Monday, Mar 01, 2021
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सफरनामा 2020: धारा 370 को लेकर नजरबंद हुए नेताओं ने अपनी रिहाई के बाद दिए ये बड़े बयान

  • Updated on 12/29/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) ने बीते साल यानी 2019 में एक ऐतिहासिक फैसला करते हुए जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) से अनुच्छेद 370 (Artical-370) को समाप्त कर दिया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को पूरी तरह से ब्लैक आउट कर दिया गया था। इंटरनेट सेवाओं और जम्मू कश्मीर यात्रा पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। वहीं एक के बाद एक घाटी के तमाम बड़े नेताओं को नजरबंद कर दिया गया। अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार को जमकर घेरा।

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शर्तों के साथ किया गया नेताओं को रिहा
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और कई स्थानीय पार्टियों के नेताओं को पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में ले लिया था। एक साल से भी अधिक समय तक हिरासत में रखे गए सभी नेताओं को इस साल यानी 2020 में समय-समय पर शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया। इस साल सबसे पहले 13 मार्च को फारूक अब्दुल्ला और 24 मार्च को उमर अब्दुल्ला को रिहा कर दिया गया था। वहीं सरकार ने महबूबा मुफ्ती की हिरासत की अवधि को लगातार बढ़ाया गया। फिर बाद में 14 महीने नजरबंद रखने के बाद मुफ्ती को 13 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया। नजरबंदी से छूटते ही सभी नेताओं ने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कुछ ऐसे बयान दिए जो कि देश विरोधी से कम नहीं थे। 

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फारूक अब्दुल्ला ने कहा था ये
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नैशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) ने भारत चीन सीमा विवाद को लेकर कहा था कि केंद्र द्वारा हटाए गए अनुच्छेद 370 को समर्थन कभी भी चीन ने नहीं किया है। चीन शुरू से ही इस फैसले का विरोध करता रहा है और यही कारण है कि वो एलएसी पर लगातार अपना आक्रामक रुख दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि हम चीन की मदद से एक बार फिर से जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए को वापस लेकर आएंगे। 

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चीन के सहयोग से होगी 370 की वापिसी
फारूक अब्दुल्ला ने आगे कहा कि अब आप लोग ही बताइए कि पीएम मोदी किसी तरह से हमे बराबरी का दर्जा दे रहे हैं। अगर यहां ऐसा ही होता रहा तो यहां के युवा कैसे आगे बढ़ेंगे? इन सभी को देखकर ही मैं उम्मीद करता हूं कि चीन के सहयोग से एक बार फिर से घाटी में अनुच्छेद 370 की वापिसी होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के मुद्दे पर भी चीन की तरह बात करनी चाहिए। जिससे जल्द से जल्द पाकिस्तान के साथ भी चल रहे मुददे सुलझ सकें।

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मुफ्ती का देश विरोधी बयान
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) ने अपनी रिहाई के बाद ही 1 मिनट 23 सेकेंड का एक ऑडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने धारा 370 को लेकर कहा कि उस काले दिन का काला फैसला उनके दिमाग में खटकता रहा है। महबूबा मुफ्ती ने कहा था, 'एक साल से ज्यादा समय तक हिरासत में रहने के बाद मुझे रिहा कर दिया गया है। उस काले दिन का काला फैसला मेरे दिल और रुह पर हर पल वार करता रहा। मुझे यकीन है कि ऐसी ही स्थिति जम्मू-कश्मीर के लोगों की रही होगी। अनुच्छेद-370 की बहाली के लिए संघर्ष होगा।'

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तिरंगा नहीं उठाएंगे- मुफ्ती
इतना ही नहीं रिहा होने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि वह तभी तिरंगा उठाएंगी, जब पूर्व राज्य का झंडा और संविधान बहाल किया जाएगा। मुफ्ती ने कहा था, 'जिस वक्त हमारा ये झंडा वापस आएगा, हम उस (तिरंगा) झंडे को भी उठा लेंगे। मगर जब तक हमारा अपना झंडा हमें नहीं मिल जाता तब तक हम किसी और झंडे को हाथ में नहीं उठाएंगे। उन्होंने कहा था, वो झंडा हमारे आईन का हिस्सा है, हमारा झंडा तो ये है। उस झंडे से हमारा रिश्ता इस झंडे की देन है।'

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