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safarnama 2019 delhi known as gas chambers

सफरनामा 2019: स्वच्छ हवा की आस में गैस चैंबर बन हांफती रही दिल्ली

  • Updated on 12/31/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। अक्टूबर (October) के महीने में नीले आसमान ने दिल्ली (Delhi) को साल के अंत में सर्दियों के मौसम में स्वच्छ हवा की आस जगाई, लेकिन शहर में कई स्रोतों से होने वाले प्रदूषण और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने से राष्ट्रीय राजधानी 2019 में एक बार फिर से ‘गैस चैम्बर’ में तब्दील हो गई। इस वजह से अधिकारियों को स्कूल बंद करने पड़े और स्वास्थ्य के लिए आपात स्थिति घोषित करनी पड़ी।

- प्रदूषण एक परेशानी

1. बंद करना पड़ा स्कूल
धुंध के कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा, लोगों को मास्क लगाने के लिए मजबूर होना पड़ा, जबकि अन्य लोगों ने ज्यादातर समय घरों से बाहर नहीं निकलने का विकल्प चुना। स्कूली बच्चों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने प्रदूषण की बदतर स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से हस्तक्षेप की मांग की। दिल्ली (Delhi) में प्रदूषण का स्तर बढऩे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गये।

2. क्रिकेट मैच दिल्ली से बाहर करने का अनुरोध
पर्यावरणविदों ने बीसीसीआई को पत्र लिख कर तीन नवंबर को होने वाले भारत/बांग्लादेश टी 20 मैच दिल्ली से बाहर कराने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind kejriwal) ने दिल्ली को ‘गैस चैम्बर’ में तब्दील करने के लिए पड़ोसी राज्यों, खासतौर पर हरियाणा और पंजाब में पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराया। सरकार की वायु गुणवत्ता एवं पूर्वानुमान सेवा , ‘सफर’ ने कहा कि कृषि अवशेषों को जलाने से दिल्ली में प्रदूषण एक नवंबर को 44 फीसदी बढ़ गया। जबकि सीपीसीबी के डेटा से यह प्रर्दिशत हुआ कि पंजाब (Punjab) में कृषि अवशेषों को जलाए जाने में वृद्धि हुई है लेकिन हरियाणा में पराली जलाए जाने में कमी आई है।  

- कारण

1. दिवाली है प्रदूषण का कारण
सेंटर फॉर साइंस ऐंड इनवायरोन्मेंट (सीएसई) ने दावा किया कि दिवाली पर जलाए गए पटाखों की शहर की वायु गुणवत्ता को बदतर करने में बड़ी भूमिका थी। इसके बाद नवंबर में दिल्ली और एनसीआर के आसमान में धुंध की चादर छा गई और वायु गुणवत्ता ‘गंभीर प्लस’ श्रेणी में पहुंच गई। इस पर शीर्ष न्यायालय से अधिकार प्राप्त पर्यावरण प्रदूषण (निवारण एवं नियंत्रण) प्राधिकरण को कदम उठाना पड़ा और जन स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित की गई।

2. पराली जलाने वालों राज्यों को फटकार
उच्चतम न्यायालय (High Court) ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए कदम उठाया और पराली जलाने को लेकर राज्यों को फटकार लगाई। न्यायालय ने उनसे किसानों को वित्तीय मदद देने को कहा ताकि वे फसल अवशेषों का प्रबंधन कर सकें। न्यायालय ने 10 दिसंबर तक सभी निर्माण कार्य एवं तोड़ फोड़ गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार वाहनों की सम विषम (नंबर) व्यवस्था का तीसरा संस्करण लेकर आई लेकिन विशेषज्ञों और शीर्ष न्यायालय ने इसके प्रभाव पर सवाल किए।  

- सरकारों ने जताई चिंता

1. PMO को बुलानी पड़ी बैठक
दिवाली (Diwali) के कुछ ही दिनों बाद वायु प्रदूषण (Air Pollution) 2019 में दूसरी बार आपात स्थिति वाले स्तर तक पहुंच गया, जिस पर उच्चतम न्यायालय को इस संकट का फौरी हल निकालने के लिए आपात सुनवाई करनी पड़ी और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को उच्च स्तरीय बैठक बुलानी पड़ी।  

2. दिल्ली सरकार का दावा 25 फीसदी कम हुआ प्रदूषण
दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने सितंबर में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPBC) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि उसकी कोशिशों के चलते पिछले चार बरसों में वायु प्रदूषण में 25 फीसदी की कमी आई है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट (Account) पर दिल्ली के नीले आसमान की तस्वीरें पोस्ट की। यहां तक कि उन्होंने डेनमार्क के कोपेनहेगन में ‘सी 40 वल्र्ड मेयर समिट’ में वायु प्रदूषण पर सफलता की कहानी साझा की। इस सम्मेलन को उन्होंने वीडियो काफ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।  

- समाधान की कोशिश

1. मौसम ने दी राहत
मौसमी दशाओं से राहत एवं बारिश तथा तेज हवाओं ने शहर के बाशिंदों को प्रदूषण से राहत की सौगात दी। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और शहर की सरकार को चीन की तर्ज पर दिल्ली में एक विशाल ‘स्मॉग टावर’ (वायु को शुद्ध करने के लिए) बनाने को कहा। लेकिन पर्यावरणविदों एवं विशेषज्ञों ने कहा कि यह महंगा और अक्षम है जो सिर्फ इसके निर्माताओं एवं विक्रेताओं को फायदा पहुंचाएगा।  

2. सीएसई के मुताबिक उठाए गए कई कदम
सीएसई की निदेशक सुनीता नारायण (Sunita Narayan) के मुताबिक पिछले तीन बरसों में कई अहम कदम उठाए गए हैं जिनमें दिल्ली में कोयला के उपयोग पर प्रतिबंध से लेकर वाहनों के लिए स्वच्छ ईंधन की ओर बढऩा और प्रदूषण के लिए बहुत हद तक जिम्मेदार ट्रकों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाना आदि शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि ये पर्याप्त कदम नहीं हैं। उन्होंने कहा कि शहर को फिर से गैस चैम्बर में तब्दील होने से बचाने के लिए पराली के प्रबंधन को लेकर सतत समाधान, बिजली संयंत्रों से होने वाले प्रदूषण पर रोक, स्वच्छ ईंधन आधारित उद्योग, मजबूत सार्वजनिक परिवहन प्रणाली और व्यापक जन जागरूकता की जरूरत है।

3. प्रदूषण से निजात पाने के लिए दिल्ली सरकार की कोशिश
केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) ने लोगों को पटाखे नहीं जलाने समझाने की कोशिशों के तहत एक बड़े लेजर शो का भी आयोजन किया। हालांक, काफी संख्या में लोगों ने इस साल भी पटाखे जलाने के लिए उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई दो घंटे की समय सीमा का धड़ल्ले से उल्लंघन किया। हरित पटाखों को विक्रेताओं और खरीददारों ने भी तवज्जो नहीं दी। इसका कारण संभवत: उनमें विविधता का अभाव, सीमित भंडार और ऊंची कीमतें रही।  

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