चीन में उइगर मुसलमानों पर कई तरह की पाबंदियां

  • Updated on 11/13/2018

द ह्यूमन राइट्स वॉच (एच.आर. डब्ल्यू.) ने हाल ही में 117 पृष्ठों की एक रिपोर्ट जारी की है जिसका शीर्षक ‘इरैडिकेटिंग आइडियोलॉजिकल वायरसिज-चाइनाज कैंपेन आफ रिप्रैशन अगेंस्ट शिनजियांग्स मुस्लिम्स’ है। इसने पेइङ्क्षचग की व्यापक मनमानी नजरबंदियों, यातनाओं व दुर्वयवहार तथा रोजमर्रा के जीवन में बढ़ते जा रहे व्यापक नियंत्रणों बारे नए सबूत पेश किए हैं। 

अमरीका आधारित एजैंसी ने इस बात की पुष्टि की है कि सारे क्षेत्र में 1.30 करोड़ टॢकश मुस्लिम जनसंख्या को जबरन थोपी गई विचारधाराओं, सामूहिक दंडों, आने-जाने व संचार पर प्रतिबंधों, धार्मिक गतिविधियों पर अत्यंत नियंत्रणों तथा अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों के व्यापक उल्लंघन का सामना करना पड़ रहा है। 

10 लाख से अधिक उइगर मुसलमान नजरबंद
एक अमरीकी आकलन का हवाला देते हुए ब्लूमबर्ग ने कहा है कि चीनी अधिकारियों ने 10 लाख से अधिक उईगरों को नजरबंद कर रखा है। चूंकि मस्जिदों को बंद कर दिया गया है तथा शिनजियांग, जो किसी समय प्राचीन सिल्क रोड व्यापार मार्ग पर पड़ता था, की सीमा के पार आवागमन पर प्रतिबंध के कारण इसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नए व्यापारिक मार्गों को बनाने के प्रयासों में एक ब्लैक होल बनने की आशा पैदा हो गई है। 

सी.आई.ए. की पुरानी रिपोर्टें देखकर यह समझा जा सकता है कि ये चालें 1950 के दशक से ही जारी हैं। जनवरी, 1951 में जारी ऐसी ही एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सिनकियांग (शिनजियांग) में मुसलमान साम्यवादी शासन से असंतुष्ट हैं। आधिकारिक तौर पर यहां प्रार्थना करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है लेकिन युवाओं का ध्यान भटकाने के लिए प्रार्थना के समय आर्केस्ट्रा तथा डांस आदि का जोर-शोर से आयोजन किया जाता है।  4 से अधिक लोगों के इकट्ठे होने  पर रोक है। 

सितम्बर, 1952 की सी.आई.ए. की एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि जून, 1952 से पहले दक्षिण-पश्चिमी सिनकियांग प्रांत में चीनी साम्यवादी सरकार ने उन सभी लोगों को वापस भेजने की नीति अपनाई थी जिनके परिवार मूल रूप से सिनकियांग में उस क्षेत्र से आए थे जो अब पश्चिमी पाकिस्तान है। 

उन्हें वापस भेजने के बाद उनकी सम्पत्ति को कब्जे में ले लिया गया है। वापस भेजे जाने वाले लोगों के साथ एक सशस्त्र गार्ड सिनकियांग-पाकिस्तान सीमा तक जाता था। आज चीनी अधिकारियों ने कई उईगर महिलाओं को नजरबंद किया है जिन्होंने गिलगित-बाल्टिस्तान से आए  पाकिस्तानी व्यवसायियों के साथ विवाह किया था। ऐसा पाकिस्तान की नाराजगी के कारण था। 

सी.आई.ए. ने बताया कि पूर्वी तुुॢकस्तान में पहले चीनी सैनिकों के आने के 2 वर्ष बाद 1952 में सभी प्रमुख सरकारी विभागों की अध्यक्षता चीनी अधिकारी करते थे, जिन्हें रूसी अधिकारी सलाह देते थे। उईगरों पर विश्वास नहीं था इसलिए पर उन्हें उनके सभी पदों से हटा दिया गया, ठीक वैसा ही आज भी है।

सी.आई.ए. की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1952 के अंत तक दक्षिण-पश्चिमी सिनकियांग से यात्रा करने की इजाजत नहीं थी। यहां अधिकारी बड़ी संख्या में उन लोगों को हटाने में जुटे थे, जिन पर 1944 में चीनी शासक के खिलाफ विद्रोह में भाग लेने का आरोप था। 

सी.आई.ए. की रिपोर्ट में कहा गया है कि काशगर के इर्द-गिर्द बनी किलेबंदी की दीवार को जबरन मजदूरों द्वारा गिरा दिया गया और दोनों शहरों की सभी महिलाओं को इस विनाश के कारण पैदा मलबे को हटाने के लिए लगाया गया। काशगर के पुरुषों को सड़कों तथा इमारतों के निर्माण कार्य में जबरदस्ती लगाया गया। 

शीघ्र ही होतान स्थित सिल्क उद्योग सहित सभी लाभकारी व्यवसायों पर साम्यवादी अधिकारियों ने कब्जा कर लिया। निजी व्यवसाय को हतोत्साहित  किया गया तथा लगभग सभी दुकानों को सरकारी स्वामित्व वाले को-आप्रेटिव स्टोरों में बदल दिया गया। दुकानदारों को दिया जाने वाला वेतन बस उनके रहन-सहन के खर्चे को ही पूरा करता था। 

उसी रिपोर्ट में शुद्धिकरण, गिरफ्तारियों तथा फांसी देने जैसे कार्यों की एक लम्बी सूची का हवाला दिया गया था। 60 से अधिक वर्ष बाद भी अशांत क्षेत्र में उग्र नियंत्रण तथा जबरन अनुकूलता अभी भी जारी है। 

‘द पीपुल्स डेली’ की 6 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार ‘सामाजिक स्थिरता में सुधार तथा गरीबी उन्मूलन’  के लिए वर्ष की पहली तिहाई के दौरान 4,61,000 गरीब लोगों को क्षेत्र के अन्य हिस्सों में काम करने के लिए स्थानांतरित किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिनजियांग सरकार की योजना दक्षिणी होतान तथा काशगर प्रांतों से 2019 के अंत तक 1 लाख और लोगों को कहीं और नौकरी के लिए स्थानांतरित करने की योजना है। 

चाइनीज एकैडमी आफ सोशल साइंसिज के ‘विशेषज्ञ’ यू शाओशिआंग  ने बताया कि शिनजियांग में गरीबी उन्मूलन का कार्य अन्य स्थानों के मुकाबले अधिक कठिन है क्योंकि गरीबी के अतिरिक्त यहां जातीय मुद्दों का भी सामना करना पड़ता है। त्रासदी यह है कि यह क्षेत्र ‘मानवतावादी’ बैल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बी.आर. आई.) का एक केन्द्र है जो स्थानीय लोगों के लिए समृद्धि तथा खुशी लाने वाला है। चीन को न केवल दक्षिण में अपने मित्रों की ओर से घुसपैठ का बल्कि सीरिया से प्रशिक्षित होकर शिनजियांग लौटने वाले उइगरों से भी गम्भीर चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

इस बीच ‘शिन्हुआ’ शिनजियांग उईगुर स्वायत्तशासी क्षेत्र को ‘धरती पर स्वर्ग’ के तौर पर प्रोमोट कर रहा है। इसका कहना है कि 2018 के पहले 9 महीनों के दौरान पश्चिमी प्रांत में 13 करोड़ पर्यटक आए। इतना तो निश्चित है कि हान पर्यटकों ने पुनॢशक्षण  शिविरों का दौरा नहीं किया।                                                                                            ---सी. आर्पी

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