Monday, Dec 16, 2019
separate-bypoll-for-2-seats-in-gujarat-congress-gets-big-shock-by-supreme-court

गुजरात में 2 सीटों के लिए अलग उपचुनाव : कांग्रेस को कोर्ट ने दिया झटका

  • Updated on 6/25/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उच्चतम न्यायालय ने गुजरात में राज्यसभा की दो सीटों के लिये अलग-अलग उपचुनाव कराने के निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली कांग्रेस की याचिका पर मंगलवार को यह कहते हुये विचार करने से इंकार कर दिया कि चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और ऐसी स्थिति में वह इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बी आर गवई की अवकाशकालीन पीठ ने हालांकि गुजरात कांग्रेस के नेता की याचिका पर विचार करने से इंकार कर दिया लेकिन राज्यसभा की दोनों सीटों के लिये चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव याचिका दायर करने की उन्हें छूट प्रदान कर दी। 

अस्पताल में भर्ती ब्रायन लारा ने अपने चाहने वालों को दिया पहला संदेश

पीठ ने कहा कि चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद न्यायालय चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करता है। पीठ ने याचिकाकर्ता परेशभाई धनानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा से कहा, ''इसमें मौलिक अधिकार का हनन कैसे है? चुनाव लडऩा एक वैधानिक अधिकार है। आपको चुनाव याचिका दायर करनी होगी।' गुजरात से राज्यसभा की ये सीटें भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गांधीनगर और स्मृति ईरानी के अमेठी लोकसभा सीट से निर्वाचित होने की वजह से रिक्त हुयी हैं। 

RBI यूनियन की मांग- 'कॉलेजियम' से हो गवर्नर, डिप्टी गवर्नरों का सिलेक्शन

निर्वाचन आयोग ने गुजरात की इन दो सीटों के लिये अलग अलग अधिसूचना जारी करने लेकिन एक ही दिन चुनाव कराने का निर्णय लिया था। आयोग के इस निर्णय को कांग्रेस के विधायक और विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता परेशभाई धनानी ने याचिका दायर कर चुनौती दी थी। निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने धनानी की याचिका पर प्रारंभिक आपत्तियां उठाते हुये कहा कि कानून के तहत आयोग को राज्यसभा की सीटों के लिये उपचुनाव को अलग-अलग अधिसूचित करने का अधिकार है और अधिसूचना जारी होने के साथ ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। 

वित्तीय संकट से जूझ रही BSNL को दूरसंचार विभाग ने दिए खास निर्देश

इस पर तन्खा ने कहा कि याचिका में उनके द्वारा उठाये गये मुद्दे बुनियादी महत्व के हैं। पीठ ने तन्खा से कहा, ''चुनाव याचिका दायर कीजिये।' पीठ ने राज्यसभा चुनावों से संबंधित याचिकाओं पर शीर्ष अदालत के कुछ फैसलों का हवाला देते हुये कहा कि ये बहुत ही स्पष्ट हैं। पीठ ने कहा कि वह चुनाव प्रक्रिया में न तो हस्तक्षेप करेगी और न ही इसमें विलंब करेगी। याचिकाकर्ता चुनाव संपन्न होने के बाद उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर सकते हैं।

राम रहीम की पैरोल पर फैसले को लेकर CM खट्टर ने दी सफाई

द्विवेदी ने पीठ से कहा कि इस मामले में किसी भी मौलिक अधिकार का हनन नहीं हुआ है और शीर्ष अदालत तथा दिल्ली और बंबई उच्च न्यायालय द्वारा पहले सुनाये गये फैसले राज्यसभा की सीटों के लिये अलग-अलग चुनाव कराने के आयोग के निर्णय का समर्थन करते हैं। निर्वाचन आयोग ने इससे पहले स्पष्ट किया था कि राज्यसभा सहित सभी सदनों के लिये उपचुनाव के लिये रिक्त हुये स्थानों को ''अलग-अलग रिक्तियां' माना जाता है और इसके लिये अलग-अलग अधिसूचना जारी होती है, भले ही इनका कार्यक्रम एक समान हो।

BJP नेता विजेंद्र गुप्ता की पत्नी से लूटपाट, AAP ने कसा दिल्ली पुलिस पर तंज

धनानी ने आयोग के इस निर्णय को निरस्त करने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि आयोग का यह निर्णय असंवैधानिक, मनमाना और गैरकानूनी है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन होता है। उन्होंने न्यायालय से अनुरोध किया था कि आयोग को इन दोनों सीटों के लिये एकसाथ चुनाव कराने का निर्देश दिया जाये। आयोग ने 15 जून को दिल्ली उच्च न्यायालय के 1994 और 2009 के फैसलों का हवाला दिया था जिनमें जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों के तहत एक ही राज्य में अलग-अलग उपचुनाव कराने की प्रणाली का समर्थन किया गया था।
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.