Saturday, Apr 17, 2021
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सफरनामा 2020 : जेएनयू हिंसा, दंगों और कोरोना ने ली दिल्ली पुलिस की खूब अग्निपरीक्षा

  • Updated on 12/31/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। जेएनयू हिंसा मामले में अपनी जांच के लिए आलोचना का सामना करने से लेकर दंगों से निपटने वाली दिल्ली पुलिस के सामने 2020 में राष्ट्रीय राजधानी में कोविड-19 दिशानिर्देशों और लॉकडाउन को लागू कराने के साथ ही इस दौरान ड्यूटी पर तैनात अपने कर्मियों को भी संक्रमण से बचाने की चुनौती थी। पुलिस बल के लिये 2020 एक के बाद एक नई चुनौतियां पेश करता रहा। जनवरी से शुरू करें तो जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में उस वक्त हिंसा भड़क गई जब लाठी-डंडे लेकर नकाबपोश उपद्रवियों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला बोल दिया और परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके साथ दिल्ली पुलिस की छवि पर बी तरह-तरह के सवाल उठे। जामिया यूनिवर्सिटी के भीतर और बाहर दिल्ली पुलिस ने बर्ताव किया, उससे भी कई गंभीर सवाल उठे। हाल ही में दिल्ली दंगों के पीड़ितों की कानूनी लड़ाई लड़ रहे वकील महमूद पराचा के ऑफिस में रैड की गई, उससे भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। तबलीगी जमात का मुद्दा भी दिल्ली पुलिस के रोल पर कई गंभीर सवाल खड़े कर गया।

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जेएनयू हिंसा मामले की जांच कर रही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने इस मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। वहीं फरवरी में दिल्ली के उत्तरपूर्वी हिस्से में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई जबकि 400 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इन दंगों में गोकलपुरी में पथराव के दौरान घायल हुए हेड कांस्टेबल रतन लाल (42) की भी मौत हो गई थी। शहर में दंगों के ठीक बाद दिल्ली पुलिस बल को एस एन श्रीवास्तव के तौर पर अपना नया प्रमुख मिला। पद भार संभालने के बाद उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता शांति बहाल करना और राष्ट्रीय राजधानी में सांप्रदायिक सौहार्द सुनिश्चित करना है। 

अब 2021 के लिये अपना नजरिया व्यक्त करते हुए श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मौजूदगी को विस्तार देने पर ध्यान रहेगा जिससे इसे सिर्फ लोगों की शिकायतों के निस्तारण तक ही सीमित न रखकर बल की सकारात्मक छवि बनाने और नकारात्मक विमर्शों को हटाने में इसका उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि शीर्ष प्राथमिकता जनता की शिकायतों को तेजी से सुलझाने और बल के र्किमयों के कल्याण संबंधी मुद्दों को देखने की रहेगी। 

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श्रीवास्तव ने कहा, 'लोक शिकायतों पर प्रतिक्रिया में सुधार मेरी प्राथमिकता में होगा। इसे अच्छे से करने और कम समय में करने पर जोर होगा। यह सब कुछ मैं अपनी टीम- दिल्ली पुलिस, के सक्रिय सहयोग के बिना नहीं कर पाऊंगा, इसलिये मुझे उनके कल्याण से जुड़े मामलों को भी देखना होगा और उनके मुश्किल वक्त में उनके साथ रहना होगा।’’ ऐसे समय में जब कड़ाके की ठंड के बीच केंद्र के कृषि कानून के खिलाफ हजारों किसान दिल्ली की सीमा पर डटे हैं तो कानून-व्यवस्था के लिये वहां बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के कर्मियों की तैनाती पर पुलिस आयुक्त ने कहा ‘‘ यद्यपि वहां बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी तैनात हैं लेकिन रास्ता बंद करने के अलावा वहां कानून-व्यवस्था संबंधी कोई दूसरा मामला नहीं है, अत: स्थिति नियंत्रण में हैं।’’ 

उन्होंने कहा, 'हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जरुरी वस्तुओं की आपूर्ति और लोगों की आवाजाही के लिए अन्य मार्ग खुले रहें।’’ उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के संदर्भ में श्रीवास्तव ने कहा कि दंगे खत्म होने के बाद जब माहौल थोड़ा शांत हुआ तो हमने लोगों को आगे आकर अपनी शिकायत दर्ज कराने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, 'यही वजह है 755 प्राथमिकी दर्ज की गईं, उनकी जांच की गई और विशेष जांच दल गठित किये गए।’’ उन्होंने बताया कि इन 755 मामलों में से अब तक 395 में आरोप-पत्र दाखिल किये जा चुके हैं। करीब 1,696 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विभिन्न पक्षों ने हालांकि पुलिस की जांच के तौर-तरीकों की आलोचना की है।  

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समूची जांच के बारे में पुलिस आयुक्त ने कहा कि जांच अच्छी तरह से की गई और जांच दल इसके पीछे की साजिश का खुलासा करने में कामयाब रहे। उन्होंने कहा, 'आलोचना तब होती है जब हम अपना काम अच्छे से करते हैं क्योंकि जो लोग हमारी जांच से प्रभावित होते हैं, स्वाभाविक रूप से उनसे हम सराहना की उम्मीद नहीं कर सकते। वे निश्चित रूप से हमारी जांच पर सवाल उठाएंगे।’’ श्रीवास्तव ने कहा, 'यह अदालत को तय करना है कि जांच कैसी हुई, और जांच की दिशा सही है या नहीं यह कहना अदालत का काम है।’’ 

कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान दिल्ली पुलिस के कर्मी यह सुनिश्चित करने के लिये सड़कों पर थे कि लोग घरों के अंदर रहें। उन्होंने आवश्यक आपूर्तियों की आवाजाही बरकरार रखी, बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों तक पहुंचे और उन्हें खाना, मास्क व सेनेटाइजर जैसी आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराईं। जागरुकता फैलाने से लेकर कोविड-19 के प्रसार से नागरिकों को सुरक्षित रखने तक, लोगों को आवाजाही के लिये पास जारी करने, हेल्पलाइन नंबर शुरू करने, वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंचने से लेकर जरूरतमंदों तक राशन पहुंचाने तक का काम लॉकडाउन में दिल्ली पुलिस के र्किमयों के जिम्मे रहा। यहां तक कि दिल्ली पुलिस की पीसीआर वैन ने एंबुलेंस का काम करते हुए कई जगह गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों तक पहुंचाया।  

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महामारी के दौरान समाज की सेवा के अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए दिल्ली पुलिस के कई कर्मचारियों की मौत भी हुई। पुलिस के मुताबिक कोविड-19 के कारण उसके 32 कर्मियों की मौत हुई। वायरस से संक्रमित दिल्ली पुलिस के 7500 कर्मियों में से 7250 संक्रमण मुक्त हो चुके हैं जबकि 250 अन्य का इलाज जारी है। महामारी के दौरान अगस्त में धौला कुआं और करोल बाग के बीच रिज रोड पर संक्षिप्त मुठभेड़ के बाद उत्तर प्रदेश के मोहम्मद मुस्तकीम खान की गिरफ्तारी से एक बड़े आंतकी हमले की साजिश को टाल दिया गया। खान कथित तौर पर आईएसआईएस से संबद्ध था। चरणबद्ध तौर पर लॉकडाउन खत्म करने के दौरान दिल्ली पुलिस ने 15 जून से मास्क नहीं पहनने पर 5,12,060 लोगों का चालान किया जबकि सार्वजनिक स्थान पर थूकने के लिये 3409 चालान काटे गए। सामाजिक दूरी के नियम का पालन नहीं करने वाले 38,147 लोगों का भी चालान काटा गया।  

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