Wednesday, Mar 20, 2019

सिरसा को घेरने के लिए विरोधियों ने रचा 'चक्रव्यूह'

  • Updated on 3/5/2019

नई दिल्ली/(सुनील पाण्डेय): दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रस्तावित आतंरिक चुनाव 9 मार्च को होंगे, इस बात पर संशय बरकरार हो गया है। चुनाव में मनजिंदर सिंह सिरसा के अध्यक्ष बनने की खबरें आने के बाद पंथक राजनीतिक में आज नया सियासी समीकरण पैदा हो गया है। सिरसा को रोकने के लिए सभी विरोधी दल एवं सदस्य लामबंद होते दिख रहे हैं। 

विरोधियों ने ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है कि सिरसा किसी भी सूरत में अध्यक्ष की कुर्सी तक न पहुंच सकें। इसमें सबसे अहम रोल शिरोमणि अकाली दल (दिल्ली) का है, जिसके कमेटी सदस्य करतार सिंह चावला ने अदालती ब्रेकर लगाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा दिया है। चावला ने मंगलवार को तीस हजारी कोर्ट में गुरुद्वारा चुनाव निदेशालय द्वारा 1 मार्च 2019 को जारी किए गए पत्र को चुनौती दे डाली है। साथ ही समय से पूर्व कमेटी कार्यकारिणी चुनाव कराने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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चावला की याचिका पर बुधवार को दोपहर दो बजे सुनवाई होगी। इसके बाद बड़ा खेल होने की संभावना बन जाएगी। सूत्रों के मुताबिक कमेटी के मौजूदा महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा के नये अध्यक्ष बनने की अटकलों के बीच विरोधी दलों द्वारा अदालत में चुनाव को रोकने के लिए जाना सत्ता के नये समीकरण पैदा होने की ओर ईशारा कर रहा है। क्योंकि, सरना बंधू व सिरसा दोनों पंजाबी बाग से आते हैं, इसलिए किसी भी कीमत पर सिरसा का कमेटी अध्यक्ष बनना सरना बंधुओं को रास नहीं आने वाला है। 

लिहाजा, सिरसा का रास्ता रोकने के लिए सभी सिरसा विरोधी लोग एकत्र होने शुरू हो गए हैं। अभी तक सिरसा निर्विरोध जीतने की स्थिति में हैं। लेकिन, बदले समीकरणों के बीच विरोधी अपनी पूरी ताकत सिरसा को हरवाने के लिए उम्मीदवार खड़ा करने में लगा सकते हैं। वर्तमान में सरना दल के 7 सदस्य, भाई रंजीत सिंह की पार्टी के 2 सदस्य, 1 निर्दलीय तरविंदर सिंह मारवाह, व बाकी बचे जीके समर्थक सदस्य सिरसा के खिलाफ अपनी वोट भुगता सकते हैं।

सूत्रों की माने तेा विरोधियों की पूरी कोशिश है कि अकाली दल के कुछ नाराज सदस्यों को साथ लेकर सिरसा को तगड़ी चुनौती दी जाए। लिहाजा, अब देखना होगा कि 9 मार्च को होने वाले चुनाव कमेटी करवाएगी या कमेटी की तरफ से कोई नया हलफनामा दाखिल करके कमेटी के चुनाव को 29 मार्च को ही करवाने का अदालत को भरोसा दिया जा सकता है।

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चुनाव की टाइमिंग, कम समय पर उठाये सवाल 
याचिकाकर्ता चावला ने याचिका के जरिये सवाल उठाया है कि जनरल हाउस बुलाने के लिए कम से कम 15 दिन का नोटिस अनिवार्य है। जबकि निदेशालय के हिसाब से समय सीमा सिर्फ 8 दिन की दी गई है। साथ ही मौजूदा कार्यकारिणी का कार्यकाल 29 मार्च 2019 तक है। आयोग द्वारा जारी किए गए पत्र में इस बात की जानकारी नहीं है कि 9 मार्च को होने वाले कार्यकारिणी के चुनाव 2 साल के लिए है, या उपचुनाव मात्र 20 दिन के लिए है। 

याचिका में चावला ने सवाल उठाया है कि जब 19 जनवरी 1019 को कमेटी की मौजूदा कार्यकारिणी ने जनरल हाउस में इस्तीफा दिया था तो उसी समय शेष बचे कार्यकाल के लिए बाकी सदस्यों में से नये पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी सरदस्यों का चयन क्यों नहीं किया गया। इस्तीफा मंजूर करने के बाद जनरल हाउस की कार्यवाही खत्म क्यों की गई। बता दें कि चुनाव निदेशालय ने पत्र के माध्यम से दिल्ली कमेटी के जनरल मैनेजर को 9 मार्च को जनरल हाउस बुलाने का आदेश जारी किया था। साथ ही जनरल हाउस के लिए सभी सदस्यों को कमेटी द्वारा न्यौता भेजने की बात कहीं गई थी।

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