Wednesday, Jun 19, 2019

मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश पर SC का फैसला, केंद्र सरकार को दिया नोटिस

  • Updated on 4/16/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। मस्जिदों में महिलाओंn के प्रवेश को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नोटिस जारी कर चार हफ्ते के अंदर केेंद्र सरकार, सेंट्रल वक्फ काउंसिल (Central Waqf council) और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से जवाब मांगा है। पीठ ने पूछा कि क्या अनुच्छेद 14 का इस्तेमाल किया जा सकता है, क्या मस्जिद और मंदिर सरकार के हैं, जैसे आपके घर में कोई आना चाहे तो आपकी इजाजत जरूरी है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार को भी घेरा और पूछा कि सरकार इस मामले में कहां हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि राज्य को अधिकार देने का कर्तव्य है लेकिन क्या कोई व्यक्ति ( नॉन स्टेट एक्टर) संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21)  के तहत दूसरे व्यक्ति से समानता का अधिकार मांग सकता है? सुप्रीम कोर्ट परीक्षण करेगा कि क्या महिलाओं को मस्जिद (Mosque) में सबके साथ नमाज पढ़ने की इजाजत दी जा सकती है या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, सेंट्रल वक्फ काउंसिल (Central Waqaf council) और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (Muslim Personal law Board) को नोटिस दिया है और जल्द से जल्द इस पर जवाब मांगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट जनहित याचिका दायर हुई थी जिसे यासमीन जुबेर अहमद पीरजादे (Yasmin zuber ahmed parizade) और जुबेर अहमद नजीर अहमद पीरजादे (Zuber ahmed parizade) नाम के एक मुस्लिम कपल ने दाखिल किया था। उस याचिका में मुस्लिम कपल ने महिलाओं की मस्जिद में प्रवेश और नमाज अदा करने की मांग की गई थी

साथ ही दायर याचिका में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और सेंट्रल वक्फ काउंसिल को इस बाबत जरूर दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई है। बता दें कि याचिका में इस परंपरा को असंवैधानिक और अवैध करार देने का आग्रह किया गया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एस ए बोबडे (S.A Bobde) और जस्टिस अब्दुल नजीर (Abdul Nazeer) की पीठ ने की।

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वहीं याचिका में संविधान का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मुस्लिम महिलाओं पर ये रोक असंवैधानिक और भेदभावपूर्ण है। ये रोक संविधान के आर्टिकल 14, 15, 21, 25 और 29  के खिलाफ है। याचिका में अपील गई है कि इस प्रथा को असंवैधानिक करार दिया जाए।

गौरतलब है कि सुन्नी मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश कर नमाज अदा करने पर रोक है। यह रोक मोहम्मद साहब के दौर से है। वहीं बता दें कि देश के कुछ मस्जिदों में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति है, जिसमें जामा मस्जिद समेत और भी कई मस्जिद शामिल है।

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गौरतलब है कि केरल के सबरीमाला में मासिक धर्म से गुजरने वाली हिंदू महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटने के बाद ही मुस्लिम महिलाओं ने मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश और नमाज अदा करने के लिए मुहिम छेड़ने के संकेत दिए थे। केरल की सामाजिक कार्यकर्ता वीपी जुहरा का कहना था कि यह रोक महिलाओं के नैतिक अधिकारों और बराबरी के अधिकार का उल्लंघन करती है।

 

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