Sunday, Jun 13, 2021
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वैष्णो देवी के भक्तों के लिए खुशखबरी, 15 अक्टूबर से मिलेंगी ये खास सुविधाएं...

  • Updated on 10/13/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। नवरात्र के मौके पर वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए 15 अक्टूबर से लगभग सभी सुविधाएं बहाल की जा रही हैं। सात महीने के बाद अब श्रद्धालु मां के दरबार में होंगे। इस बार श्रद्धालुओं के लिए घोड़ा, पिट्ठू और पालकी की सेवा भी उपलब्ध रहेगी। 

इतना ही नहीं, राज्य प्रशासन के आदेश के अनुसार अब हर दिन सात हजार श्रद्धालुओं को दर्शन करने की अनुमति मिल गई है। यहां खास बात यह होगी कि स्थानीय या दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए कोई संख्या निर्धारित नहीं की गई है।

नवरात्र को देखते हुए श्राइन बोर्ड प्रशासन श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का बढ़ाने जा रहा है। यात्रा के बीच रास्तों पर भोजनालयों में फलाहार का भी इंतजाम किया जाएगा। जिसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। इस बार पूरे नवरात्र भवन परिसर में शतचंडी महायज्ञ भी चलेगा और श्रद्धालुओं के शामिल होने के लिए पूरी तैयारी की जाएगी।

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वहीँ, वैष्णोदेवी के पूरे रास्ते पर लाइट की अच्छी व्यवस्था की गई है। साथ ही पानी, सफाई और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। इस बारे में श्राइन बोर्ड के सीईओ रमेश कुमार ने कहा कि नवरात्रों को लेकर मां वैष्णो देवी के भवन प्रांगण को देशी-विदेशी फल-फूलों और रंगबिरंगी लाइटों से सजाया जाएगा।

इसके साथ ही श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर, बैटरी कार, केबल कार की भी सुविधा दी जाएगी।  घोड़े, पिट्ठू और पालकी की सुविधाएं भी अब मिलेंगी। कोरोना के कारण 18 मार्च से बंद हुए माता वैष्णो के दर्शन द्वार अब खोल दिए गए हैं। अब बड़ी संख्या में श्रद्धालु आ सकते हैं। 

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कोरोना के कारण पहले तीर्थयात्रियों की रोजाना संख्या 5000 की गई थी, जो अब 7 हजार कर दी गई है। 15 अक्टूबर से यह यात्रा शुरू हो जाएगी। इसके लिए श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। साथ ही, जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपने साथ कोरोना निगेटिव सर्टिफिकेट लाना अनिवार्य होगा।

कोरोना महामारी के इस दौर में यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों के लिए मास्क, फेस कवर लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही सभी की स्कैनिंग की जाएगी। यात्रियों के लिए बैटरी वाहन, यात्री रोपवे और हेलिकॉप्टर सेवाओं को सामाजिक दूरी को ध्यान में रखते हुए चलाया जाएगा। 

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कोरोना महामारी को देखते हुए 60 साल से अधिक उम्र के व्यक्ति या किसी भी रोग से पीड़ित व्यक्ति, गर्भवती महीलाएं और 10 साल के कम उम्र के बच्चों को धार्मिक स्थलों के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा मंदिर परिसर में किसी भी प्रकार के चढ़ावे पर रोक लगा दी गई है।

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