Monday, Mar 01, 2021
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मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना पर SC की मुहर, सेंट्रल विस्टा योजना को हरी झंडी

  • Updated on 1/5/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा योजना को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने हरी झंडी दिखा दी है। कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा परियोजना की खातिर पर्यावरण मंजूरी और भूमि उपयोग में बदलाव की अधिसूचना को बरकरार रखा। सेंट्रल विस्टा परियोजना की घोषणा सितंबर 2019 में की गई थी। इसके तहत त्रिकोण के आकार वाले नए संसद भवन का निर्माण किया जाएगा जिसमें 900 से 1,200 सांसदों के बैठने की व्यवस्था होगी।

इसका निर्माण अगस्त 2022 तक पूरा होना है। उसी वर्ष भारत 75वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 2:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि परियोजना के लिए जो पर्यावरण मंजूरी दी गई है तथा भूमि उपयोग में परिवर्तन के लिए जो अधिसूचना जारी की गई है वे वैध हैं।

न्यायमूर्ति खानविलकर ने खुद की तथा न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की ओर से यह फैसला लिखा जिसमें सेंट्रल विस्टा परियोजना के प्रस्तावक को सभी निर्माण स्थलों पर स्मॉग टॉवर लगाने और एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।

पीठ के तीसरे न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने भी परियोजना को मंजूरी पर सहमति जताई हालांकि उन्होंने भूमि उपयोग में बदलाव संबंधी फैसले पर और परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दिए जाने पर असहमति जताई। अनेक याचिकाओं पर शीर्ष अदालत का यह फैसला आया है जिनमें परियोजना को दी गई विभिन्न मंजूरियों पर आपत्ति जताई गई है, इनमें पर्यावरण मंजूरी दिए जाने और भूमि उपयोग के बदलाव की मंजूरी देने का भी विरोध किया गया है। इनमें से एक याचिका कार्यकर्ता राजीव सूरी की भी है।

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अधिकतम ऊंचाई 12 मीटर होगी
सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास के लिए सरकार के नये प्रस्ताव के मुताबिक प्रधानमंत्री के नए आवासीय परिसर में चार मंजिला दस इमारतें होंगी और इसकी अधिकतम ऊंचाई 12 मीटर होगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को छोड़ने का ‘सवाल ही नहीं उठता है।’ सीपीडब्ल्यूडी ने पर्यावरण और वन मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति के सामने नए प्रस्ताव में इसका उल्लेख नहीं किया था।

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CPWD ने लागत में किया इजाफा
परियोजना को लागू करा रहे केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने अनुमानित लागत को भी 11,794 करोड़ रुपये से संशोधित कर 13,450 करोड़ रुपये कर दिया है। सीपीडब्ल्यूडी ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि प्रधानमंत्री का नया आवास 15 एकड़ भूखंड पर बनेगा और इसमें 10 इमारतें होंगी तथा इसमें भूतल के साथ तीन मंजिल होंगी। प्रधानमंत्री का नया आवास 30,351 वर्ग मीटर में फैला होगा।

2.50 एकड़ की भूमि आवंटित की जाएगी
स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप के लिए 2.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। सीपीडब्ल्यूडी ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना में उपराष्ट्रपति इनक्लेव भी होगा जिसे 15 एकड़ भूखंड पर बनाया जाएगा और पांच मंजिला इमारतें बनायी जाएंगी। इसकी अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर होगी। उपराष्ट्रपति इनक्लेव में 32 इमारतें होंगी।

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दस्तावेज में कोई कारण नहीं बताया 
नए प्रस्ताव में नए प्रधानमंत्री कार्यालय का उल्लेख नहीं होने को लेकर सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की विधि शोधार्थी कांची कोहली ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय को सौंपे गए दस्तावेज में कोई कारण नहीं बताया गया है कि कुछ कार्यालयों को क्यों छोड़ा गया है या उन सबको शामिल नहीं किए जाने के बावजूद लागत में क्यों बढ़ोतरी की गयी है। सेंट्रल विस्टा के पुनर्विकास परियोजना के तहत संसद का नया भवन, एक साझा केंद्रीय सचिवालय का निर्माण होगा और राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तीन किलोमीटर के राजपथ को संवारा जाएगा।

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