवरी तक प्रत्यक्ष रैलियों और रोडशो पर जो प्रतिबंध लगाया है, उस पर पुनर्विचार करे। शिअद ने साथ ही कहा कि पंजाब में छोटी प्रचार सभाओं को अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि ये उम्मीदवारों के लिए समाज के सभी वर्गों से संपर्क बनाने के लिए आवश्यक है। शिअद प्रवक्ता दलजीत सिंह चीमा ने चुनाव आयोग को लिखे पत्र में दावा किया कि प्रतिबंध से सभी दलों के उम्मीदवारों को काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा क्षेत्र के सभी मतदाताओं तक डिजिटल प्रचार के माध्यम से पहुंच बनाना संभव नहीं है क्योंकि राज्य में कई पिछड़े क्षेत्र हैं जहां इंटरनेट नेटवर्क ठीक से काम नहीं कर रहा है। 

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चीमा ने कहा कि बुजुर्ग जो आबादी का एक अच्छा हिस्सा हैं, वे शायद ही कभी डिजिटल उपकरणों का उपयोग करते हैं और गरीबों की डिजिटल तकनीक तक बहुत कम पहुंच है, इसलिये यदि केवल डिजिटल अभियान की अनुमति दी जाएगी, तो समाज के एक बड़े हिस्से तक पहुंच नहीं बनायी जा सकेगी।  

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   पार्टी के एक बयान के अनुसार, उन्होंने दावा किया, ‘‘यह सभी मतदाताओं को समान अवसरों से वंचित करेगा। इससे मतदान का प्रतिशत भी प्रभावित होगा।’’ उन्होंने कहा कि शिअद समझता है कि बड़ी रैलियों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है Þलेकिन छोटी बैठकें जरूरी हैं।’’ उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को कोविड सावधानियों के साथ छोटी सभाएं करने की अनुमति दी जा सकती है। 

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