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sawan maas 2020 is starting from 6th july know its importance prshnt

Sawan Maas 2020: इस दिन से प्रारंभ हो रहा है सावन मास, जानिए इसका महत्व

  • Updated on 7/3/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। इस साल सनातन पंचांग का सावन महीना या श्रावण 6 जुलाई (सोमवार) से आरंभ होने जा रहा है। यह मास देवादी देव महादेव को यह समर्पित है और इसमें भगवान शिव की आराधना की जाती है। इस माह को लेकर मान्यता है कि इसमें भोलेनाथ की आराधना करने से सभी कष्टों का नाश होता है और सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

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सावन मास की शुरूआत और समापन पर शुभ योग
हिंदू पंचांग के अनुसार सावन मास पांचवा महीना होता है यह महीना इस साल 6 जुलाई सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इसका समापन 3 अगस्त को होगा उस दिन भी सोमवार ही है। सोमवार का दिन महादेव का दिन माना जाता है, इसलिए यह महत्वपूर्ण है।

इस बार सावन मास की शुरुआत सोमवार को और समापन भी सोमवार को हो रहा जो कि काफी शुभ और फलदाई माना जा रहा है। सावन मास को लेकर मान्यता है कि इन दिनों में भक्ति भाव से भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। 

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सावन मास की पौराणिक कथा
इस माह को लेकर पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट नाम का जहर निकला था तो देव और दानव दोनों उससे भयभीत हो गए थे और कोई भी इसे लेने के लिए तैयार नहीं था। इस बीच इसको लेकर चारों तरफ हाहाकार मच गया था और ये विष इतना जहरीला था कि सभी दिशाएं इस से जलने लगी थी। इस विष से दानव देव ऋषि मुनि सभी जलने लगे थे। इस विष से बचने के लिए सभी महादेव के पास गए और उन्होंने दृष्टि को बचाने के लिए विष को ग्रहण कर लिया।

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कालकूट जहर के सेवन से मिला निलकंठ नाम
माना जाता है कि जब भगवान शिव ने जब विष को धारण किया तो उस समय माता पार्वती ने उनके गले को दबाए रखा जिससे विश्व का प्रभाव केवल गले में हुआ और शेष शरीर इसके प्रभाव से अछूता रह गया। विष इतना जहरीला था कि महादेव का कंठ नीला हो गया, इसलिए उनको नीलकंठ भी कहा जाता है, विष के प्रभाव से जब महादेव को असहनीय गर्मी को सहन करना पड़ा तो कैलाश पति को विष की गर्मी से छुटकारा दिलवाने के लिए इंद्र ने वर्षा करवाई थी, शिव ने सावन के महीने में विषपान किया था। इसलिए इस महीने उत्तम वृद्धि के योग बनते हैं और शरीर की गर्मी को शांत करने के लिए भक्त शिवलिंग पर शीतल जल चढ़ाते हैं।

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