Monday, Jan 21, 2019

लालबत्ती क्षेत्र में बच्चों के लिए ‘सुरक्षित स्वर्ग’

  • Updated on 12/27/2018

जब से एक गैर सरकारी संगठन (एन.जी.ओ.) ने बच्चों के लिए एक सुरक्षित स्थान बनाया है, तब से कोलकाता के चेतला में राखाल दास आडी रोड के लालबत्ती क्षेत्र में लगभग 60 बच्चों तथा उनकी मांओं का जीवन बदल गया है। 

एक स्थानीय क्लब का छोटा-सा कमरा तथा एक दालान बहुत से बच्चों को आकर्षित कर रहा है। जिनमें से  बहुत से हिंसा तथा प्रताडना के शिकार लोगों के छोड़े हुए हैं। बहुत से अब पढना चाहते हैं तथा कुछ नए कौशल सीखने के लिए उत्सुक हैं। 

बच्चे प्रत्येक शाम केन्द्र में चार घंटे बिताते हैं जिस दौरान वे अपना होमवर्क करते हैं तथा भावनात्मक समर्थन के अलावा कुछ अतिरिक्त कोचिंग प्राप्त करते हैं। 

उनकी मदद करने वालों में क्षेत्र की एक कालेज छात्रा, एक विजिटिंग कौंसलर तथा कुछ सामाजिक कार्यकत्र्ता हैं। समुदाय की तीसरे वर्ष की कालेज छात्रा पूर्णिमा दास, जिसे प्यार से ‘टीचर दीदी’ कहा जाता है, ने बताया कि बच्चे धीरे-धीरे अपनी समस्याओं को लेकर उन तक पहुंचना शुरू हुए हैं। 

बच्चों की मांएं भी एक सुरक्षित स्थान मिलने पर राहत महसूस करती हैं। एक मां ने बताया कि वे खुश हैं। अब उन्हें पता है कि उनके बच्चे आवारा नहीं घूमेंगे क्योंकि वे व्यस्त रहते हैं। उन पर वह ध्यान दिया जा रहा है जिसकी उन्हें जरूरत है। 

अपनी मांओं के साथ संबंध सुधारने संबंधी सलाह के अतिरिक्त उनको वहां अब यौन अपराध से बच्चों की सुरक्षा संबंधी कानून के बारे में पढ़ाया जाता है। उन्हें सबक के बीच उनके अधिकारों तथा कत्र्तव्यों बारे भी जानकारी दी जाती है। 

चूंकि वहां बच्चे सुरक्षित महसूस करते हैं इसलिए वे खेलने तथा पढऩे में आनंद महसूस करते हैं। वे मिलकर त्यौहार मनाते हैं और समाज कल्याण  अभियानों की योजना तैयार करते हैं। बड़ी उम्र के बच्चे छोटों की मदद करते हैं ताकि एक मजबूत तथा अधिक शिक्षित दूसरी पीढ़ी तैयार हो सके। 

इसी तरह के केन्द्र वल्र्ड विजन द्वारा सोनागाछी, बोबाजार, कालीघाट, राम बागान तथा किरिंपोर में संचालित किए जा रहे हैं जिनमें 400 से अधिक बच्चे पढ़ते हैं। 

परियोजना के सामुदायिक विकास अधिकारी अरनब साहू ने बताया कि इसकी शुरूआत 20 बच्चों के साथ एक शैल्टर के तौर पर हुई थी, जो अब 60 से अधिक बच्चों का ‘अंतिम आश्रय स्थल’ है। यहां उन्हें हमारी कोचिंग के माध्यम से एक नई दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। स्कूल छोडऩे वालों को शीघ्र ही वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। केन्द्र शाम को बच्चों को पोषक अल्पाहार भी उपलब्ध करवाता है।                                                                                     ---सी. घोष

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

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