Sunday, Feb 18, 2018

उत्तराखंड के PWD में हुआ करोड़ों का घोटाला, अपनाई ऐसी ट्रिक कि जान के रह जाएंगे दंग

  • Updated on 2/13/2018

देहरादून/ ब्यूरो। निर्माण खंड, लोक निर्माण विभाग देहरादून में अधिकारियों ने ठेकेदारों से मिलकर निविदाओं का प्रकाशन कर करोड़ों रुपये का घोटाला करने का एक नायाब तरीका खोज निकाला। जिस अखबार में टेंडर प्रकाशित किए गए उसके एक ही एडिशन की एक ही तिथि की प्रतियां भिन्न थीं। इस बात को लेकर टेंडर प्रकाशन पर सवाल उठे, तो मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने मामले की मुख्य सचिव को गहनता से जांच के निर्देश दिए हैं

 इस तरह के टेंडर की कीमत लगभग सवा दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।यहां एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष एवं जी.एम.वी.एन. के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने निर्माण खंड, लोक निर्माण विभाग, देहरादून में करोड़ों रुपये के टेंडर घोटाले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के विभाग में जीरो टॉलरेंस कहीं नजर नहीं आ रहा है। पूरी सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ लिप्त है।

सरकार अधिकारियों के जरिए धन उगाही में जुटी है। आम जनता को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं हो पा रही हैं। नेगी ने बताया कि मोर्चे के जिला मीडिया प्रभारी प्रवीण शर्मा ने आरटीआई में लोनिवि निर्माण खंड द्वारा विकास नगर क्षेत्र के आठ जांच के लिए 2.25 करोड़ रुपये की निविदाओं को लेकर जानकारी मांगी थी। विभाग ने कोई सूचना नहीं दी। अंत में जनसंघर्ष मोर्चा अपनी अपील लेकर राज्य सूचना आयोग पहुंचा।

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आयोग ने अपनी जांच पड़ताल में पाया कि अल्पकालीन निविदाओं के प्रकाशन में अनियमितताएं हैं। एक ही अखबार के एक ही एडिशन में पेपर अलग-अलग हैं। ऐसे में निविदाओं को साठगांठ करके निविदाओं का गुपचुप प्रकाशन कराया गया है। 
नेगी ने आरोप लगाया कि विभिन्न कार्यों के लिए जारी निविदा सूचना को मात्र कुछ चहेते ठेकेदारों को 3.4 प्रतिशत न्यूनतम दर पर आवंटित कराए गए हैं। यदि टेंडर सार्वजिनक रूप से जारी किए जाते, तो वे 30-40 प्रतिशत न्यूनतम दर पर स्वीकृत होते। प्रदेश सरकार को होने वाला लाखों का नुकसान नहीं होता।

नेगी ने यह भी आरोप लगाया कि गिरोहबंद ठेकेदार अधिकारियों से मिलीभगत करके समाचार पत्रों में साठगांठ करके टेंडर की कुछ प्रतियां अलग से प्रकाशित कराते हैं। सार्वजनिक रूप से बांटी जाने वाली प्रतियों में टेंडर प्रकाशित नहीं कराते हैं। इस तरह करोड़ों रुपये के टेंडर अखबारों में प्रकाशित करवा कर सरकारी धन को ठिकाने लगाया जाता है। पत्रकार वार्ता में मोर्चा के महासचिव आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, प्रवीन शर्मा और प्रभाकर जोशी आदि मौजूद रहे।

मुख्य सचिव को जांच के निर्देश

मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ने गुपचुप तरीके से प्रकाशित किए जा रहे टेंडर मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामले में आपराधिक साठगांठ भी हो सकती है। यह अत्यंत गंभीर किस्म का मामला प्रतीत होता है। इसकी गहराई से जांच कराई जानी आवश्यक है।

सीएस को दिए निर्देश में आयोग ने कहा कि निविदा प्रकाशन के इस प्रकरण के आपराधिक और विभागीय दोनों पहलुओं पर आवश्यक जांच कराए जाएं, ताकि मामले में लिप्त विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को ही दंडित न केवल किया जा सके, बल्कि संबंधित समाचार पत्र और सरकारी विभागों के बीच आपराधिक साठगांठ पाए जाने पर कार्रवाई शुरू की जा सके।

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