Thursday, Feb 09, 2023
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Schedule change: Administration busy, government changed its decision

शेड्यूल चेंज : प्रशासन व्यस्त, शासन ने बदला अपना फैसला

  • Updated on 10/11/2021

नई दिल्ली/टीम डिजीटल। कोरोना काल में प्रभावित श्रमिकों के सेवायोजन एवं रोजगार के लिए सरकारी स्तर पर जारी प्रयासों पर अब प्रत्येक सप्ताह विचार-मंथन नहीं किया जाएगा। जिला स्तरीय समिति की बैठक प्रत्येक 7 दिन की बजाए एक माह के भीतर आयोजित होगी। कोविड-19 एवं विभिन्न विकास योजनाओं में डीएम की जिम्मेदारी बढ़ने के कारण यह निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश शासन ने इस संदर्भ में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कामगारों और श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा तथा सर्वांगीण विकास के मकसद से उप्र कामगार और श्रमिक (सेवायोजन एवं रोजगार) आयोग गठित किया गया था।

कोरोना संक्रमण की भयावह स्थिति को देखकर पिछले साल जून में इस आयोग के गठन की जरूरत महसूस की गई थी। इसके जरिए सरकारी तथा गैर सरकारी क्षेत्र में अधिकाधिक सेवायोजन एवं रोजगार के अवसर सृजित करना है। प्रवासी तथा मूल निवासी कामगारों एवं श्रमिकों के हितार्थ यह कदम उठाए गए थे। इसी क्रम में आयोग एवं उसके अंतर्गत गठित कार्यकारी परिषद की अनुशंसा जनपद स्तर पर क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए जनपद स्तरीय समिति भी गठित है। जनपद गाजियाबाद में डीएम की अध्यक्षता में यह समिति काम करती है।

जिला स्तरीय समिति की अब तक प्रत्येक सप्ताह में बैठक आयोजित किए जाने की अनिवार्यता थी। यानी प्रत्येक 7 दिन के भीतर गाजियाबाद में प्रवासी एवं मूल निवासी श्रमिकों के सेवायोजन एवं रोजगार की प्रक्रिया पर चर्चा करनी होती थी। चर्चा के उपरांत जरूरी निर्णय लिए जाते थे। उप्र शासन ने कोविड़-19 एवं विभिन्न विकास योजनाओं में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी बढ़ने पर इस समिति की प्रत्येक सप्ताह बैठक करने की बाध्यता को समाप्त कर दिया है। अब प्रत्येक माह में एक बार यह बैठक आयोजित की जाएगी। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने इस बावत डीएम और सीडीओ गाजियाबाद को पत्र भेजकर अवगत कराया है। भविष्य में प्रतिमाह बैठक कर शासन को भी इसकी जानकारी दी जाएगी। 

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