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school and college open from monday in jammu and kashmir supreme court on article 370

J&K: सोमवार से खुलेंगे स्कूल- कॉलेज, SC ने कहा, सरकार को कुछ और वक्त मिलना चाहिए'

  • Updated on 8/16/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) में संविधान के अनुच्छेद 370 (Article 370) के अधिकतर प्रावधानों को निरस्त करने के बाद राज्य में लोगों के जीवन को सामान्य बनाने के लिए प्रशासन ने सोमवार से स्कूलों- कॉलेजों और सरकारी दफ्तरों को खोलने का फैसला किया है। वहीं, सरकारी कार्यालय और सचिवालय आज यानी शुक्रवार से ही कामकाज शुरू कर देंगे। इसके साथ ही अगले कुछ दिनों में कश्मीर में मीडिया पर लगे प्रतिबंध भी हटा दिए जाएंगे।

कश्मीर टाइम्स (Kashmir Times) की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह कश्मीर और जम्मू के कुछ जिलों में पत्रकारों एवं मीडियाकर्मियों की आवाजाही पर लगी सभी पाबंदियों को तत्काल हटाने के संबंध में केंद्र और जम्मू- कश्मीर प्रशासन के लिए निर्देश चाहती हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान रद्द किए जाने के बाद मीडिया पर लगाई गई पाबंदियां हटाने के लिए दायर याचिका पर कोई निर्देश देने से पहले वह कुछ समय इंतजार करेगा। 

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सरकार को कुछ और समय देने की जरूरत - SC

इससे पहले केंद्र ने कोर्ट को बताया कि यह पाबंदियां धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं। मीडिया पर लगी पाबंदियां हटाने के लिये दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थिति में सुधार हो रहा है और बंदिशें धीरे-धीरे हटाई जा रही हैं। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने इस संबंध में केंद्र के कथन का संज्ञान लेते हुए कहा, 'हम कुछ समय देना चाहते हैं। हमने आज ही समाचार पत्र में पढ़ा है कि धीरे-धीरे लैंडलाइन और ब्राडबैंड कनेक्शन बहाल किए जा रहे हैं। इसलिए, हम अन्य संबद्ध मामलों के साथ ही इस याचिका पर सुनवाई करेंगे।' 

पीठ ने कहा, 'लैंडलाइन काम कर रही हैं। हमें भी आज जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का फोन मिला था।' पीठ ने कहा, 'हम देखते हैं कि इस मामले को सुनवाई के लिए कब सूचीबद्ध किया जा सकता है। हम प्रशासनिक पक्ष में इसकी तारीख निर्धारित करेंगे।

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कश्मीर से मीडिया पर हटाए जाए बैन

कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन (Anuradha Bhasin) की ओर से अधिवक्ता वृन्दा ग्रोवर ने अपनी याचिका में पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट व लैंडलाइन सेवाओं समेत संचार के सभी माध्यमों को बहाल करने के निर्देश देने की मांग की है ताकि मीडिया अपना काम कर सकें।

ग्रोवर ने कहा, 'मेरा मामला प्रेस की स्वतंत्रता से संबंधित है और उसका अनुच्छेद 370 से कोई संबंध नहीं है।' इस पर पीठ ने कहा कि इस मामले को भी उसी पीठ को भेजा जा सकता है जिसमे मंगलवार को इसी तरह की याचिका पर विचार किया था। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अनेक पाबंदियां लगाने के केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से मंगलवार को इनकार कर दिया था और कहा था कि हालात सामान्य बनाने के लिए उन्हें समुचित समय दिया जाना चाहिए। इस पीठ ने सारे मामले में दो सप्ताह बाद सुनवाई करने का निश्चय किया था।

ग्रोवर ने कश्मीर टाइम्स की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि मीडियार्किमयों के आवागमन पर अनेक बंदिशें लगी हैं और संचार व्यवस्था बंद होने की वजह से अखबारों का प्रकाशन ठप है। उन्होंने कहा कि सिर्फ श्रीनगर से ही कुछ रिपोर्टिंग हो रही है और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में प्रेस की भूमिका बनाए रखना जरूरी है।

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सुरक्षाबलों पर भरोसा करना चाहिए

केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने कश्मीर टाइम्स पढ़ा है जो जम्मू से प्रकाशित हो रहा था और सारे मीडिया को सभी अन्य स्थानों से काम करने की अनुमति दे दी गई है। कश्मीर टाइम्स श्रीनगर से प्रकाशित नहीं होने पर उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया। सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मीडिया से पाबंदियां हटाने के लिए दायर याचिका पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

सरकार ने अदालत को बताया कि कश्मीर प्रशासन द्वारा जमीनी हालात का रोजाना जायजा लिया जा रहा है और सुप्रीम कोर्ट को और जनता को जम्मू- कश्मीर में तैनात सुरक्षा बलों पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अधिकारी रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रहे हैं और इस क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कुछ समय दिया जाना चाहिए।'

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