Friday, Dec 06, 2019
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पवार के पेंच से उद्धव को सीएम बनने के लिये करना पड़ सकता है इंतजार

  • Updated on 11/12/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। महाराष्ट्र (Maharashtra) में चुनाव परिणाम आए 18 दिन बीत गए लेकिन आज तक सरकार का गठन नहीं हो पाया है। राज्य में सियासी उठापटक का दौर जारी है। कल तक सीएम पद का शपथग्रहण करने को तैयार उद्धव ठाकरे (Udhav Thackeray) को शरद पवार (Sharad Pawar) ने अभी तक हरी झंडी नहीं दी है। जिससे एक बार फिर राज्य का पवार पावर के पास जाता दिख रहा है। इस बीच राज्यपाल भगत सिंह कोश्यिारी ने शिवसेना के सरकार बनाने के डेडलाइन खत्म होने के बाद एनसीपी को सरकार बनाने के लिये आमंत्रण किया है। आज फिर दिन भर राज्य से लेकर दिल्ली तक गहमागहमी रहेगी। कांग्रेस और एनसीपी के अनिर्णय के बाद एक बार फिर उद्धव के सीएम पद की शपथ लेने में देरी हो सकती है। 

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राज्यपाल ने एनसीपी को दिया आमंत्रण

राज्यपाल के एनसीपी को सरकार बनाने के लिये आमंत्रण के बाद फिर से राजनीति में नया मोड़ आ गया है। माना जा रहा है कि एनसीपी और कांग्रेस आज एक बैठक करके अंतिम फैसला ले सकता है। लेकिन अगर एनसीपी राज्यपाल के द्वारा दिये गए अल्टीमैटम रात 8.30 बजे तक सरकार बनाने का फॉर्मूला पेश नहीं कर सका तो राष्ट्रपति शासन लगने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है

Sharaw pawar giving speech

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उद्वव की भूमिका हुई सीमित

हालांकि उद्धव ठाकरे की भूमिका अब सीमित हो चुकी है। अब वे मूकदरर्शक की भूमिका में आज कांग्रेस और एनसीपी के निर्णय पर टकटकी लगाए रहेंगे। उद्धव के पत्ता खोलने के बाद अब शरद पवार पर राज्य की राजनीति की सूई एक बार फिर टिक गई है। उधर बीजेपी पूरे घटनाक्रम पर दूर से निगाह गड़ाए हुए है। लेकिन बीजेपी फिलहाल कुछ भी करने की स्थिति में नहीं है। बीजेपी wait and watch की पॉलिसी अपना ली है। 

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Udhav thackeray in rally

बीजेपी फिलहाल करेगी इंतजार

लेकिन इतना तो तय है कि यदि उद्धव ठाकरे सीएम नहीं बन पाएं तो बीजेपी की एक तरह से जीत ही होगी। क्योंकि शिवसेना किसी भी सूरत में सीएम पद को गंवाना नहीं चाहता है। इसलिये सीएम पद की जिद्द पर अड़ते हुए बीजेपी से गठबंधन को तोड़ भी लिया। लेकिन राजनीति के धुरंधर नेता शरद पवार के जाल में उद्धव फंसते नजर आ रहे है। ऐसा लगता है कि आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने के लिये पुत्रमोह से शुरु हुआ उद्धव ठाकरे को तब झटका लगा जब शरद पवार ने उनके शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद ही उद्धव ने यू टर्न लिया और खुद को सीएम के लिये प्रोजेक्ट किया। इसके वाबजूद उनका तीर सही निशाने पर नहीं लगा है। कारण पूरा कमान शरद पवार अपने हाथ में ले रखा है। जो मुंबई से लेकर दिल्ली तक को सकते में डाल दिया है। 

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शरद पवार के पास पहुंचा पावर 
आखिर क्यों न हो शरद पवार जो ठहरें राजनीति के चतुर खिलाड़ी। जिनके सामने उद्धव को अभी बहुत कुछ सीखना पड़ेगा। शायद जल्दबाजी में उद्धव ने जो फैसला किया उससे न सिर्फ ठाकरे परिवार की किरकिरी हुई है बल्कि बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने से दूरगामी नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।  


 

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