Wednesday, Apr 14, 2021
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कृषि कानूनों के अमल पर SC के फैसले से भड़के किसान, कहा- यह सरकार का काम था, कोर्ट का नहीं

  • Updated on 1/12/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र के नए कृषि कानूनों (Farm Laws) को वापस लेने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन 48वें दिन भी जारी है। पंजाब, हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान बड़ी संख्या में दिल्ली की सरहदों पर डेरा डाले हुए हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र की मोदी सरकार (Modi Government) को बड़ा झटका देते हुए अगले आदेश तक तीनों कृषि कानूनों को लागू करने पर रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर प्रदर्शनकारी किसान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

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SC के फैसले पर किसान ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
सिंघु बॉर्डर से एक किसान (Farmer) ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के रोक का कोई फायदा नहीं है क्योंकि यह सरकार का एक तरीका है कि हमारा आंदोलन बंद हो जाए। यह सुप्रीम कोर्ट का काम नहीं है यह सरकार का काम था, संसद का काम था और संसद इसे वापस ले। जब तक संसद में ये वापस नहीं होंगे हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

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किसानों ने कोर्ट से की विनती
वहीं बुराड़ी ग्राउंड से भारतीय किसान यूनियन के बिंदर सिंह गोलेवाला ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट से विनती करना चाहेंगे कि कानूनों पर रोक नहीं बल्कि कोर्ट को कानूनों को रद्द करने का फैसला करना चाहिए क्योंकि डेढ़ महीना हो गया है सरकार इस पर कुछ सोच नहीं रही है।

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कृषि कानून पर SC का बड़ा फैसला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसके साथ ही इस कानून से संबंधित विवाद को हल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी के गठन का भी निर्देश दिया है जो संबंधित पक्षों के विवादित मामलों की सुनवाई करेगी।   

इससे पहले, केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि कोई ताकत उसे नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती और उसे समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है। उसने किसानों के प्रदर्शन पर कहा, हम जनता के जीवन और सम्पत्ति की रक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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किसान हल चाहते हैं तो कमेटी के सामने पेश हो- SC
न्यायालय ने साथ ही किसान संगठनों से सहयोग मांगते हुए कहा कि कृषि कानूनों पर 'जो लोग सही में समाधान चाहते हैं, वे समिति के पास जाएंगे'। उसने किसान संगठनों से कहा, 'यह राजनीति नहीं है। राजनीति और न्यायतंत्र में फर्क है और आपको सहयोग करना ही होगा।'

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हमें कानून को निलंबित करने का अधिकार- कोर्ट
प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे, न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन की पीठ ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए यहां तक संकेत दिया था कि अगर सरकार इन कानूनों का अमल स्थगित नहीं करती है तो वह उन पर रोक लगा सकती है। कोर्ट ने कहा कि कोई ताकत हमें नए कृषि कानूनों पर जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए समिति का गठन करने से नहीं रोक सकती तथा हमें समस्या का समाधान करने के लिए कानून को निलंबित करने का अधिकार है । 

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