Saturday, Mar 06, 2021
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कृषि कानूनों पर अपनी राय रखने से बचेगी SC कमेटी, किसानों को दिया ये संदेश

  • Updated on 1/20/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कृषि कानूनों (New Farm Laws) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा बनाई गई कमेटी कि किसानों के साथ बातचीत 21 जनवरी सुबह 11:00 बजे तय हो चुकी है। कमेटी के सदस्यों ने कहा कि वह किसी के पक्ष या सरकार के पक्ष में नहीं है ना ही किसानों से बातचीत में अपने निजी राय हावी होने देंगे।

पूसा परिसर में मंगलवार को हुई कमेटी की पहली बैठक के बाद शेतकरी संगठन के प्रमुख अनिल घनवट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समिति 21 जनवरी को किसानों और अन्य हित धारको से पहले चरण की वार्ता करेगी। उन्होंने कहा कि समिति की सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शनकारी किसानों को बातचीत के लिए तैयार करने की होगी। हम इसका यथासंभव प्रयास करेंगे।

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सबकी राय जानना चाहती है SC कमेटी
घनवट ने कहा कि समिति केंद्र और राज्य सरकारों के अलावा किसानों और सभी अन्य हित धारकों की कृषि कानूनों पर राय जानना चाहती है। घनवट के मुताबिक कमेटी उन सभी से राय लेगी जो इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं अथवा समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा सरकार से कहेंगे वह भी अपना पक्ष कमेटी के सामने रखे।

घनवट ने बताया कि कमेटी जल्द ही एक वेबसाइट भी तैयार करने की कोशिश कर रही है ताकि जो लोग कमेटी के समक्ष आकर अपनी बात कहने की स्थिति में नहीं है वह वेबसाइट पर अपनी राय रख सकें। उन्होंने कहा कि समिति के सदस्य सुप्रीम कोर्ट में जमा करने के लिए रिपोर्ट तैयार करने के दौरान कृषि कानूनों पर अपने निजी राय अलग से रखेंगे।

मान के स्थान पर किसी और को शामिल करने का अधिकार SC को 
मान के स्थान पर किसी अन्य को समिति में शामिल करने के सवाल पर घनवटी ने कहा कि इसका गठन सुप्रीम कोर्ट ने किया है और वह तय करेगी कि किसे नियुक्त करना है। उन्होंने कहा कि समिति के समक्ष आने को अनिच्छुक उन प्रदर्शनकारी किसानों से हम कहना चाहते हैं कि ना तो हम किसी के पक्ष में है और ना ही सरकार की ओर से हैं। हम सभी सुप्रीम कोर्ट की ओर से हैं।

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सबका पक्ष सुन अदालत को बताएंगे- घनवट
प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों और विपक्ष द्वारा सदस्यों के सरकार के समर्थक होने के आरोपों पर घनवट ने कहा कि आप हमारे पास बातचीत के लिए आइए हम आपकी सुनेंगे और आपकी राय को अदालत के सामने रखेंगे। हम सभी से बातचीत करने का अनुरोध करते हैं।

करीब 54 दिनों से कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसान दिल्ली की सीमाओं को घेरे बैठे हैं। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर है, जिसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट ने 11 जनवरी को तीनों कानूनों के अमल पर रोक लगाने के साथ गतिरोध दूर करने के लिए 4 सदस्य समिति का गठन किया था। समिति में अनिल घनवट के अलावा कृषि विशेषज्ञ प्रमोद जोशी, अशोक गुलाटी और भूपेंद्र सिंह मान को शामिल किया गया था। एक सदस्य भूपेंद्र सिंह मान ने खुद को समिति से अलग कर लिया। कमेटी के 3 सदस्यों ने अपनी पहली बैठक की। 

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