Thursday, Feb 27, 2020
sad will not contest delhi elections with bjp

दिल्ली चुनाव: 21 साल बाद अकाली दल ने छोड़ा BJP का साथ, कहा- NRC से नहीं सहमत

  • Updated on 1/21/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सबसे पुराने सहयोगियों में से एक शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने दिल्ली विधानसभा चुनावों (Delhi Assembly Election) के एनडीए गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने से मना कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ पार्टी ने कहा है कि यह मतभेद सीएए और एनआरसी कानून की वजह से है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हम साथ रहेंगे। 

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बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ता रहा
बता दें कि अब तक दिल्ली के हर विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल मिलकर चुनाव लड़ता रहा। इसके तहत भाजपा दिल्ली में अकाली दल को चार सिख बहुल सीटें (अकाली कोटे) देता था। इसमें राजौरी गार्डन, हरी नगर, कालकाजी एवं शाहदरा विधानसभा सीट है। 

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कुछ मुद्दों को लेकर भाजपा से सहमति नहीं
बता दें कि सिरसा बोले, अकाली दल नहीं लड़ेगा चुनाव शिरोमणि अकाली दल के महासचिव एवं विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने देर शाम बदले घटनाक्रम के बीच ऐलान किया कि कुछ मुद्दों को लेकर भाजपा से सहमति नहीं बन पाई है, जिसके चलते उनकी पार्टी दिल्ली में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। उनहोंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के फैसले पर हम अडिग है। अकाली दल सीएए और एनआरसी के मसले पर सरकार के फैसले से नाराज है और पार्टी ने अपनी आपत्ति भी भाजपा को दर्ज करा दिया है।

सिरसा ने सीएए व एनआरसी को बनाया मुद्दा
अकाली दल के महासचिव व मौजूदा विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने अकाली दल के किसी भी सीट पर लडने से साफ इनकार कर दिया। इसके लिए सिरसा ने सीएए व एनआरसी का मुद्दा बना लिया। सिरसा ने कहा कि अकाली दल सिख गुरुओं के बताये सिद्वांत पर चलते हुए मुसलमानों को सीएए से बाहर करने के विरोध में चुनाव न लडने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अकाली दल का कोई भी नेता किसी भी सीट से किसी भी अन्य दल एवं निर्दलीय रूप से चुनाव नहीं लड़ेगा।

गठबंधन का फैसला पार्टी हाईकमान के हाथों में 
आगे गठबंधन किस शक्ल में लेगा इसका फैसला पार्टी हाईकमान लेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीएए के तहत तीनों मुल्कों से जैसे हिंदू-सिख सहित अन्य धर्मों के लोगों को भारत आने के लिए नागरिकता दे रहा है, ठीक उसी तरह मुस्लिम समाज के पीड़ित लोगों को भी भारत रास्ता खोले। अकाली दल अपने प्रिंसिपल पर अडिग है। 

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