Wednesday, Dec 01, 2021
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safarnama 2019 every year suffered due to economic decline throughout the year

सफरनामा 2019: पूरे साल आर्थिक गिरावट से हर सेक्टर हुआ बेहाल

  • Updated on 12/19/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। देश की आर्थिक स्तर में आई गिरावट को लेकर साल 2019 में कई रिपोर्ट और आंकड़े सामने आए हैं। भारत का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी वित्त वर्ष 2019-20 की पहली तिमाही में बीते वर्ष की इसी अवधि की तुलना में काफी कमजोर रहा है। ऐसी अवस्था में देश की अर्थव्यवस्था में तरक्की की रफ्तार धीमी हो रही है।

आर्थिक तौर पर उद्योग के बहुत से सेक्टर में विकास की दर कई साल में सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई है जिसमें प्राइवेट से लेकर सरकारी कंपनियां तक बड़े अर्थिक संकट से जूझ रही हैं। इसी के साथ देश मंदी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

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ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में आई गिरावट
देश की आर्थिक मंदी ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को पिछले एक साल से बुरी तरह जकड़ा हुआ है। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, और महिंद्रा जैसी बड़ी कंपनियों में शेयर में लगभग 55 प्रतिशत तक की गिरावट आयी है। इसके साथ तीन माहिने में 2 लाख लोगों की नौकरी चली गई।

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कारों की बिक्री में आई गिरावट
सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2019 में यात्री गाड़ियों की बिक्री 2019 में 30.9 प्रतिशत गिरकर 2,00,790 इकाई पर आ गई। दिसंबर 2000 के बाद से ये सबसे ज्यादा गिरावट है। वहीं मोटरसाइकिल और स्कूटर की बिक्री 16.8 प्रतिशत घटकर लगभग 1.51 मिलियन यूनिट रह गई।

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10 लाख लोगों की नौकरियों पर है खतरा
ऑटोमोबाइल उघोग में आई गिरावट को लेकर ऑटोमेटिव कॉम्पोनेन्ट मैन्युफैक्चरर्स एसोसियशन(acma) ने सराकर को चेताया था कि अगर ऑटोमोबाइल उघोग में लंबे समय तक मंदी जारी रही तो लगभग 10 लाख लोगों की नौकरियां जा सकती है। वहीं आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है कि गाड़ियों की कम खरीद के कारण कच्चे तेल और रिफाइनरी उत्पादों पर असर पड़ा है।

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कपड़ा उघोग में आई गिरावट
देश में कपड़ा उघोग करीब 10 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। जिसमें  इस साल भारी गिरावट देखी गई। देश में किसानों के कपास बिक्री में गिरावट आई है, अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 80,000 करोड़ रुपये का कपास की फसल की खरीद न होने पर इसका असर किसानों पर पड़ेगा।

इस पर टेक्सटाइल एसोसिएशन के अनिल जैन ने बताया कि टेक्सटाइल सेक्टर में 25 से 50 लाख के बीच नौकरियां गई हैं। और धागों का निर्यात 33 प्रतिशत कम हुआ है।

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वाणिज्य एंव उद्योग मंत्रालय के आंकड़े
इसके अलावा कोयला, कच्चा तेल, रिफाइनरी उत्पाद, प्रकृतिक गैस खाद, स्टील, सिमेंट और बिजली क्षेत्र में गिरावट आया है। वाणिज्य एंव उध्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार इस साल के सितंबर महिने में पिछले साल की तुलना में इन क्षेत्रों में 5.2 प्रतिशत की गिरवट आई है। वहीं पिछले साल इन क्षेत्रों में 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई थी।

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कोयला क्षेत्र में गिरावट
इस साल सबसे अधिक कोयला क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई। जिसमें 20.5 प्रतिशत की गिरावट हुई है। इसके बाद रिफाइनरी उघोग में 6.7 प्रतिशत, कच्चे तेल में 5.4 फीसदी , प्रकृतिक गैस में 4.9, बिजली में 3.7, सीमेंट में 2.1 और स्टील में 0.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

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औद्योगिक विकास में कमी से बिजली उत्पादन में कमी
आर्थिक मामले के जानकारों का कहना है कि देश के औद्योगिक गतिविधि को दिखाने वाले इंडेक्स ऑफ इंडसिट्रियल प्रोडक्शन में इन आठ क्षेत्रों की भागीदारी 40 प्रतिशत है। बिजली उत्पादन में भी कमी आई है क्योंकि औद्योगिक विकास जीरो के करीब पहुंच रहा है।

इसी तरह सीमेंट में गिरावट की बड़ी वजह कंस्ट्रक्शन का कम होना है क्योंकि लोग घर नहीं खरीद रहे हैं। हाल ही के आंकड़े बताते हैं कि औद्योगिक उत्पादन 1.1 प्रतिशत तक गया है जो कि बेहद खराब स्तर का है।



मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इसके सुधार के लिए सराकर क्या कदम उठाएगी ये तो आगे ही पता चलेगा। अभी तक किए गए प्रयासों से अर्थव्यस्था उठती दिखाई नहीं दे रही है।

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