Monday, Jul 06, 2020

Live Updates: Unlock 2- Day 4

Last Updated: Sun Jul 05 2020 10:11 PM

corona virus

Total Cases

697,026

Recovered

424,185

Deaths

19,699

  • INDIA7,843,243
  • MAHARASTRA206,619
  • NEW DELHI99,444
  • TAMIL NADU86,224
  • GUJARAT36,123
  • UTTAR PRADESH24,056
  • RAJASTHAN19,256
  • WEST BENGAL17,907
  • ANDHRA PRADESH17,699
  • HARYANA15,732
  • TELANGANA15,394
  • KARNATAKA14,295
  • MADHYA PRADESH13,861
  • BIHAR10,392
  • ODISHA8,601
  • ASSAM7,836
  • JAMMU & KASHMIR7,237
  • PUNJAB5,418
  • KERALA4,312
  • UTTARAKHAND2,831
  • CHHATTISGARH2,795
  • JHARKHAND2,426
  • TRIPURA1,385
  • GOA1,251
  • MANIPUR1,227
  • LADAKH964
  • HIMACHAL PRADESH942
  • PUDUCHERRY714
  • CHANDIGARH490
  • NAGALAND451
  • DADRA AND NAGAR HAVELI203
  • ARUNACHAL PRADESH187
  • MIZORAM151
  • ANDAMAN AND NICOBAR ISLANDS97
  • SIKKIM88
  • DAMAN AND DIU66
  • MEGHALAYA51
Central Helpline Number for CoronaVirus:+91-11-23978046 | Helpline Email Id: ncov2019 @gov.in, ncov219 @gmail.com
scientists made spectacles that will save from corona aljwnt

GOOD NEWS: वैज्ञानिकों ने बनाया कोरोना से बचाने वाला चश्मा, आम लोग भी कर सकेंगे इस्तेमाल

  • Updated on 7/1/2020

नई दिल्ली/सुनील पाण्डेय। कोविड से लड़ रहे अग्रिम पंक्ति में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस कर्मियों, सफाई कर्मचारियों एवं अन्य लोगों  को संक्रमण से बचाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक सुरक्षात्मक चश्मा बनाने की तकनीक विकसित की है। यह चश्मा कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ रहे  लोगों को संक्रमण से बचाने में मददगार हो सकता है। चश्में का उपयोग आम लोग भी कर सकते हैं। यही कारण है कि इस चश्में के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी गई है।

सीएसआईआर ने चश्मे के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन के लिए  चंडीगढ़ की कंपनी सार्क इंडस्ट्रीज से समझौता किया है, जो अब इसे बनाएगी। वैज्ञानिकों ने इसकी तकनीक और कंपनी को सौंप दिया है।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर की कोरोना से मौत, दो बार दी गई थी प्लाज्मा थेरेपी

यह खोज केंद्रीय वैज्ञानिक उपकरण संगठन (सीएसआईओ), चंडीगढ़ के वैज्ञानिकों ने किया है।  वैज्ञानिकों के मुताबिक इस सुरक्षात्मक चश्मे में लचीला फ्रेम लगाया गया है, ताकि यह त्वचा के साथ प्रभावी सीलिंग के रूप में आँखों के ऊपर एक अवरोधक के रूप में कार्य कर सके। आँखों के आसपास की त्वचा को कवर करने में सक्षम इस चश्मे के फ्रेम को कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे इसमें प्रिस्क्रिप्शन ग्लास भी लगा सकते हैं। इस चश्मे में मजबूत पॉलीकार्बोनेट लेंस और पहनने में आसानी के लिए इलास्टिक पट्टे का उपयोग किया गया है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक पलकों के भीतर आंख की पुतलियों को चिकनाई देने वाली नेत्र श्लेषमला झिल्ली, शरीर में एकमात्र आवरण रहित श्लेष्म झिल्ली होती है। आंखें खुलती हैं तो नेत्र श्लेषमला झिल्ली बाहरी वातावरण के संपर्क में आती है, जो अनजाने में वायरस के प्रवेश का कारण बन सकती है। सीएसआईओ के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सुरक्षात्मक चश्मा इस चुनौती से लडऩे में मदद कर सकता है। इस चश्मे को कुछ इस तरह से बनाया गया है, जिससे स्वास्थ्यकर्मियों को खतरनाक एरोसॉल के साथ-साथ अन्य निलंबित कणों से बचाया जा सकता है।

कोरोना मरीजों के इलाज में सफल नहीं दिख रही प्लाज्मा थेरेपी- ICMR सूत्र

सीएसआईओ के ऑप्टिकल डिवाइसेज ऐंड सिस्टम्स विभाग के प्रमुख डॉ विनोद कराड़ के मुताबिक इस चश्मे की तकनीक को विकसित करने के लिए उद्योगों और संबंधित हितधारकों के सुझावों को भी शामिल किया गया है।

आम लोग भी कर सकते हैं चश्मे का उपयोग
 सीएसआईओ के निदेशक डॉ संजय कुमार की माने तो यह तकनीक इस प्रयोगशाला के निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जो कोविड-19 का मुकाबला करने के उद्देश्य से तकनीकी समाधान विकसित करने और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे का समर्थन करने के लिए किये जा रहे हैं। परियोजना से जुड़ीं प्रमुख शोधकर्ता डा. नेहा खत्री कहती हैं कि इस चश्मे को विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों में उपयोग किया जा सकता है।

सीएसआईओ में बिजनेस इनिशिएटिव्स ऐंड प्रोजेक्ट प्लानिंग के प्रमुख डॉ सुरेंदर एस. सैनी ने बताया कि इस सुरक्षात्मक चश्मे का उपयोग स्वास्थ्यकर्मियों के अलावा आम लोग भी कर सकते हैं। इस परियोजना में   डा. संजीव सोनी, डा. अमित एल. शर्मा, डा. मुकेश कुमार और विनोद मिश्रा शामिल हैं।

यहां पढ़ें कोरोना से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरें-

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.