Friday, Sep 30, 2022
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sc refuses urgent hearing on hijab controversy, says don''''t spread sensation

हिजाब विवाद पर तत्काल सुनवाई से SC का इनकार, कहा- न फैलाए सनसनी

  • Updated on 3/24/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया, जिसमें अदालत ने कक्षा के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था और कहा था कि हिजाब इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा का हिस्सा नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश एन. वी. रमण और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की एक पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत के अनुरोध को खारिज कर दिया। कामत ने कहा था कि परीक्षाएं चल रही हैं, इसलिए मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा, ‘परीक्षाओं का इस मामले से कोई लेना- देना नहीं है।’

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे बार- बार मामले का जिक्र कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘सॉलिसिटर जनरल जी, क्या आप इंतजार कर सकते हैं।’ वहीं, उसने कामत से कहा कि मामले को संवेदनशील ना बनाएं। कामत ने कहा, ‘इन लड़कियों की 28 तारीख को परीक्षा है। उन्हें स्कूल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा। उनका एक साल बर्बाद हो जाएगा।’

न्यायालय ने हालांकि उनके अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उच्चतम न्यायालय कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने से इनकार करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर होली के अवकाश के बाद सुनवाई करने के लिए 16 मार्च को सहमत हो गया था।

न्यायालय ने कुछ छात्राओं की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े की उन दलीलों पर गौर किया था कि आगामी परीक्षाओं को देखते हुए तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है। मामले में उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के आदेश के खिलाफ कुछ याचिकाएं दायर की गयी हैं। उच्च न्यायालय ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है।

उच्च न्यायालय ने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली उडुपी स्थित ‘गवर्नमेंट प्री-यूनिर्विसटी गल्र्स कॉलेज’ की मुस्लिम छात्राओं के एक वर्ग की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। उसने कहा था कि स्कूल की वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से स्वीकृत है, जिस पर छात्राएं आपत्ति नहीं उठा सकतीं।

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